नौकरी छोड़ना तो दूर दूसरी के लिए सोचना भी हुआ मुश्किल, AIR INDIA से जुड़ी इस कंपनी के कर्मचारियों के सामने रखी गई कैसी नई शर्त
नागपुर स्थित AIESL की MRO यूनिट में नई NOC नीति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी ने ऐसी शर्तें लागू की हैं, जिनसे दूसरी नौकरी के लिए आवेदन करना भी कठिन हो गया है. लगभग 180 तकनीशियनों के इस्तीफे और वर्क बायकॉट से संचालन प्रभावित हुआ है.
महाराष्ट्र के नागपुर जिले में AIESL की MRO यूनिट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी ने ऐसी सख्त शर्तें लागू कर दी हैं, जिनके तहत नौकरी छोड़ना ही नहीं बल्कि दूसरी नौकरी के लिए आवेदन करना भी मुश्किल हो गया है. इस नीति के खिलाफ कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है और मामला अब औद्योगिक टकराव का रूप ले चुका है.
MRO यूनिट में उठा NOC नीति विवाद अब एक बड़े औद्योगिक टकराव का रूप ले चुका है. लगभग 180 तकनीशियनों के इस्तीफे और वर्क बायकॉट ने न सिर्फ कंपनी के संचालन को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे एविएशन मेंटेनेंस सेक्टर में चिंता बढ़ा दी है.
क्या है पूरा मामला?
AIESL प्रबंधन की ओर से एक नया ऑफिस ऑर्डर जारी किया गया, जिसमें यह नियम लागू किया गया कि किसी भी कर्मचारी को दूसरी कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले No Objection Certificate (NOC) लेना अनिवार्य होगा. इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों की रिलिविंग प्रक्रिया और अप्रूवल सिस्टम को केंद्रीकृत किया गया. कुछ मामलों में अनुभव प्रमाणपत्र (Experience Certificate) और दस्तावेज़ जारी करने की प्रक्रिया को भी सख्त किया गया. कंपनी का तर्क माना जा रहा है कि यह कदम वर्कफोर्स कंट्रोल, डेटा सिक्योरिटी और ऑपरेशनल स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी है.
कर्मचारियों का विरोध क्यों?
कर्मचारियों का कहना है कि उनके मूल जॉइनिंग कॉन्ट्रैक्ट में सिर्फ नोटिस पीरियड या नोटिस पे की शर्त थी. NOC जैसी कोई अतिरिक्त शर्त बाद में जोड़ दी गई. यह नियम उनकी करियर मोबिलिटी (career mobility) को रोकता है. निजी एविएशन सेक्टर में नौकरी पाने की प्रक्रिया कठिन हो रही है. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि यह नीति उन्हें 'नौकरी बदलने की आज़ादी' से वंचित करती है.
प्रोटेस्ट और इस्तीफों का असर
करीब 180 तकनीशियनों के एक साथ इस्तीफा देने और कई के काम रोक देने से असर बहुत गहरा पड़ा है.
- 1. ऑपरेशनल प्रभाव
- विमान मेंटेनेंस शेड्यूल प्रभावित
- कुछ एयरक्राफ्ट की सर्विसिंग में देरी
- काम की गति धीमी होने का खतरा
- MRO यूनिट में स्टाफ की भारी कमी
2. देशभर की MRO यूनिट्स पर असर
AIESL के MRO केंद्र नागपुर के अलावा दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, तिरुवनंतपुरम और कोलकाता में भी हैं. इस घटना के बाद. अन्य यूनिट्स पर दबाव बढ़ गया है. कर्मचारियों में असंतोष फैलने का खतरा, अगर समाधान नहीं हुआ तो संकट और बढ़ सकता है.
कंपनी के लिए बड़ा नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार यह संकट कंपनी के लिए कई स्तर पर नुकसान लेकर आया है. ऑपरेशनल नुकसान
- मैन-आवर की भारी कमी
- विमान ग्राउंडिंग और डिले का खतरा
- काम का बैकलॉग बढ़ना
- फाइनेंशियल असर
- मेंटेनेंस लागत में बढ़ोतरी
- काम पूरा करने में देरी से कॉन्ट्रैक्ट पर असर
- अंतरराष्ट्रीय MRO बिजनेस की छवि प्रभावित होने का जोखिम
लेबर विभाग का हस्तक्षेप
नागपुर के डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा है कि कर्मचारी नोटिस पीरियड पूरा करने के बाद मुक्त होने के हकदार हैं. किसी को जबरन काम पर नहीं रखा जा सकता. इस्तीफे प्रक्रिया नियमों के अनुसार स्वीकार किए जाने चाहिए हालांकि कर्मचारियों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर यह निर्देश पूरी तरह लागू नहीं हो रहे.
कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा असर?
1. करियर अनिश्चितता
- नई नौकरी जॉइन करने में देरी
- कंपनियों से ऑफर मिलने के बावजूद दस्तावेज़ अटकना
- करियर ग्रोथ रुकने का डर
2. आर्थिक नुकसान
- बिना वेतन की अवधि बढ़ सकती है
- नए जॉब ऑफर मिस होने का जोखिम
- फाइनेंशियल प्लानिंग प्रभावित
3. मानसिक दबाव
- नौकरी छोड़ने और नई नौकरी जॉइन करने के बीच असमंजस
- भविष्य को लेकर असुरक्षा
- प्रबंधन बनाम कर्मचारी टकराव का तनाव
4. प्रोफेशनल पहचान पर असर
अनुभव प्रमाणपत्र में देरी से आगे की नौकरी प्रभावित
स्किल्ड टेक्नीशियन मार्केट में प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ने का खतरा
AIESL नागपुर MRO विवाद अब केवल एक कंपनी का अंदरूनी मामला नहीं रहा, बल्कि यह कर्मचारी अधिकार बनाम संस्थागत नीति की बड़ी बहस बन चुका है. जहां कंपनी स्थिरता और नियंत्रण की बात कर रही है, वहीं कर्मचारी करियर फ्रीडम और रोजगार अधिकार की मांग कर रहे हैं. अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर न सिर्फ AIESL बल्कि भारत के पूरे एविएशन मेंटेनेंस सेक्टर पर लंबे समय तक देखा जा सकता है.




