इलेक्शन में पैसा ही सबसे बड़ा हथियार? ₹5,000 करोड़ की चुनावी मशीन: BJP का खर्च, चंदा और कैश - ऑडिट रिपोर्ट ने खोली पूरी तस्वीर
BJP ने 2024-25 में लोकसभा और आठ विधानसभा चुनावों के दौरान चुनाव और प्रचार पर ₹3,335 करोड़ से ज्यादा खर्च किए, जो 2019 के मुकाबले ढाई गुना है. प्री-इलेक्शन और इलेक्शन ईयर मिलाकर कुल खर्च ₹5,089 करोड़ तक पहुंच गया. पार्टी के कुल खर्च का 88% सिर्फ चुनावों पर हुआ. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विज्ञापन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और हवाई यात्राओं पर भारी खर्च किया गया.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) का चुनावी अभियान अब सिर्फ राजनीतिक रणनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक विशाल आर्थिक अभियान का रूप ले चुका है. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, BJP की ताज़ा ऑडिट रिपोर्ट ने चुनावी खर्च, प्रचार मशीनरी और पार्टी की बढ़ती आर्थिक ताकत की ऐसी तस्वीर पेश की है, जो भारतीय राजनीति में अब तक शायद ही कभी इतनी स्पष्ट दिखी हो.
18वीं लोकसभा और आठ विधानसभा चुनावों के दौर में BJP ने जो खर्च किया, उसने न सिर्फ उसके पिछले रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि विपक्षी दलों के लिए भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है.
2024-25 में रिकॉर्ड चुनावी खर्च
BJP की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में पार्टी ने चुनाव और सामान्य प्रचार पर कुल ₹3,335.36 करोड़ खर्च किए. यह वही साल था जब देश में 18वीं लोकसभा के साथ-साथ आठ राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए. तुलना करें तो 2019-20 में, 17वीं लोकसभा और सात विधानसभा चुनावों के दौरान यह खर्च ₹1,352.92 करोड़ था. यानी सिर्फ पांच साल में चुनावी खर्च लगभग ढाई गुना बढ़ गया. यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि BJP का चुनावी मॉडल अब कहीं ज्यादा संसाधन-संपन्न और आक्रामक हो चुका है.
दो साल में ₹5,089 करोड़ का चुनावी बजट
चुनाव सिर्फ मतदान के दिन नहीं लड़े जाते, बल्कि उसकी तैयारी सालों पहले शुरू हो जाती है. चुनाव आयोग ने 2024 के लोकसभा चुनावों की घोषणा 16 मार्च को की थी, लेकिन प्रचार-प्रसार का दौर वित्त वर्ष 2023-24 में ही शुरू हो गया था.
- 2023-24 (प्री-इलेक्शन ईयर): ₹1,754.06 करोड़
- 2024-25 (इलेक्शन ईयर): ₹3,335.36 करोड़
इन दोनों वर्षों को जोड़ दें तो BJP ने कुल ₹5,089.42 करोड़ सिर्फ चुनाव और प्रचार पर खर्च किए. इसके मुकाबले 2019 के चुनाव चक्र में यही खर्च ₹2,145.31 करोड़ था. यानी एक ही चुनावी चक्र में खर्च दोगुने से भी ज्यादा हो गया.
किन राज्यों में हुए चुनाव
2019-20 और 2024-25 के दौरान जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, उनमें महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश शामिल थे. हालांकि, 2024-25 में एक अहम बदलाव यह रहा कि जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा चुनाव हुए, जिससे BJP की चुनावी गतिविधियों का दायरा और बढ़ गया.
कुल खर्च का 88% सिर्फ चुनाव पर
BJP ने चुनाव आयोग को जो वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट सौंपी, उसके मुताबिक पार्टी का कुल खर्च ₹3,774.58 करोड़ रहा, जिसमें से 88% हिस्सा सिर्फ चुनाव और सामान्य प्रचार पर खर्च हुआ. यह आंकड़ा दिखाता है कि पार्टी की प्राथमिकता पूरी तरह चुनावी मैदान पर केंद्रित रही.
