तृषा का नाम सुनते ही उदयनिधि ने कर दी गंदी बात! डबल मीनिंग में क्या? गिरफ्तारी से HC तक पूरा विवाद- स्टालिन के 5 विवादित बयान
डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन एक कथित 'डबल मीनिंग' टिप्पणी को लेकर विवादों में घिर गए हैं. तृषा कृष्णन का नाम आने के बाद दिए गए बयान पर मामला दर्ज हुआ, पूछताछ हुई और फिर हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया.
तमिलनाडु की राजनीति में एक बयान ने बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन एक कथित 'डबल मीनिंग' टिप्पणी को लेकर विवादों में घिर गए हैं. यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने मंच से भाषण दिया. उनके भाषण के बीच भीड़ ने अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेना शुरू कर दिया. नारे सुनकर उदयनिधि के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गयी, वो बोले- 'पानी कहीं पहुंचे न पहुंचे, वहां जरूर पहुंचना चाहिए'. जिसके बाद इस शब्द को लेकर डबल मीनिंग बताया गया.
और उदयनिधि की इस टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने अश्लील और महिलाओं का अपमान करने वाला बताया. विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया और पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. हालांकि बाद में मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर उन्हें पूछताछ के बाद रिहा करने का आदेश दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है.
क्या कहा था उदयनिधि स्टालिन ने?
तंजावुर में डीएमके के प्रदर्शन के दौरान उदयनिधि स्टालिन राज्य सरकार की आलोचना कर रहे थे. इसी दौरान भीड़ ने कथित तौर पर अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेना शुरू कर दिया. इसके बाद उदयनिधि ने तमिल में एक टिप्पणी की, जिसका मोटा अर्थ था, 'जहां पानी आना चाहिए, वहां पानी आए.'
उन्होंने तुरंत स्पष्ट भी किया कि उनका इशारा कावेरी नदी के पानी की ओर था. लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि तृषा का नाम लिए जाने के तुरंत बाद की गई इस टिप्पणी का दोहरा अर्थ निकाला जा सकता है और यह महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक थी.
तृषा का नाम क्यों लिया गया?
अभिनेत्री तृषा कृष्णन पिछले दो दशक से तमिल फिल्म इंडस्ट्री की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हैं. उन्होंने तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री विजय के साथ कई फिल्मों में काम किया है. दोनों के बीच रिश्ते की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं, हालांकि दोनों ने कभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की. इसी वजह से प्रदर्शन के दौरान भीड़ द्वारा तृषा का नाम लिए जाने के बाद उदयनिधि की टिप्पणी को लेकर विवाद और गहरा गया.
विवाद कैसे बढ़ा?
उदयनिधि के बयान के बाद सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता ने सार्वजनिक मंच से एक महिला के बारे में अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी की है. टीवीके ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) से की और पुलिस में भी मामला दर्ज कराया. भाजपा और कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों ने भी बयान की आलोचना करते हुए उदयनिधि से माफी मांगने की मांग की.
पुलिस ने कब और क्यों किया गिरफ्तार?
विवाद बढ़ने के बाद 4 अगस्त को पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन को चेन्नई स्थित उनके आवास से हिरासत में लेकर तंजावुर ले जाकर पूछताछ की. उनके खिलाफ आरोप था कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और मुख्यमंत्री को लेकर मानहानिकारक तथा कथित रूप से अशोभनीय टिप्पणी की. पूछताछ से पहले तंजावुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. शहर के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, बैरिकेडिंग की गई और कई मार्गों पर यातायात भी डायवर्ट किया गया.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि उदयनिधि को केवल पूछताछ के लिए लाया गया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की कोई योजना नहीं है. इसके बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें तुरंत रिहा किया जाए. अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने उन्हें स्टेशन बेल पर छोड़ दिया.
डीएमके ने गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई
डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने अपने बेटे उदयनिधि की गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार कावेरी जल विवाद जैसे अहम मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने दावा किया कि उदयनिधि ने अपने भाषण में कोई अश्लील या व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की थी. उनके मुताबिक विपक्ष के नेता को विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले गिरफ्तार करना राजनीतिक दुर्भावना का हिस्सा है. डीएमके के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आर. इलंगो ने भी आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए गिरफ्तारी का सहारा ले रही है.
टीवीके और विपक्ष का क्या आरोप है?
मुख्यमंत्री विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके पर आरोप लगाया कि वह उदयनिधि की गिरफ्तारी को राजनीतिक बलिदान की तरह पेश कर रही है. पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर किसी महिला को लेकर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती. टीवीके ने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके राज्यभर में विरोध प्रदर्शनों के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है.
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल उदयनिधि स्टालिन पूछताछ के बाद रिहा हो चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ दर्ज मामले की जांच जारी है. पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी. वहीं, यह विवाद अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और टीवीके के बीच नए टकराव का कारण बन गया है. विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे महिलाओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है.
उदयनिधि स्टालिन के बवाल मचाने वाले विवादित बयान
1. सनातन धर्म पर विवादित टिप्पणी (सितंबर 2023)
उदयनिधि स्टालिन ने एक कार्यक्रम में सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से करते हुए कहा था कि इसे केवल विरोध नहीं, बल्कि "समाप्त" किया जाना चाहिए. इस बयान पर देशभर में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई. भाजपा समेत कई संगठनों ने इसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान बताया और उनके खिलाफ कई राज्यों में शिकायतें व मुकदमे दर्ज हुए.
2. विधानसभा में फिर दोहराया सनातन वाला बयान (2026)
तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद भी उदयनिधि स्टालिन ने अपने पुराने रुख से पीछे हटने से इनकार किया. उन्होंने सदन में कहा कि समाज को बांटने वाली सनातन व्यवस्था का समूल नाश होना चाहिए. इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया और विपक्ष ने उनकी आलोचना की.
3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 'पिता' वाली टिप्पणी (फरवरी 2026)
कोयंबटूर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि "डीएमके न तो पीएम मोदी से डरती है और न ही उनके पिता से." उन्होंने यह भी कहा कि लोग केवल टीवी पर प्रधानमंत्री मोदी को देखकर डरते हैं. इस बयान को लेकर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे प्रधानमंत्री पद का अपमान बताया.
4. भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन पर हमला
उदयनिधि ने भाजपा और एआईएडीएमके के गठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा था कि डीएमके को किसी भी राजनीतिक दबाव या धमकी से डर नहीं लगता. उन्होंने नोटबंदी और कोरोना लॉकडाउन जैसे फैसलों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि जनता को डराकर राजनीति नहीं की जा सकती.
5. तृषा कृष्णन टिप्पणी विवाद (अगस्त 2026)
अगस्त 2026 में कावेरी जल विवाद को लेकर तंजावुर में आयोजित डीएमके के प्रदर्शन के दौरान उदयनिधि स्टालिन का एक बयान नया विवाद बन गया. भाषण के दौरान भीड़ द्वारा अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लिए जाने के बाद उनकी एक टिप्पणी को विपक्षी दलों ने 'डबल मीनिंग' और महिलाओं का अपमान करने वाला बताया.




