नितिन नवीन से लेकर खरगे-महबूबा मुफ्ती तक, खामेनेई के अंतिम संस्कार में किन-किन भारतीय नेताओं को मिला न्योता, ईरान जाएगा कौन?
खामेनेई अंतिम संस्कार में भारत से किन नेताओं को निमंत्रण मिला, कौन तेहरान जाएगा, महबूबा मुफ़्ती का दौरा क्यों चर्चा में है और भारत सरकार की क्या रणनीति है, जानिए पूरी रिपोर्ट.
मिडिल ईस्ट वॉर के पहले दिन अमेरिका इजरायल के ज्वाइंट अटैक में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे. अब उनके अंतिम संस्कार ने सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं, भारत की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है. सबसे पहले ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजकीय समारोह में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा, लेकिन भारत सरकार ने उनकी जगह आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसके साथ ही बीजेपी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, पीडीपी समेत विभिन्न दलों के कई नेताओं को भी अलग-अलग निमंत्रण भेजे गए.
इनमें सबसे ज्यादा चर्चा महबूबा मुफ्ती के तेहरान दौरे की है, क्योंकि उन्होंने ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के दौरान खुलकर ईरान का समर्थन किया था. ऐसे में सवाल है कि निमंत्रण किन-किन नेताओं को मिला और आखिर ईरान जाएगा कौन?
कब से कब तक चलेगा अंतिम संस्कार कार्यक्रम?
ईरान ने अपने पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत के कई राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रमुख चेहरों को औपचारिक निमंत्रण भेजा है. खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ज्वाइंट एयर स्ट्राइक के दौरान मौत हुई थी. अंतिम संस्कार समारोह 5 से 9 जुलाई के बीच तेहरान, कोम और मशहद में आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है.
भारत सरकार की ओर से कौन करेगा प्रतिनिधित्व?
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निमंत्रण भेजा था. भारत सरकार ने प्रधानमंत्री की जगह आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है. सरकारी स्तर पर बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. इससे संकेत मिलता है कि भारत ईरान के साथ राजनयिक शिष्टाचार निभाते हुए अपने संतुलित पश्चिम एशिया नीति रुख को भी बरकरार रखना चाहता है.
किन भारतीय नेताओं को मिला निमंत्रण?
ईरान ने देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक क्षेत्रों के नेताओं को भी अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. आमंत्रित प्रमुख भारतीयों में बीजेपी नेता नितिन नवीन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा, कांग्रेस के विदेश मामलों के प्रमुख सलमान खुर्शीद, समाजवादी पार्टी सांसद अफजल अंसारी, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, श्रीनगर सांसद रूहुल्लाह मेहदी, लद्दाख सांसद हाजी हनीफा तथा जैन संत आचार्य लोकेश मुनि शामिल हैं.
इनमें से ईरान कौन-कौन जाएगा?
अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, कांग्रेस की ओर से सलमान खुर्शीद के तेहरान जाने की संभावना जताई गई है. पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने स्वयं पुष्टि की है कि वह खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए ईरान जाएंगी. अन्य आमंत्रित नेताओं की यात्रा को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
महबूबा मुफ्ती का दौरा अहम क्यों?
महबूबा मुफ्ती का तेहरान दौरा केवल एक श्रद्धांजलि यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी हैं. ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष शुरू होने के बाद से उन्होंने खुलकर ईरान के समर्थन और अमेरिका-इजराइल की कार्रवाई के विरोध में बयान दिए थे. यह रुख भारत सरकार की आधिकारिक संतुलित और तटस्थ विदेश नीति से अलग माना गया. खामेनेई की मौत के बाद वह नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास जाकर भी संवेदना व्यक्त कर चुकी थीं.
महबूबा को निमंत्रण किसने भेजा?
पीडीपी के अनुसार, महबूबा मुफ्ती को ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के कार्यालय की ओर से औपचारिक निमंत्रण मिला है. पार्टी का दावा है कि वह जम्मू-कश्मीर की एकमात्र गैर-शिया राजनीतिक नेता हैं जिन्हें इस राजकीय अंतिम संस्कार में आमंत्रित किया गया है. पीडीपी नेता वहीद पारा ने बताया कि नियमित उड़ानें बंद होने के कारण ईरानी सरकार विदेशी मेहमानों के लिए विशेष विमान की व्यवस्था कर रही है और महबूबा उसी विशेष उड़ान से तेहरान रवाना होंगी.
आचार्य लोकेश मुनि को क्यों बुलाया गया?
जैन संत और 'अहिंसा विश्व भारती' के संस्थापक आचार्य लोकेश मुनि को भी अंतिम संस्कार में आमंत्रित किया गया है. अंतरधार्मिक संवाद, शांति और अहिंसा के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए ईरान ने उन्हें विशेष अतिथि के रूप में बुलाया है. उनकी मौजूदगी इस आयोजन के धार्मिक और वैश्विक संवाद वाले आयाम को भी रेखांकित करती है.
खामेनेई का अंतिम संस्कार इतना महत्वपूर्ण क्यों?
खामेनेई ने तीन दशक से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व किया और पश्चिम एशिया की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाई. उनकी मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने सर्वोच्च नेता का पद संभाला. अंतिम संस्कार समारोह को ईरान शक्ति प्रदर्शन और राष्ट्रीय एकजुटता के बड़े आयोजन के रूप में देख रहा है. लाखों लोगों की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह देश के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में शामिल हो सकता है.
कैसा रहेगा अंतिम संस्कार का कार्यक्रम?
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, अंतिम संस्कार में 1.2 करोड़ से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान है, जिसके चलते राजधानी तेहरान में अभूतपूर्व सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां की गई हैं. 4 और 5 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मोसल्ला में श्रद्धांजलि सभाएं होंगी, जबकि 6 और 7 जुलाई को तेहरान तथा कोम में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. अंतिम कार्यक्रम 9 जुलाई को मशहद में होगा, जहां खामेनेई को शिया समुदाय के आठवें इमाम इमाम रजा के पवित्र दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.
बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट वॉर के पहले दिन खामेनेई की मौत की घोषणा की थी. ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी-इजरायली हमलों में खामेनेई के परिवार के चार सदस्य भी मारे गए थे.




