पुलिस की चालाकी…सब पर भारी! क्या जान लेने के पहले कोई महिला कपड़े उतारेगी? Disha Salian केस में Ex DGP ने कलई खोल दी
दिशा सालियन और सुशांत सिंह राजपूत केस पर पूर्व DGP विक्रम सिंह ने स्टेट मिरर के साथ खास इंटरव्यू में कई सवाल उठाए. उन्होंने पुलिस जांच, पोस्टमार्टम, फोरेंसिक सबूत, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और FIR से जुड़े पहलुओं पर जानकारी देते हुए पूरी असलियत सामने लाकर रख दी.
दिशा सालियन और सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामलों को लेकर पूर्व DGP विक्रम सिंह ने स्टेट मिरर के साथ खास इंटरव्यू में कई गंभीर सवाल उठाए. इंटरव्यू में उन्होंने दोनों मौतों के बीच की टाइमलाइन, मुंबई पुलिस की जांच, सचिन वाजे की भूमिका, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और कथित स्टिंग ऑपरेशन का जिक्र किया.
विक्रम सिंह ने एडिटर इनवेस्टिगेशन, संजीव चौहान के साथ बातचीत में कई दावे और सवाल सामने रखे. उन्होंने यह भी कहा कि इन मामलों में सामने आने वाले हर पहलू की जांच होनी चाहिए और पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ही किसी की भूमिका तय की जानी चाहिए.
क्या है दिशा सालियान केस?
दिशा सालियन केस बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत से जुड़ा एक चर्चित और संवेदनशील मामला है. 8 जून 2020 की रात मुंबई के मलाड इलाके में 28 साल की दिशा सालियन की एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई थी. दिशा की मौत के करीब 5-6 दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का शव भी बरामद हुआ. दोनों घटनाओं के बीच कम समय का अंतर होने के कारण कई लोगों और नेताओं ने दावा किया कि दोनों मामलों के बीच कोई संबंध हो सकता है.
पूर्व डीजीपी ने क्या कहा?
विक्रम सिंह ने इंटरव्यू की शुरुआत दिशा सालियन और सुशांत सिंह राजपूत की मौत की तारीखों का जिक्र करते हुए की. उन्होंने कहा कि दिशा सालियन की मौत 8 जून को हुई थी, जबकि सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून को हुई.
उन्होंने कहा कि इन दोनों घटनाओं के अलावा उस दौरान कुछ और संदिग्ध मौतों का भी जिक्र सामने आया था. उनके मुताबिक, इन सभी घटनाओं को एक साथ रखकर देखना और उनकी परिस्थितियों की जांच करना जरूरी है.
सचिन वाजे की बहाली पर क्या बोले?
पूर्व DGP ने सचिन वाजे का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि एक मामले में FIR होने के करीब 16 साल बाद वाजे की बहाली हुई और बहाली के बाद उन्हें पहले आर्म्ड पुलिस में भेजा गया. इसके बाद वह क्राइम ब्रांच में पहुंचे. विक्रम सिंह ने कहा कि इसके बाद सचिन वाजे का नाम कई चर्चित मामलों में सामने आया. उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियन से जुड़े मामले, एंटीलिया बम केस और अर्नब गोस्वामी के घर से जुड़े मामले का जिक्र किया. उन्होंने सवाल उठाया कि करीब 16 साल बाद बहाली के तुरंत बाद वाजे को इतने महत्वपूर्ण मामलों में जिम्मेदारी कैसे मिली?
दिशा सालियन की जांच पर हाई कोर्ट की टिप्पणी पर क्या बोले विक्रम सिंह?
विक्रम सिंह ने कहा कि दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था और उनके वकील नीलेश ओझा ने अदालत में इस मामले को लेकर जोरदार दलीलें रखीं. इंटरव्यू में उन्होंने हाई कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि छह साल तक जिन सवालों का जवाब नहीं मिला, जांच के दौरान उससे ज्यादा सवाल खड़े हो गए.
आत्महत्या से पहले क्या कोई महिला उतारेगी कपड़े?
उन्होंने दिशा सालियन की मौत की जांच को लेकर कई सवाल उठाए. विक्रम सिंह ने पूछा कि अगर कोई महिला ऊंचाई से कूदकर आत्महत्या करती है तो क्या वह कपड़े उतारकर ऐसा करेगी? उन्होंने पोस्टमार्टम में कथित देरी पर भी सवाल किया.
उनके मुताबिक, पोस्टमार्टम तीन दिन बाद क्यों किया गया, उसकी वीडियोग्राफी क्यों नहीं हुई और दो डॉक्टरों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया, इन सवालों का जवाब मिलना चाहिए.
पोस्टमार्टम सैंपल को लेकर क्या सवाल उठाए?
विक्रम सिंह ने इंटरव्यू में कथित तौर पर लिए गए वजाइनल और एनल स्वैब के सैंपल का भी जिक्र किया. उन्होंने सवाल उठाया कि ये सैंपल गायब कैसे हो गए. उन्होंने दिशा के शरीर पर कथित चोटों के निशान का भी उल्लेख किया. उनका कहना था कि अगर वह ऊंचाई से गिरी थीं तो शरीर पर किस तरह की चोटें आनी चाहिए थीं, इस पहलू की भी जांच जरूरी है.
इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दिशा के साथ यौन हिंसा के बाद उनकी हत्या की गई और शव को ठिकाने लगाया गया. उन्होंने इंटरव्यू में होंठ के ऊपर और प्राइवेट पार्ट्स पर काटे जाने के निशान का भी दावा किया.
छह साल तक मामला ADR में क्यों रहा?
विक्रम सिंह ने कहा कि दिशा सालियन की मौत के मामले को करीब छह साल तक Accident Death Report यानी ADR के रूप में रखा गया. उन्होंने कहा कि दिशा के पिता लगातार पुलिस के पास जाते रहे. इसी संदर्भ में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले का भी जिक्र किया.
विक्रम सिंह के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति की ओर से किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी दी जाती है तो उसे दर्ज करना जरूरी है. उन्होंने आरोप लगाया कि कानून का इस्तेमाल प्रभावशाली लोगों और कमजोर लोगों के मामलों में अलग-अलग तरीके से होता है.
सुशांत सिंह राजपूत पर स्टन गन का इस्तेमाल हुआ?
इंटरव्यू में विक्रम सिंह ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत का भी जिक्र किया और कहा कि दिशा सालियन और सुशांत के मामलों में कुछ समानताएं नजर आती हैं. उन्होंने एक प्रतिष्ठित चैनल के कथित स्टिंग ऑपरेशन का हवाला दिया. विक्रम सिंह के अनुसार, इस स्टिंग ऑपरेशन में कूपर अस्पताल के एक कर्मचारी ने दावा किया कि जब सुशांत सिंह राजपूत का शव लाया गया था, तब उनके शरीर पर कथित तौर पर तीन स्टन गन के इस्तेमाल के निशान थे. उन्होंने गर्दन पर मौजूद कथित लिगेचर मार्क का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि क्या ये सामान्य फांसी के निशान थे या किसी अन्य परिस्थिति की ओर इशारा करते थे.
विक्रम सिंह ने कहा कि अगर स्टिंग ऑपरेशन में किसी डॉक्टर या कर्मचारी की ओर से इस तरह की बातें कही गई हैं तो इसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सुशांत की मौत आत्महत्या थी या फिर हत्या की संभावना भी जांच का हिस्सा होनी चाहिए.
FIR और धाराओं का भी किया जिक्र
विक्रम सिंह ने इंटरव्यू में बताया कि कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा और कहा कि आप इसमे जब तक किसी को दोषी नहीं बनाएंगे तब तक पुख्ता सबूत न आ जाए. उन्होंने इस मामले में धारा 120-B, 376-D, 302, 201, 217 और 218 का जिक्र किया गया है. उन्होंने इन धाराओं का अर्थ बताते हुए कहा कि इनमें आपराधिक साजिश, गैंगरेप, हत्या, सबूत मिटाने और सरकारी कर्मचारी से जुड़े अपराधों के प्रावधान शामिल हैं. उन्होंने कहा कि FIR में नाम आने के बाद भी किसी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जाना चाहिए, जब तक जांच में पर्याप्त सबूत सामने न आ जाएं.
किन लोगों के नाम का किया जिक्र?
इंटरव्यू में विक्रम सिंह ने कई लोगों के नामों का उल्लेख किया. इनमें आदित्य ठाकरे, परमबीर सिंह (तत्काल पुलिस कमिश्नर), सचिन वाजे, रेनू मोरियो, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, DCP विशाल ठाकुर, अनिल देशमुख और उद्धव ठाकरे शामिल हैं. उन्होंने बताया कि ये सभी लोग अभी जांच के दायरे में है, जैसे-जैसे आगे सबूत आएंगे उसी हिसाब से कार्रवाई होगी.
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को लेकर क्या बड़ा सवाल?
पूर्व DGP ने दिशा सालियन और सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि दोनों मामलों में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को फैक्ट्री रिसेट किया गया था. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी मामले की जांच चल रही हो तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित रखने के बजाय फैक्ट्री रिसेट क्यों किया गया.
उन्होंने कहा कि अगर इन गैजेट्स को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाए और IT विशेषज्ञों की मदद से डेटा रिकवर किया जाए तो जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं.
सुशांत को खतरे की जानकारी देने का किसने किया दावा?
विक्रम सिंह ने सुशांत सिंह राजपूत के जीजा ओपी सिंह का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि ओपी सिंह हरियाणा पुलिस में IG थे और उन्होंने तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर से कहा था कि सुशांत को जान-माल का गंभीर खतरा है. विक्रम सिंह के मुताबिक, ओपी सिंह ने सुशांत को सुरक्षा देने की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई.
उन्होंने बिहार के तत्कालीन DGP गुप्तेश्वर पांडे के मुंबई आने का भी जिक्र किया. उनका सवाल था कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जब सरकारी मामले में मुंबई आया तो उससे मुलाकात क्यों नहीं की गई.




