क्या Neville Roy Singham चाहता है भारत में रिजीम चेंज, कौन है ये शख्स और क्या है इसका नेटवर्क, अमेरिका में चल रही जांच में क्या-क्या खुलासे?
नेविल सिंघम नेटवर्क से जुड़ी 39 मिलियन डॉलर की फंडिंग, तीन संगठनों को समन और ‘रिजिम चेंज’ के आरोपों के बीच राहुल गांधी पर निशिकांत दुबे के दावों से सियासी विवाद तेज है.
39 मिलियन डॉलर की फंडिंग, तीन संगठनों को समन और भारत में ‘रिजिम चेंज’ की साजिश का आरोपों को लेकर नेविल सिंघम नेटवर्क एक बार फिर ग्लोबल पॉलिटिक्स के केंद्र में है. अमेरिका में संगठनों की फंडिंग और गतिविधियों को लेकर उठे सवालों के बीच BJP सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. फॉक्स न्यूज रिपोर्ट के आधार पर दुबे ने दावा किया है कि इस नेटवर्क के जरिए भारत में सरकार विरोधी माहौल बनाने और सत्ता परिवर्तन की कोशिशों को बढ़ावा दिया गया. लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिकी जांच में अब तक क्या सामने आया है, तीन संगठनों को समन क्यों भेजे गए और भारत में लगाए जा रहे ‘रिजीम चेंज’ के आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत क्या हैं?
BJP के ‘सत्ता परिवर्तन’ आरोप में राहुल गांधी का नाम क्यों?
दरअसल, बीजेपी ने मोदी सरकार के खिलाफ बड़ी “सत्ता परिवर्तन” यानी Regime Change साजिश का आरोप लगाया है. पार्टी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के अमेरिकी टेक कारोबारी नेविल रॉय सिंघम और इंटरनेशनल एक्टिविस्ट नेटवर्क के साथ कथित संबंधों पर भी सवाल उठाए हैं. BJP सांसद निशिकांत दुबे ने विदेशी संपर्कों, विरोध प्रदर्शनों, क्रिप्टोकरेंसी, AI और ऑनलाइन जुए से जुड़े नेटवर्क की जांच की मांग की है.
नेविल रॉय सिंघम कौन हैं?
नेविल रॉय सिंघम अमेरिका में जन्मे टेक्नोलॉजी उद्यमी और राजनीतिक दानदाता हैं. उन्होंने IT कंसल्टिंग कंपनी ThoughtWorks की स्थापना की थी. 2017 में उन्होंने कंपनी को करीब 785 मिलियन डॉलर में बेच दिया. इसके बाद उनका नाम कई गैर-लाभकारी संगठनों, मीडिया प्लेटफॉर्म और राजनीतिक वकालत करने वाले समूहों को फंडिंग देने वाले व्यक्ति के तौर पर सामने आया. वह चीन के शंघाई में रहते हैं. उनकी पत्नी जोडी इवांस युद्ध-विरोधी संगठन CodePink की सह-संस्थापक हैं.
सिंघम पर आरोप क्या?
नेविल रॉय सिंघम का नाम सबसे ज्यादा चीन से कथित संबंधों को लेकर विवाद में रहा है. 2023 में New York Times की जांच ने उनके वित्तीय नेटवर्क और वामपंथी राजनीतिक वकालत तथा मीडिया से जुड़े संगठनों के बीच संबंधों की पड़ताल की थी. रिपोर्ट में NewsClick को मिलने वाली विदेशी फंडिंग का भी जिक्र था. हालांकि, सिंघम ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह किसी सरकार या राजनीतिक दल के निर्देश पर काम नहीं करते.
BJP ने मुद्दा क्यों उठाया?
BJP का आरोप है कि सिंघम का नेटवर्क सिर्फ मीडिया और वैचारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग देशों में प्रदर्शनों और राजनीतिक लामबंदी से जुड़े संगठनों तक फैला है. इसी कड़ी को BJP ने भारत में मौजूदा विरोध प्रदर्शनों और राहुल गांधी की राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ा है.
निशिकांत दुबे ने 22 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के विदेशी संपर्कों पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि विदेशी नेटवर्क भारत को अस्थिर करने के लिए विरोध आंदोलनों को प्रभावित कर रहे हैं.
दुबे ने राहुल से क्या पूछा?
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस से पूछा कि पिछले पांच वर्षों में राहुल गांधी ने नेविल रॉय सिंघम, ऑनलाइन जुआ, AI और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े नेटवर्क के किन लोगों से मुलाकात की. उन्होंने यह भी पूछा कि इनमें से कौन लोग राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा या दूसरी यात्राओं में शामिल हुए.
दुबे ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं के दौरान हुई मुलाकातों का ब्योरा भी मांगा और आरोप लगाया कि विदेशी संपर्कों तथा राजनीतिक गतिविधियों के जरिए भारत में अस्थिरता पैदा करने और सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जा रही है.
Fox News ने क्या दावा किया?
इस बीच BJP ने अपने आरोपों को लेकर Fox News Digital की 20 अक्टूबर की जांच रिपोर्ट “Global Chaos Inc Grows to 101 Groups” का हवाला दिया है. रिपोर्ट में दावा किया गया कि 13 देशों में 101 संगठन ऐसे हैं जो विरोध प्रदर्शनों को coordinate, organise या amplify करने का काम कर रहे हैं.
