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NEET-UG री-एग्जाम में पहली बार सेना की एंट्री! पेपर लीक के बाद सरकार का बड़ा एक्शन, क्या है पूरा प्लान?

21 जून को प्रस्तावित NEET-UG री-एग्जाम के आयोजन में पहली बार भारतीय सशस्त्र बलों की मदद लेने की तैयारी की जा रही है. किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचने के लिए केंद्र सरकार कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रही है.

NEET UG re exam
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NEET UG re exam

( Image Source:  X/ @Thecockroawoql, @NEWSDAILY123 )

NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और कथित धांधली के आरोपों के बाद केंद्र सरकार अब री-एग्जाम को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. 21 जून को प्रस्तावित NEET-UG री-एग्जाम के आयोजन में पहली बार भारतीय सशस्त्र बलों की मदद लेने की तैयारी की जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार परीक्षा से जुड़े संवेदनशील लॉजिस्टिक्स और प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई के लिए सेना और वायुसेना की सेवाएं लेने पर गंभीरता से विचार कर रही है.

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं. ऐसे में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचने के लिए केंद्र सरकार कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रही है. इस पूरे मामले को लेकर गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, एनटीए और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

हाई लेवल बैठक में क्या-क्या हुआ?

सूत्रों के अनुसार, बैठक में NEET-UG री-एग्जाम की सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्रों की छपाई, ट्रांसपोर्टेशन और परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने को लेकर चर्चा हुई. अधिकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण की समीक्षा की ताकि किसी भी तरह की चूक की संभावना खत्म की जा सके. बैठक में यह भी तय किया गया कि परीक्षा संचालन में कई केंद्रीय मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा.

क्या होगी सेना की भूमिका?

एनटीए के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, प्रश्नपत्रों को देशभर के परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए भारतीय थल सेना की मदद ली जा सकती है. इसका उद्देश्य प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखना और किसी भी संभावित लीक या छेड़छाड़ को रोकना है. सरकार चाहती है कि प्रश्नपत्रों की ढुलाई पूरी तरह निगरानी और सुरक्षा के दायरे में हो, ताकि छात्रों का भरोसा दोबारा बहाल किया जा सके.

वायुसेना कैसे करेगी मदद?

21 जून को मानसून और खराब मौसम की आशंका को देखते हुए भारतीय वायुसेना को भी इस योजना में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है. यदि भारी बारिश, तूफान या अन्य प्रतिकूल परिस्थितियां बनती हैं, तो प्रश्नपत्रों की तत्काल और सुरक्षित डिलीवरी के लिए वायुसेना के विमानों का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई राज्यों में मानसून के दौरान सड़क और रेल परिवहन प्रभावित हो सकता है.

क्या परीक्षा निगरानी करेगी सेना?

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका केवल लॉजिस्टिक्स, सुरक्षित परिवहन और आपातकालीन परिस्थितियों तक सीमित रहेगी. सेना या वायुसेना परीक्षा केंद्रों पर निगरानी या परीक्षा संचालन में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगी. सरकार का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करना और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना है.

इस री-एग्जाम को सफलतापूर्वक आयोजित कराने के लिए गृह मंत्रालय, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डाक विभाग, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राज्य सरकारें भी सहयोग कर रही हैं. केंद्र सरकार चाहती है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित हो ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो.

लीक पेपर केस में अब तक क्या हुआ?

वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मूल NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच कर रही है. जांच एजेंसी अब तक इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. सीबीआई कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र लीक का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.

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