अमेरिका जाने निकले, इथियोपिया में हुए किडनैप... 1 करोड़ की फिरौती के बाद आया ऐसा ट्विस्ट कि किडनैपर्स ने खुद टिकट कराकर भेज दिया भारत
अमेरिका जाने का सपना लेकर गुजरात से निकले तीन कजिन्स इथियोपिया में कथित तौर पर अगवा हो गए. किडनैपर्स ने 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी, लेकिन अचानक तीनों को बिना फिरौती दिए भारत भेज दिया. जानें क्या है पूरा मामला
अमेरिका जाने का सपना लेकर गुजरात से निकले तीन कजिन्स के साथ इथियोपिया में कथित तौर पर ऐसी घटना हुई, जिसने उनके परिवार को हिला दिया. अमेरिका पहुंचने के लिए कथित तौर पर ‘डंकी’ रूट का सहारा लेने वाले 30 साल की ममता, 23 साल के रुत्विक और 27 साल की मयूरी को इथियोपिया में कथित तौर पर अगवा कर लिया गया. तीनों को करीब एक सप्ताह तक बंधक बनाकर रखा गया और उनकी रिहाई के बदले पहले 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई.
हालांकि, गुजरात पुलिस की लगातार बातचीत के बाद फिरौती की मांग घटकर 15 लाख रुपये तक आ गई. परिवार के पास यह रकम भी नहीं थी. इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक ऐसा मोड़ लिया कि कथित अपहरणकर्ताओं ने तीनों को एयरपोर्ट से करीब 2 किलोमीटर दूर छोड़ दिया और भारत लौटने की उनकी टिकट भी बुक कर दी.
तीनों 1 अक्टूबर को भारत लौटे और गुजरात के मेहसाणा जिले के लंघनाज पहुंचे. घर जाने से पहले वे सीधे पुलिस स्टेशन गए. पुलिस के मुताबिक, यह उनके लिए एक जरूरी प्रक्रिया भी थी और उन पुलिस अधिकारियों से मिलने का मौका भी, जिन्होंने फोन पर बातचीत के जरिए उनकी रिहाई में अहम भूमिका निभाई.
कैसे पहुंच गए इथियोपिया?
ममता, रुत्विक और मयूरी उत्तर गुजरात के वडासमा गांव के रहने वाले हैं. तीनों एक किसान परिवार से आते हैं. परिवार की इच्छा थी कि वे अमेरिका जाएं और वहां नई जिंदगी शुरू करें. हालांकि, अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की ओर से प्रवासन को लेकर सख्ती के बीच कथित तौर पर उनके लिए सीधे अमेरिका पहुंचना मुश्किल हो गया था. इसी वजह से परिवार ने कथित तौर पर अवैध और लंबा ‘डंकी’ रास्ता अपनाने का फैसला किया.
पुलिस के मुताबिक, तीनों 21 सितंबर को भारत से अलग-अलग फ्लाइट में रवाना हुए. ममता ने जयपुर से उड़ान भरी, जबकि अन्य दोनों ने दिल्ली से यात्रा शुरू की. तीनों मध्य पूर्व के रास्ते इथियोपिया के अदीस अबाबा स्थित बोले इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे. लेकिन अमेरिका की यात्रा का यह पड़ाव उनके लिए बेहद मुश्किल साबित हुआ.
कैसे हुआ अपहरण?
पुलिस की जांच के मुताबिक, जिस एजेंट ने तीनों के लिए टिकट बुक किए थे, उसी ने कथित तौर पर उन्हें अगवा कर लिया. तीनों को कथित तौर पर एक अलग और सुनसान जगह पर ले जाया गया. पुलिस को दिए उनके बयान के मुताबिक, उन्हें एक घर में रखा गया, उनके हाथ बांधे गए और आंखों पर पट्टी बांध दी गई.
रुत्विक के साथ मारपीट किए जाने की बात भी सामने आई है. वहीं, इंस्पेक्टर एएम गेहलोत के मुताबिक, दोनों महिलाओं के साथ किसी तरह के दुर्व्यवहार की जानकारी नहीं मिली है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कथित अपहरणकर्ताओं ने तीनों का सामान भी अपने पास रख लिया और उनकी रिहाई के बदले 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी.
परिवार को क्या जानकारी थी?
