न कोई चश्मदीद, न कोई सबूत; सिया के वकील के दावे में क्या-क्या? पुलिस ने की साहिल से पूछताछ- Updates
केतन अग्रवाल मर्डर केस में बचाव पक्ष ने पुलिस के सबूतों पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि अभी तक कोई प्रत्यक्षदर्शी या स्वतंत्र साक्ष्य मौजूद नहीं है. वहीं पुलिस का कहना है कि डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है.
महाराष्ट्र के पुणे जिले में कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के मामले में हर दिन नए दावे सामने आ रहे हैं. शुरुआत में जिस घटना को पुलिस ने दुर्घटना मानकर दर्ज किया था, वही अब कथित हत्या की साजिश के रूप में जांच के दायरे में है. इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी पुलिस हिरासत में हैं, लेकिन जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि क्या हुआ, बल्कि यह है कि क्या पुलिस अदालत में अपने आरोप साबित कर पाएगी?
इसी बीच सिया गोयल के वकील ने पुलिस की जांच पर कई सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अभी तक ऐसा कोई प्रत्यक्षदर्शी या स्वतंत्र गवाह सामने नहीं आया है जो यह साबित कर सके कि सिया ने केतन को धक्का दिया था. दूसरी ओर पुलिस का दावा है कि उसके पास डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों की एक मजबूत श्रृंखला है, जिसकी जांच अभी जारी है.
केतन अग्रवाल मर्डर केस में आरोपी सिया के वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि 'जहां तक वकालतनामे की बात है, सिया ने खुद वकालतनामा दिया है और हम इसे जल्द से जल्द कोर्ट में दाखिल करेंगे. जहां तक उसके परिवार की बात है, तो इस मामले पर हमारी उनसे कोई खास बातचीत नहीं हुई है.'
बचाव पक्ष ने पुलिस की कहानी पर क्या सवाल उठाए?
सिया गोयल के वकील अशुतोष श्रीवास्तव का कहना है कि अभी तक जांच में ऐसा कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया है जिसने घटना को अपनी आंखों से देखा हो. उनका यह भी दावा है कि पुलिस के पास फिलहाल ऐसा स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है जो सीधे तौर पर उनकी मुवक्किल को अपराध से जोड़ता हो. वकील के अनुसार, सिया जांच में पूरा सहयोग कर रही है और पुलिस को निष्पक्ष तरीके से जांच पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए ताकि अदालत के सामने स्पष्ट चार्जशीट पेश की जा सके.
पुलिस किन सबूतों पर भरोसा कर रही है?
हालांकि बचाव पक्ष पुलिस के दावों पर सवाल उठा रहा है, लेकिन जांच एजेंसियों का कहना है कि मामला केवल बयानों पर आधारित नहीं है. पुलिस जिन बिंदुओं की जांच कर रही है, उनमें शामिल हैं-
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
- मोबाइल फोन की लोकेशन
- CCTV फुटेज
- दोनों आरोपियों के बीच कथित बातचीत
- घटनास्थल से जुड़े परिस्थितिजन्य साक्ष्य
कई गवाहों के बयान
पुलिस का दावा है कि इन्हीं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दुर्घटना का मामला कथित हत्या की साजिश में बदला गया.
सिया के भाई से भी पूछताछ क्यों?
पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार जांच को कई टीमों में बांटा गया है. इसी क्रम में सिया गोयल के भाई साहिल गोयल और कुछ अन्य रिश्तेदारों से भी पूछताछ की जा रही है. पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन और सभी संबंधित तथ्यों का मिलान करना है.
अदालत में सबसे अहम सवाल क्या होगा?
इस केस की दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य सबूतों को किस तरह जोड़ पाती है. वहीं बचाव पक्ष की कोशिश होगी कि इन साक्ष्यों में मौजूद किसी भी कमजोरी को अदालत के सामने रखा जाए. भारतीय आपराधिक मामलों में यदि प्रत्यक्षदर्शी न भी हो, तब भी परिस्थितिजन्य और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए अभियोजन पक्ष को ऐसी साक्ष्य श्रृंखला प्रस्तुत करनी होती है जिसमें कोई महत्वपूर्ण कड़ी टूटी हुई न हो. यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू माना जा रहा है.
अब आगे क्या होगा?
पुलिस अभी भी डिजिटल रिकॉर्ड, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का मिलान कर रही है. जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट अदालत में दाखिल की जाएगी. इसके बाद अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय करेगी कि पुलिस के आरोप कितने मजबूत हैं और बचाव पक्ष की दलीलों का क्या प्रभाव पड़ता है.
फिलहाल क्या साफ है?
- पुलिस हत्या की साजिश के एंगल से जांच कर रही है.
- बचाव पक्ष सीधे सबूतों के अभाव का दावा कर रहा है.
- दोनों पक्षों के दावों की अंतिम जांच अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों से होगी.
- इसलिए अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.