रिपोर्ट में वामपंथी, कम्युनिस्ट, समाजवादी और इस्लामी संगठनों से जुड़े एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय protest network की चर्चा की गई है. इसमें फ्रांस और अन्य देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों तथा सीमा पार विरोध से जुड़े संदेशों के फैलाने का भी जिक्र है.
Indian Alliance Paris क्या?
Fox News की जांच में फ्रांस स्थित Indian Alliance Paris का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक यह संगठन फ्रांस और भारत में होने वाले विरोध प्रदर्शनों के संदेशों के बीच एक कड़ी का काम करता है. इसे मैनहट्टन स्थित The People's Forum से भी जोड़ा गया है.
The People's Forum उन संगठनों में शामिल है, जिनका नाम सिंघम के फंडिंग नेटवर्क के साथ जुड़ा रहा है. हालांकि, किसी संगठन का दूसरे संगठन से जुड़ा होना अपने आप में भारत में सरकार बदलने की साजिश साबित नहीं करता.
सिंघम से जुड़े संगठन कौन हैं?
सिंघम से जुड़े प्रमुख संगठनों में The People's Forum, CodePink, Tricontinental और BreakThrough News के नाम सामने आते हैं. 2026 में अमेरिकी House Ways and Means Committee ने सिंघम से जुड़े गैर-लाभकारी संगठनों की फंडिंग और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की है.
अमेरिकी जांच से संबंधित रिपोर्टों में The People's Forum को करीब 22.44 मिलियन डॉलर, Tricontinental को करीब 16.76 मिलियन डॉलर और BreakThrough BT Media को करीब 1.098 मिलियन डॉलर मिलने का जिक्र किया गया है. भारत के संदर्भ में NewsClick सबसे प्रमुख नाम है, जबकि Tricontinental का भारत में भी काम और नेटवर्क है.
सिंघम का हित क्या है?
सिंघम के मामले में उनका वैचारिक झुकाव अहम है. ThoughtWorks बेचने के बाद उनका नाम सोशलिस्ट, anti-war और राजनीतिक एक्टिविस्ट संगठनों की फंडिंग से लगातार जुड़ा रहा है.
उनके आलोचकों का आरोप है कि उनके नेटवर्क के जरिए वामपंथी विचारधारा और चीन के पक्ष वाले भू-राजनीतिक नैरेटिव को बढ़ावा मिलता है. दूसरी तरफ सिंघम का कहना है कि उनकी फंडिंग सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों तथा वंचित समूहों के समर्थन के लिए है.
इसलिए उनके हित को लेकर दो अलग दावे हैं. आलोचकों के मुताबिक राजनीतिक प्रभाव और China-friendly narrative को बढ़ावा देना, जबकि सिंघम के मुताबिक उनका उद्देश्य वैचारिक और सामाजिक आंदोलनों को समर्थन देना है.
राहुल-सिंघम कनेक्शन कितना पक्का?
यह पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल है. राहुल गांधी और नेविल रॉय सिंघम के बीच सीधे आर्थिक लेन-देन या व्यक्तिगत फंडिंग का पब्लिक डोमेन में अभी तक कोई आधिकारिक सबूत सामने नहीं आया है. BJP का आरोप राहुल गांधी के विदेशी संपर्कों और सिंघम से जुड़े अंतरराष्ट्रीय एक्टिविस्ट नेटवर्क को जोड़कर लगाया गया है. इसलिए “राहुल गांधी सिंघम के नेटवर्क का हिस्सा हैं.
सत्ता परिवर्तन का आरोप कितना साबित?
पूरे विवाद में तीन अलग कड़ियां हैं सिंघम का अंतरराष्ट्रीय फंडिंग नेटवर्क, NewsClick से जुड़ा पुराना विवाद और 2026 में BJP का “Regime Change” आरोप.
नेविल रॉय सिंघम नेटवर्क से जुड़े मेन फैक्ट
101 संगठनों का नेटवर्क: फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका सहित 9 से 13 देशों में फैले करीब 101 संगठनों का एक नेटवर्क है.
चीन से कनेक्शन का दावा: रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सिंघम के नेटवर्क के कुछ अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठनों ने शंघाई की एक कंपनी (शंघाई माकू कल्चरल कम्युनिकेशंस) को बड़ी रकम (करीब 9.1 मिलियन डॉलर) भेजी है, जिसका संबंध चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के प्रचार तंत्र से है.
भारत और यूरोप के प्रदर्शन: रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये संगठन विभिन्न देशों में विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने, बढ़ावा देने या समन्वय करने में भूमिका निभा रहे हैं. इसमें भारत में हो रहे कुछ प्रदर्शनों (जैसे SIR या चुनाव आयोग/विभिन्न मुद्दों से जुड़े विरोध प्रदर्शन) और फ्रांस के दंगों/छात्र प्रदर्शनों के बीच संभावित विदेशी कनेक्शन का शक जताया गया है.
अमेरिकी हाउस पैनल की कार्रवाई: अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) के एक हाउस पैनल ने सिंघम से जुड़े कुछ समूहों जैसे 'ब्रेकथ्रू न्यूज' (BreakThrough News), 'ट्राइकंटिनेंटल' (Tricontinental) और 'पीपुल्स फोरम' (The People's Forum) को समन जारी किए हैं और इनकी फंडिंग की जांच तेज कर दी है.




