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बिहार और बंगाल चुनाव हों कैंसिल, ज्ञानेश कुमार पर जमकर बरसे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त SY कुरैशी, क्यों बोले- सुप्रीम कोर्ट का भी है टेस्ट?

देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस में रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के भीतर फैसलों और कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.

बिहार और बंगाल चुनाव हों कैंसिल, ज्ञानेश कुमार पर जमकर बरसे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त SY कुरैशी, क्यों बोले- सुप्रीम कोर्ट का भी है टेस्ट?
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देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस में रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के भीतर फैसलों और कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद और कई फैसलों पर आपत्तियों का जिक्र सामने आया, जिसके बाद विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठी है. इसी बीच भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने द लल्लनटॉप से बातचीत में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

कुरैशी ने अपने कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि आयोग में फैसले प्रक्रिया और बहुमत के आधार पर होने चाहिए. उन्होंने SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए और कहा कि अगर आयोग के भीतर असहमति थी तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए. कुरैशी ने यहां तक कहा कि मौजूदा विवाद लोकतांत्रिक संस्थाओं में भरोसे के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है. इसी के साथ उन्होंने कहा कि बिहार और बंगाल दोनों चुनाव कैंसिल होने चाहिए. आइए Point में उनकी बड़ी बातें जानते हैं...

SY कुरैशी के 6 बड़े बयान: Gyanesh Kumar और चुनाव आयोग पर क्या बोले?

1. ‘बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनाव भी कैंसिल होने चाहिए’

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त SY कुरैशी ने कहा कि 'CEC ज्ञानेश कुमार ने इतने गैरकानूनी काम किए हैं कि पश्चिम बंगाल और बिहार वाले चुनाव भी कैंसिल होने चाहिए.' हालांकि, यह कुरैशी की टिप्पणी है, कोई न्यायिक आदेश या स्थापित कानूनी निष्कर्ष नहीं. मौजूदा विवाद में चुनावों को रद्द करने की मांग विपक्षी नेताओं की ओर से भी उठी है.

2. 'फिर से चुनाव हों, खर्च का बिल ज्ञानेश कुमार को भेजें'

कुरैशी ने आगे कहा कि 'फिर से चुनाव होने चाहिए. उस चुनाव में जो खर्चा आए, उसका बिल इन साहब (ज्ञानेश कुमार) को भेज दिया जाए. इनकी पेंशन में से कटे.' यह उनका राजनीतिक/सार्वजनिक टिप्पणी के रूप में दिया गया बयान है.

3. 'इतने बड़े स्केल पर धांधली, डेमोक्रेसी के साथ खिलवाड़'

उन्होंने कहा कि “इतने बड़े स्केल पर, इस तरीके की धांधली, पूरे देश की डेमोक्रेसी के साथ खिलवाड़ है.” यह टिप्पणी चुनाव आयोग के भीतर सामने आई कथित असहमति के संदर्भ में है. Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं.

4. 'एक अकेले आदमी का फैसला, कोई फैसला नहीं होता'

SY कुरैशी ने कहा कि “एक अकेले आदमी का फैसला, कोई फैसला नहीं होता. ऐसे फैसले कैंसिल होने चाहिए.” यह टिप्पणी उस बहस से जुड़ी है जिसमें आयोग के भीतर CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, ECI ने कहा है कि उसके फैसले सामूहिक और सर्वसम्मत तरीके से लिए गए थे.

5. 'सुप्रीम कोर्ट का भी टेस्ट है'

पूर्व CEC ने कहा कि 'अगर इसके बाद भी अगर सुप्रीम कोर्ट इसमें इंटरफेयर नहीं करता तो ये सुप्रीम कोर्ट का भी टेस्ट है. जनता जानना चाहेगी कि डेमोक्रेसी बचाने के लिए SC ने क्या किया?' सुप्रीम कोर्ट पहले बिहार SIR की वैधता पर अपना फैसला दे चुका है और उस मामले में SIR को वैध माना था.

6. ‘अब छुपा-छुपी का खेल नहीं चल सकता’

कुरैशी ने सवाल उठाते हुए कहा कि “वो ऐसे फैसले ले कैसे रहे थे. अब छुपा-छुपी का खेल नहीं चल सकता.” यह टिप्पणी चुनाव आयोग के भीतर सामने आई कथित असहमति और फैसलों की प्रक्रिया पर उठे सवालों के संदर्भ में है. Indian Express की रिपोर्ट में 14 आपत्तियों का उल्लेख है, जबकि आयोग ने इन टिप्पणियों को सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है.

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