जब 2 बार इस्तीफे की पेशकश कर चुके थे धर्मेंद्र प्रधान, तो क्यों नहीं मानी थी सरकार; 7 पॉइंट्स में पढ़ें Inside Story
रिपोर्ट के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान 2 बार अपने इस्तीफे की पेशकश सरकार के सामने कर चुके थे, लेकिन सरकार ने दोनों बार मना कर दिया था. सरकार का मानना था कि इस्तीफा इसका समाधान नहीं है.
Dharmendra Pradhan resignation inside story
नीट पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने देश की राजनीति और शिक्षा जगत में नई चर्चा छेड़ दी है. हालांकि अब सरकारी सूत्रों के हवाले से इस फैसले के पीछे की अंदरूनी कहानी सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा एक बार नहीं, बल्कि दो बार देने की पेशकश की थी, लेकिन शुरुआती दौर में सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया.
सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना था कि किसी मंत्री का इस्तीफा अपने आप में समाधान नहीं होता. प्राथमिकता शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करने और आंदोलन के बीच हालात को नियंत्रित करने पर थी. बाद में परिस्थितियों की व्यापक समीक्षा के बाद सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने का फैसला लिया.
7 पॉइंट्स में जानें इनसाइड स्टोरी
1. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नीट पेपर लीक विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दो अलग-अलग अवसरों पर अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी. हालांकि दोनों बार सरकार ने उनसे अपने पद पर बने रहने और सुधार प्रक्रिया जारी रखने को कहा.
2. सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई को वरिष्ठ मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक के दौरान भी धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देने की पेशकश की थ.। उस समय सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी का हवाला देते हुए उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया.
3. सूत्रों के मुताबिक, सरकार के भीतर यह राय थी कि किसी मंत्री का इस्तीफा देना सबसे आसान कदम हो सकता है, लेकिन इससे मूल समस्या का समाधान नहीं होगा. सरकार की प्राथमिकता परीक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करने और संस्थागत बदलावों पर काम करना था.
4. बताया गया कि स्थिति तब बदली, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई. सूत्रों के अनुसार, इस दौरान CJP ने 20 जुलाई के "चलो संसद" मार्च की तर्ज पर एक और बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी, जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई.
5. सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को रिपोर्ट दी कि कुछ असामाजिक और भारत-विरोधी तत्व आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. बताया गया कि डिजिटल निगरानी के दौरान 400 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की गई, जिनमें लगभग 100 इंस्टाग्राम अकाउंट पाकिस्तान से संचालित होने का दावा किया गया.
6. दिल्ली पुलिस की फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए 20 से 24 जुलाई के बीच जंतर-मंतर के आसपास मौजूद करीब 400 लोगों की पहचान की गई, जिनके आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा किया गया. साथ ही, कुछ लोगों के 20 जुलाई को हुई हिंसा और तोड़फोड़ से जुड़े होने की आशंका भी जताई गई। इन दावों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है.
7. कानून-व्यवस्था, आंदोलन के विस्तार और सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट की समीक्षा के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि तनाव कम करना और स्थिति को नियंत्रित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया. इसके कुछ ही समय बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया.