इस दौरान तीनों ने अपने परिवार से संपर्क किया था, लेकिन पुलिस के मुताबिक वे अपनी असली स्थिति नहीं बता सके. तीनों ने कथित तौर पर परिवार को बताया था कि वे कनाडा में हैं और जल्द ही अमेरिका पहुंचकर उनसे संपर्क करेंगे. इसके बाद अचानक उनका संपर्क बंद हो गया. इंस्पेक्टर एएम गेहलोत के मुताबिक, परिवार को बताया गया था कि तीनों अमेरिका पहुंचने के बाद संपर्क करेंगे, लेकिन फिर उनसे कोई बात नहीं हुई. पुलिस का कहना है कि उस समय तक तीनों कथित तौर पर ‘बाबा खान’ नाम के एक व्यक्ति के कब्जे में थे और उन्हें अपने परिवार से झूठ बोलने के लिए मजबूर किया गया था.
जब परिवार की तीनों से बातचीत बंद हो गई तो चिंता बढ़ने लगी. 29 सितंबर को उनके परिवार के सदस्यों ने लंघनाज पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. परिवार ने पुलिस को बताया कि 22 सितंबर के बाद से तीनों से कोई संपर्क नहीं हुआ था. यहीं से पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.
कैसे एक पहले किडनैप हुए शख्स ने की मदद?
इसी दौरान पुलिस को कडी शहर के रहने वाले एक युवक वंश के बारे में जानकारी मिली. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वंश खुद भी इथियोपिया में कथित तौर पर अगवा हो चुका था और अपनी रिहाई के लिए 40 लाख रुपये की फिरौती दे चुका था. उसकी ओर से मिली जानकारी ने पुलिस को तीनों कजिन्स तक पहुंचने में मदद की.
कितनी मांगी थी फिरौती?
पुलिस के मुताबिक, तीनों को कथित तौर पर अगवा करने वाले व्यक्ति ने खुद को “बाबा खान” बताया. पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह संभव है कि “बाबा खान” उसका असली नाम नहीं हो. वह WhatsApp पर केवल वॉयस कॉल के जरिए बात करता था और वीडियो कॉल पर आने के लिए तैयार नहीं होता था. पुलिस को शक था कि वह अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा है. कथित अपहरणकर्ता ने तीनों की रिहाई के बदले शुरुआत में 1 करोड़ रुपये की मांग की थी.
कितने पैसे दे चुका था परिवार?
इंस्पेक्टर गेहलोत के मुताबिक, पुलिस ने कथित अपहरणकर्ता से बातचीत के दौरान उसे समझाने की कोशिश की कि तीनों का परिवार एक मिडिल क्लास किसान परिवार है और वह इतनी बड़ी रकम नहीं दे सकता. परिवार की ओर से यह भी बताया गया कि अमेरिका पहुंचाने वाले नेटवर्क को पहले ही 60 लाख रुपये दिए जा चुके हैं. यह रकम कथित तौर पर तीनों के लिए 20-20 लाख रुपये के हिसाब से दी गई थी. लगातार बातचीत के बाद कथित अपहरणकर्ता ने अपनी मांग कम कर दी.
कैसे घटी मांग?
पुलिस के मुताबिक, बातचीत के बाद कथित अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की मांग घटाकर 15 लाख रुपये कर दी. उन्होंने कथित तौर पर कहा कि इससे कम रकम में वे तीनों को रिहा नहीं करेंगे. यानी तीनों के लिए 5-5 लाख रुपये की मांग की गई. पुलिस और परिवार की ओर से फिर भी यही कहा गया कि उनके पास इतनी रकम भी नहीं है.
पुलिस ने क्या तरीका अपनाया?
इस मामले में लंघनाज पुलिस ने एक अलग तरीका अपनाया. पुलिस ने डांगरवा गांव के रहने वाले आदित्य पंचाल को भरोसे में लिया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कथित अपहरणकर्ता ने पहले आदित्य पंचाल से संपर्क किया था. इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में आदित्य पंचाल को कथित अपहरणकर्ता से बातचीत करने के लिए कहा गया. इंस्पेक्टर गेहलोत के अनुसार, पंचाल, परिवार के एक सदस्य और दो पुलिसकर्मियों ने बाबा खान से लगातार कई फोन कॉल पर बातचीत की. बातचीत का मकसद किसी तरह तीनों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करना था.
पुलिस के मुताबिक, आदित्य पंचाल ने तीनों के परिवार को वडोदरा के एक एजेंट से संपर्क कराया. इस एजेंट की पहचान भार्गव पटेल के रूप में हुई. लेकिन जब पुलिस ने पटेल को तलाशने की कोशिश की तो वह कथित तौर पर गायब हो चुका था. पुलिस को शक है कि भार्गव पटेल इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है.
