‘कोविड’ में डॉक्टरों संग सेवा देने वाले अन्य भी मुआवजे के हकदार, 50 लाख मुआवजे संग हाईकोर्ट ने सुनाया आदेश...
कोविड काल में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले MVVNL कर्मचारी की विधवा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों, ऑक्सीजन प्लांट और अन्य जरूरी जगहों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति करने वाले कर्मचारी भी Covid Warrior की श्रेणी में आते हैं.
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) की कोविड में हुई मौत के मामले में उसकी विधवा द्वारा दायर मुआवजा याचिका का निपटारा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. यह फैसला न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी और न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ की दो सदस्यीय पीठ ने दिया है. पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा है कि, “कोविड ड्यूटी” का सीमित अर्थ निकालना सही नहीं है.
केवल अस्पतालों में मरीजों के बीच सीधे तौर पर सेवाएं देने वाले चिकित्सक या नर्स (अस्पतालों में सीधे सेवाएं देने वाले नहीं) अपितु, कोविड-कोरोना जैसी महामारी के दौरान निर्बाध आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने वाले कर्मचारी भी ‘कोविड-वॉरियर’ की श्रेणी में ही आते हैं. इसी के साथ खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए पीड़िता को 50 लाख रुपए मुआवजा राशि भी तत्काल प्रभाव से दिए जाने का फैसला दिया है.
मुआवजा देने से मना किया पीड़िता पहुंची HC
याचिका के मुताबिक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एक कर्मचारी की अप्रैल 2021 में कोविड काल के दौरान हुए संक्रमण से मौत हो गई थी. कर्मचारी की विधवा ने इस मामले में मुआवजे के लिए उस संबंधित सरकारी विभाग का दरवाजा खटखटाया जहां नौकरी करते हुए उनके पति कोरोना से संक्रमित होकर मौत के मुंह में चले गए थे.
विभाग ने जब मुआवजा देने में आनाकानी की और पीड़िता के पति को कोरोना वॉरियर मानने से ही इनकार कर दिया. तो पीड़िता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट की दो सदस्यीय विशेष खंडपीठ ने जब मामले की सुनवाई शुरु की तो सामने निकल कर आया कि यह मामला तो पीड़िता को उसके पति की कोरोना संक्रमण से हुई मौत के चलते मुआवजा दिए जाने का बनता है.
विधवा को कितने रुपये का मुआवजा मिलेगा?
हाल ही में इस याचिका का निपटारा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की दो सदस्यीय खंडपीठ ने जो फैसला सुनाया वह ऐसे मामलों में आने वाले वक्त में पीड़ितों के लिए मील का पत्थर साबित होगा. फैसले में खंडपीठ ने साफ लिखा है, “मृतक कर्मचारी अस्पतालों, ऑक्सीजन प्लांट्स और अन्य आवश्यक स्थानों पर बिना किसी रुकावट के यानि निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने की सेवा दे रहे थे. जोकि सीधे सीधे फ्रंटलाइन वॉरियर की श्रेणी में आते हैं. इसलिए याचिकाकर्ता के पति और कोविड में जान गंवा चुके बिजली कर्मचारी को कोविड वॉरियर ही माना जाए.”
पीड़ित की विधवा की मुआवजा याचिका का निपटारा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने अहम फसैले में लिखा है कि, “उत्तर प्रदेश सरकार पीड़िता को 50 लाख रुपए की अनुग्रह राशि (Ex Gratia Compensation) तत्काल प्रभाव से दे.” यह राशि उत्तर प्रदेश सरकार 8 सप्ताह के भीतर पीड़िता को अदा करेगी. इस बात का उल्लेख भी संबंधित याचिका के फैसले में किया गया है.
क्या बिजली कर्मचारी भी Covid Warrior माने जा सकते हैं?
फैसला सुनाने वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने अपने ही पूर्व के फैसलों का भी हवाला दिया है. जिनके मुताबिक महामारी के दौरान जलापूर्ति, टेलीफोन, बिजली आपूर्ति और पुलिस सेवा जैसी आवश्यक सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को कोविड-19 में सेवा के दौरान भूमिका निभाने के चलते उन्हें कोविड वॉरियर माना जा चुका है. यह सभी इस तरह के मुआवजे के हकदार हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह अहम फैसला भारत में कोरोना काल में अपनी जान गंवा चुके उन हजारों आश्रित परिवारों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जिन्हें उनके विभाग या महकमे कोरोना वॉरियर न मानकर, उन्हें अब तक मुआवजा देने को ही राजी नहीं थे.




