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क्या भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही बातचीत, 3 महीने में कहां हुईं 2 सीक्रेट मीटिंग, कौन-कौन शामिल, मकसद भी जानें

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तीन महीनों में दो गुप्त बैठकें हुईं. जानिए इन बैक-चैनल बातचीत का मकसद क्या है और क्यों दोनों देश फिर से संवाद की राह तलाश रहे हैं.

क्या भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही बातचीत, 3 महीने में कहां हुईं 2 सीक्रेट मीटिंग, कौन-कौन शामिल, मकसद भी जानें
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( Image Source:  X-@ANI )

IND-PAK Meeting: भारत और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक स्तर पर बातचीत भले रुकी हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच संवाद के रास्ते फिर से तलाशे जा रहे हैं. पिछले तीन महीनों में रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों और पूर्व राजनयिकों के बीच कम से कम दो गुप्त बैठकें हुई हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इन मुलाकातों का उद्देश्य आपसी तनाव कम करना और बैक-चैनल संपर्क बनाए रखना था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बैठकें कतर की राजधानी और एक अन्य एशियाई देश में आयोजित हुईं. हालांकि इनका कोई औपचारिक दर्जा नहीं था, फिर भी इन्हें ऑपरेशन सिंदूर के बाद संवाद बहाल करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है. यह भी जानकारी सामने आई है कि भारत सरकार के भीतर इस बात पर सहमति बन रही है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी के साथ गुप्त बातचीत के सिस्टम को जारी रखा जाए.

क्या अजीत डोभाल इस मीटिंग में शामिल?

रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के कार्यालय और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट को इस तरह के संवाद की आवश्यकता के बारे में अवगत कराया गया है. पाकिस्तान की ओर से भी ऐसे संपर्क बनाए रखने में दिलचस्पी जताई गई है.

क्या हैं इन वार्ताओं का मकसद?

सूत्रों के मुताबिक, इन बैक-चैनल वार्ताओं का अहम मकसद यह है कि अगर भविष्य में कोई आतंकी घटना या सीमा पर तनाव की स्थिति बनती है, तो हालात को कंट्रोल में रखा जा सके. फिलहाल दोनों देशों के बीच आधिकारिक संपर्क का एकमात्र जरिया डीजीएमओ स्तर पर होने वाली साप्ताहिक हॉटलाइन बातचीत है.

भारत का मानना है कि इस तरह का गुप्त संवाद उसकी उस नीति के खिलाफ नहीं है, जिसमें कहा जाता है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. इसे एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, ताकि संकट की स्थिति में सीधे संपर्क बनाए रखा जा सके.

मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत ऐसे संवाद को जरूरी मानता है. पाकिस्तान इस समय अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. वहीं पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है. यह भी चर्चा है कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिल सकता है. ऐसे में भविष्य में किसी आतंकी घटना की स्थिति में भारत के लिए पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

क्या पहले भी हो चुकी है ऐसी बातचीत?

भारत और पाकिस्तान के बीच बैक-चैनल कूटनीति का इतिहास पहले भी रहा है. 2015 से 2018 के बीच अजीत डोभाल ने अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ बैंकॉक में कई गुप्त बैठकें की थीं.

हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आसिम मलिक को पाकिस्तान का नया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया है, जिनका कार्यभार 30 अप्रैल 2025 से प्रभावी हुआ. खास बात यह है कि वह आईएसआई प्रमुख और एनएसए दोनों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिससे पाकिस्तान की सैन्य और रणनीतिक शक्ति एक ही केंद्र में केंद्रित हो गई है. अब देखना होगा कि उनके कार्यकाल में ये बातचीत आगे बढ़ती है या नहीं.

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