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फंडिंग, इस्लामिक ऐप्स, बुर्का, मलेशिया और नया नाम ...Nashik TCS केस में क्या-क्या हुए नए खुलासे- निदा से लेकर इमरान तक था बड़ा प्लान!

नासिक के TCS ऑफिस से जुड़े कथित धर्म परिवर्तन मामले में SIT को नए सबूत मिले हैं. जांच का दायरा मालेगांव से बढ़कर मलेशिया तक पहुंच गया है. इसके साथ ही फंडिंग का भी शक है.

फंडिंग, इस्लामिक ऐप्स, बुर्का, मलेशिया और नया नाम ...Nashik TCS केस में क्या-क्या हुए नए खुलासे- निदा से लेकर इमरान तक था बड़ा प्लान!
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Nashik TCS Case: नासिक के टीसीएस दफ्तर से जुड़े धार्मिक भावनाएं आहत करने और जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश के मामले में जांच अब नए चरण में पहुंच गई है. सोमवार को अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि मुख्य आरोपी निदा खान के खिलाफ और सबूत सामने आए हैं, साथ ही इस मामले के तार नासिक से बाहर मालेगांव और मलेशिया तक जुड़े पाए गए हैं.

विशेष लोक अभियोजक अजय मिश्रा ने अदालत को बताया कि एसआईटी की जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि निदा खान ने शिकायतकर्ता को इस्लाम अपनाने के लिए प्रभावित करने की कोशिश की. उनके मुताबिक, शिकायतकर्ता को बुर्का दिया गया, उसे धार्मिक किताब दी गई और उसके मोबाइल फोन में धार्मिक ऐप्स इंस्टॉल किए गए.

क्या नमाज़ सिखाती थी निदा खान?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अभियोजन ने यह भी कहा कि आरोपी उसे अपने घर ले जाकर नमाज पढ़ने का तरीका सिखाती थी और हिजाब-बुर्का पहनने के लिए कहती थी. यहां तक कि उसका नाम बदलकर ‘हानिया’ रखने की योजना भी सामने आई है. जांच के दौरान उसके फोन से इस्लाम से जुड़े वीडियो, यूट्यूब लिंक और इंस्टाग्राम पोस्ट मिलने की बात भी कही गई है.

जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे मामले का दायरा अब काफी बढ़ चुका है. मालेगांव और मलेशिया से जुड़े लिंक भी सामने आए हैं. आरोप है कि सह-आरोपी दानिश शेख ने शिकायतकर्ता के जरूरी दस्तावेज अपने पास रख लिए थे, जिन्हें मालेगांव में किसी टीम को सौंपा जाना था.

इमरान क्या कर रहा था मलेशिया भेजने की प्लानिंग?

इसके अलावा यह भी सामने आया है कि इमरान नाम के व्यक्ति के जरिए शिकायतकर्ता को नौकरी के बहाने मलेशिया भेजने की योजना बनाई जा रही थी. अब जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि इस कथित साजिश के पीछे कोई आर्थिक मदद या फंडिंग थी या नहीं.

अदालत को यह भी बताया गया कि निदा खान फिलहाल फरार है और उसका मोबाइल फोन जब्त करना जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और लोगों को भी इस तरह निशाना तो नहीं बनाया गया. अभियोजन ने दलील दी कि अगर उसे अग्रिम जमानत मिलती है, तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है. फिलहाल अदालत ने उसे कोई राहत नहीं दी है और उसकी गिरफ्तारी की संभावना बनी हुई है.

आरोपी तरफ से पेश वकील ने क्या कहा?

दूसरी ओर, आरोपी की तरफ से पेश हुए वकील राहुल कसलीवाल ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन के खिलाफ कोई कानून नहीं है और इस मामले में लगाए गए आरोप केवल धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़े हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कोई वास्तविक धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है.

वकील ने एक ही मामले में कई एफआईआर दर्ज किए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि नौ अलग-अलग एफआईआर की बजाय एक ही एफआईआर होनी चाहिए थी. अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 मई को होगी.

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