Begin typing your search...

लाइव मैच में कंडोम एड देख क्यों भड़के कीर्ति आजाद, विज्ञापन को लेकर नियम क्या, कब किस Advertisement की मंजूरी?

भारत-इंग्लैंड टी20 मैच के लाइव के दौरान कंडोम का विज्ञापन दिखाए जाने पर पूर्व क्रिकेटर और सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल उठाए हुए कहा कि मैच बच्चे भी देखते हैं. हालांकि, एड को लेकर नियम है कि कंडोम एड को आमतौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ही दिखाया जा सकता है.

लाइव मैच में कंडोम एड देख क्यों भड़के कीर्ति आजाद, विज्ञापन को लेकर नियम क्या, कब किस Advertisement की मंजूरी?
X
( Image Source:  youtube- DurexIndia )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 6 July 2026 5:27 PM IST

भारत और इंग्लैंड के बीच हाल ही में दूसरा टी20 मुकाबला 4 जुलाई 2026 को खेला गया, जिसमें इंग्लैंड ने भारत को 4 विकेट से हरा दिया. लेकिन इस मैच की चर्चा सिर्फ हार-जीत तक सीमित नहीं रही. लाइव ब्रॉडकास्ट के दौरान दिखाए गए एक कंडोम एड पर एक्स भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल खड़े कर दिए.

कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर कहा कि' जब मैच को बड़ी संख्या में बच्चे और परिवार देख रहे हों, तब इस तरह का विज्ञापन दिखाना कितना सही है? उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई. दरअसल भारत में कंडोम एड को लेकर नियम हैं. ऐसे एड्स को आमतौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ही दिखाया जा सकता है.

कीर्ति आजाद ने क्या कहा?

कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि 'बच्चे ओल्ड ट्रैफर्ड में भारत और इंग्लैंड के बीच हो रहा इंटरनेशनल T20 मैच लाइव देख रहे हैं. क्या यह शर्म की बात नहीं है कि स्क्रीन पर ड्यूरेक्स (Durex) का एडल्ट विज्ञापन आ रहा है?@BCCI को इस पर ध्यान देना चाहिए.

क्या कहते हैं एड से जुड़े नियम?

भारत में टीवी पर दिखाए जाने वाले एड के लिए केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 बनाए गए हैं. इन नियमों के मुताबिक, अगर किसी विज्ञापन में अश्लील या जरूरत से ज्यादा सेक्सुअल साइन देने वाला कंटेंट हो, तो उसे आमतौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ही दिखाया जा सकता है. इसका मकसद बच्चों को ऐसे विज्ञापनों से दूर रखना है.

क्या हर कंडोम विज्ञापन पर है रोक?

नियमों के अनुसार, कंडोम से जुड़े सभी एड पर दिन में रोक नहीं है. अगर किसी विज्ञापन का मकसद सिर्फ सेफ सेक्सुअल रिलेशन के बारे में सही जानकारी देना हो और उसमें कोई अश्लील या आपत्तिजनक सीन न हो, महिलाओं को गलत तरीके से न दिखाया गया हो, तो ऐसे एड दिन में भी दिखाए जा सकते हैं.

क्यों छिड़ी बहस?

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि परिवार के साथ देखे जाने वाले लाइव खेल प्रसारण के दौरान किस तरह के विज्ञापन दिखाए जाने चाहिए. एक पक्ष का मानना है कि बच्चों की मौजूदगी को देखते हुए सावधानी जरूरी है, जबकि दूसरा पक्ष इसे स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ा विषय मानता है. ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित विज्ञापन तय नियमों और प्रसारण दिशानिर्देशों का पालन करता है या नहीं.

अगला लेख