मामले की जानकारी मेहसाणा पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस ब्रांच यानी LIB को दी गई. इसके अलावा गुजरात पुलिस मुख्यालय, गांधीनगर और नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय यानी MEA को भी मामले की जानकारी दी गई.
कैसे बनी बात?
30 सितंबर को कथित अपहरणकर्ता और परिवार के बीच बातचीत के दौरान मामला एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया. परिवार के प्रतिनिधि ने बाबा खान से कहा कि वे 5 लाख रुपये भी नहीं दे सकते. ऐसे में 15 लाख रुपये की मांग पूरी करना उनके लिए संभव नहीं है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस बात से कथित अपहरणकर्ता काफी नाराज हो गया.
उसने कथित तौर पर गाली-गलौज की और फोन काट दिया. इसके बाद कुछ समय तक परिवार को कोई जानकारी नहीं मिली. लेकिन फिर अचानक ऐसा हुआ, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी.
अचानक आया वीडियो कॉल, स्क्रीन पर दिखे तीनों..
बाद में परिवार के पास एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया. परिवार ने जब कॉल उठाया तो दूसरी तरफ ममता, रुत्विक और मयूरी दिखाई दिए. तीनों ने बताया कि उन्होंने किसी दूसरे व्यक्ति का फोन उधार लेकर यह वीडियो कॉल किया है. उन्होंने परिवार को बताया कि कथित अपहरणकर्ताओं ने उन्हें छोड़ दिया है. पुलिस के मुताबिक, तीनों को एयरपोर्ट से करीब 2 किलोमीटर दूर छोड़ दिया गया था.
कथित अपहरणकर्ताओं ने उनकी भारत लौटने की फ्लाइट की टिकट भी बुक कर दी थी. यानी जिस गिरोह ने कथित तौर पर उन्हें अगवा कर फिरौती की मांग की थी, उसी ने आखिरकार उनकी भारत वापसी की टिकट भी बुक की और उन्हें छोड़ दिया.
30 सितंबर की शाम मुंबई के लिए रवाना हुए
तीनों ने 30 सितंबर की शाम अदीस अबाबा से मुंबई के लिए Ethiopian Airlines की फ्लाइट ET 640 पकड़ी. जब वे विमान में सवार हुए तो उनके पास केवल उनके पासपोर्ट थे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कथित अपहरणकर्ताओं ने उनका बाकी सामान अपने पास रख लिया था.
भारत लौटकर पुलिस से क्या कहा?
तीनों ने पुलिस को बताया कि अदीस अबाबा में उन्हें एक सुनसान जगह स्थित घर में ले जाया गया था. वहां कथित तौर पर उनके हाथ बांधे गए और आंखों पर पट्टी बांध दी गई. इंस्पेक्टर गेहलोत के मुताबिक, दोनों महिलाओं के साथ किसी तरह के दुर्व्यवहार की जानकारी नहीं मिली. तीनों ने पुलिस को यह भी बताया कि वे वंश को नहीं जानते थे. वंश वही युवक है, जिसकी कथित जानकारी के बाद पुलिस को उनके बारे में सुराग मिला था.
वंश कौन है और उसकी जानकारी क्यों अहम रही?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कडी शहर का रहने वाला वंश पहले खुद इथियोपिया में कथित अपहरण का शिकार हो चुका था. उसने कथित तौर पर अपनी रिहाई के लिए 40 लाख रुपये की फिरौती दी थी. जब उसे तीनों कजिन्स के बारे में जानकारी मिली तो उसने उनके परिवार और पुलिस को इसकी जानकारी दी. इसके बाद लंघनाज पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवार से गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई और आगे की जांच शुरू की. हालांकि, तीनों कजिन्स ने पुलिस को बताया कि वे वंश को नहीं जानते थे.
अमेरिका जाने के लिए क्यों चुना गया ‘डंकी रूट’?
पुलिस के मुताबिक, परिवार ने तीनों को अमेरिका भेजने के लिए ‘डंकी’ रूट चुनने का फैसला उस समय किया, जब ममता का अमेरिका का वीजा आवेदन खारिज हो गया था. इंस्पेक्टर गेहलोत के अनुसार, परिवार ने सोचा कि ममता को अमेरिका भेजने के साथ उसके दो छोटे कजिन्स को भी भेज दिया जाए. परिवार की उम्मीद थी कि तीनों अमेरिका में नई जिंदगी शुरू कर सकते हैं. इसी वजह से तीनों को कथित तौर पर एक साथ भेजने का फैसला किया गया.