विज्ञापन, मीडिया और प्रचार का ‘मेगा प्लान’
रिपोर्ट के मुताबिक, ₹3,335.36 करोड़ के चुनावी खर्च में से:
- ₹2,257.05 करोड़ (करीब 68%) सिर्फ विज्ञापन और प्रचार पर खर्च हुए
- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सबसे ज्यादा खर्च: ₹1,124.96 करोड़
- अन्य विज्ञापनों पर खर्च: ₹897.42 करोड़
इसके अलावा, हवाई जहाज और हेलिकॉप्टर यात्रा पर खर्च ₹583.08 करोड़ और उम्मीदवारों को ₹312.90 करोड़ की सीधी वित्तीय सहायता दी गई. यह आंकड़े बताते हैं कि BJP ने तकनीक, मीडिया और तेज़ प्रचार को अपने चुनावी अभियान का हथियार बनाया.
2019 से 2024 तक खर्च में उछाल
पिछले लोकसभा चुनाव चक्र में भी BJP का चुनावी खर्च तेजी से बढ़ा था.
- 2018-19: ₹792.39 करोड़
- 2019-20: ₹1,352.92 करोड़
यानी तब भी एक साल में भारी उछाल देखा गया था, लेकिन 2024 के चुनावों में यह बढ़ोतरी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई.
कांग्रेस से तुलना: खर्च में जमीन-आसमान का फर्क
जहां BJP ने 2024-25 में ₹3,335 करोड़ से ज्यादा खर्च किए, वहीं कांग्रेस पार्टी का चुनावी खर्च तुलनात्मक रूप से काफी कम रहा. 2024-25 में जहां कांग्रेस ने ₹896.22 करोड़ खर्च वहीं एक साल पहले यह आंकड़ा ₹619.67 करोड़ था. यह अंतर साफ दिखाता है कि BJP और कांग्रेस की चुनावी क्षमता और संसाधनों में कितना बड़ा फर्क है.
BJP की आमदनी में जबरदस्त उछाल
खर्च के साथ-साथ BJP की आय में भी बड़ा उछाल देखने को मिला. 2023-24 में पार्टी की आय ₹4,340.47 करोड़ रही जो 2024-25 में बढ़कर ₹6,769.14 करोड़ हो गई. यानी एक ही साल में पार्टी की आय में करीब ₹2,400 करोड़ की बढ़ोतरी हुई.
चंदे का खेल: इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म, फिर भी बढ़ा दान
2024-25 वह पहला साल था, जब सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया. इसके बावजूद BJP को मिलने वाले दान में कमी नहीं आई, बल्कि चंदा 54% बढ़कर ₹6,124.85 करोड़ पहुंच गया. इसमें इलेक्टोरल ट्रस्ट्स से आए दान का हिस्सा 61% रहा. इससे पता चलता है कि बॉन्ड स्कीम खत्म होने के बाद भी BJP की फंड जुटाने की क्षमता पर कोई खास असर नहीं पड़ा.
पार्टी के पास कैश का पहाड़
31 मार्च 2025 तक BJP का क्लोजिंग बैलेंस ₹12,164.14 करोड़ रहा जिसमें कैश और कैश इक्विवेलेंट्स ₹9,996.12 करोड़ रहा जो कि पिछले साल यह ₹7,113.90 करोड़ था. यानी सिर्फ एक साल में पार्टी के नकद भंडार में लगभग ₹3,000 करोड़ की बढ़ोतरी हुई.
चुनाव आयोग की भूमिका और पारदर्शिता
चुनाव आयोग के नियमों के तहत सभी राजनीतिक दलों को वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट देनी होती है और ₹20,000 से ज्यादा के हर चंदे का हिसाब देना होता है. चुनाव आयोग इन रिपोर्ट्स को अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करता है, जिससे जनता को पार्टियों की आर्थिक स्थिति की जानकारी मिल सके.
चुनाव अब विचार नहीं, संसाधनों की जंग
BJP की ऑडिट रिपोर्ट यह साफ संकेत देती है कि भारतीय राजनीति में चुनाव अब सिर्फ विचारधारा और मुद्दों की लड़ाई नहीं रह गए हैं, बल्कि यह हजारों करोड़ रुपये के संसाधनों की जंग बन चुके हैं. BJP का बढ़ता चुनावी खजाना जहां उसे एक मजबूत बढ़त देता है, वहीं यह सवाल भी खड़े करता है कि क्या भविष्य की राजनीति में आर्थिक ताकत ही सबसे बड़ा हथियार बनती जाएगी?





