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चीन का मुकाबला करना कठिन... ITBP डीजी ने बताई भारत की तैयारी, यूक्रेन से लेकर ईरान तक का उदाहरण देकर समझाया लड़ाई का तरीका

ITBP प्रमुख शत्रुजीत का बड़ा बयान आया है. उनका कहना है कि चीन से भारत यूक्रेन और रूस की तरह लड़ सकता है, क्योंकि ड्रैगन परंपरागत तरीके में काफी आगे निकल गया है.

चीन का मुकाबला करना कठिन... ITBP डीजी ने बताई भारत की तैयारी, यूक्रेन से लेकर ईरान तक का उदाहरण देकर समझाया लड़ाई का तरीका
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आईटीबीपी के डीजी के एक बयान के बाद विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है. दरअसल, डीजी शत्रुजीत ने कहा कि भारतीय सैनिक और चीन के बीच काफी दिनों पहले झड़पें हुई थीं, जो अब भी चल रही हैं. इस दौरान उन्होंने चीन से भिड़ने की भारत की तैयारी का जिक्र भी किया. शत्रुजीत का कहना था कि चीन से भिड़ना परंपरागत तरीके से काफी मुश्किल है. क्योंकि वहां की सरकार ने इस मामले में बहुत खर्च किया है और वह काफी आगे निकल गए हैं.

उन्होंने आगे यूक्रेन और ईरान का उदाहरण देते हुए कहा कि मॉडर्न वॉरफेयर के जरिए चीन से भिड़ा जा सकता है. इस दिशा में भारत काम भी कर रहा है. उन्होंने सेना को मिलने वाले बजट के 70 फीसद हिस्से को इस दिशा में लगाने की भी बात की.

क्या बोले आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत?

डीजी शत्रुजीत ने कहा, "चीन का मुकाबला, जो अब परंपरागत तरीके हैं, उनसे करना अब शायद काफी मुश्किल हो, क्योंकि उन्होंने परंपरागत तरीकों में काफी इनवेस्ट भी किया है, जिसकी वजह से वे काफी आगे निकल गए हैं. लेकिन, ड्रोन एक ऐसी चीज है, जिसकी वजह से एक छोटा-सा देश भी बड़े देश को टक्कर दे सकता है."

डीजी ने यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर रूस से तुलना करें तो यूक्रेन काफी छोटा देश है, लेकिन फिर भी रूस के हर महीने 10-15 हजार सैनिक मारे जा रहे हैं. कभी उन्होंने कहा था कि हम 1-1.5 महीने में रूस पर कब्जा कर लेंगे. लेकिन अब चौथा साल आ गया है. अब रूस में हर महीने 10-15 हजार डेड बॉडीज आती हैं.

इसी तरह उन्होंने ईरान का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका इतनी बड़ी महाशक्ति है, लेकिन ईरान ने उसकी नाक में दम कर दिया. ईरान के पास न तो एयरफोर्स है और न ही इतनी बड़ी सेना.

कैसी है भारत की तैयारी?

डीजी शत्रुजीत ने कहा कि जब से ड्रोन आए हैं, सेना का रोल बदल गया है. ऐसे में हमें ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर बड़े स्तर पर काम करना है. उन्होंने बताया कि हमें 400 करोड़ का बजट मिला है, जिसमें से हमने लगभग 70 फीसद ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए रखा है, जो अप्रूव भी हो गया है.

शत्रुजीत आगे बताते हैं कि हर बॉर्डर पर रहने वाली प्लाटून में हमने एक ड्रोन प्लाटून रखी है. इसको लेकर ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग भी शुरू हो गई है. इसके साथ ही ड्रोन बनाने का काम भी हमने इन-हाउस शुरू कर दिया है, ताकि हम बाहर के सप्लायर पर निर्भर न रहें और खुद इनका प्रोडक्शन करें. उन्होंने परेड का उदाहरण देते हुए कहा कि आज जो ड्रोन शो हुआ, उसमें कई ऐसे ड्रोन थे, जो इन-हाउस डेवलप किए गए थे.

कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना

इस पूरे मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना है. यूथ कंग्रेस के पूर्व प्रेसिडेंट अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा,""चीन बहुत आगे निकल चुका है, उसका मुकाबला हम नही कर सकते." ये सिर्फ सेना का बयान नही है, मोदी जी की नाकामी का कुबूलनामा है. अडानी को देश सौंपने की जगह, और पार्टियां तोड़ने की जगह अगर सेना को Mordern Warfare के लिए तैयार किया गया होता तो क्या आज ऐसे हालात होते?"

परंपरागत तरीके से चीन भारत से कितना ताकतवर?

  • परंपरागत सैन्य ताकत की बात करें तो चीन कई अहम क्षेत्रों में भारत से आगे है. ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स और उपलब्ध सैन्य आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक सैन्य रैंकिंग में चीन तीसरे और भारत चौथे स्थान पर है. दोनों देशों की सैन्य क्षमता की तुलना सैनिकों की संख्या, रक्षा बजट, टैंक, लड़ाकू विमानों और नौसेना के आधार पर की जा सकती है.
  • सैनिकों की संख्या में चीन के पास लगभग 20.35 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जबकि भारत की सक्रिय सैन्य शक्ति करीब 14.55 लाख है. यानी सक्रिय सैनिकों की संख्या के मामले में चीन आगे है.
  • रक्षा बजट की बात करें तो चीन सैन्य क्षेत्र में भारत की तुलना में लगभग तीन से चार गुना अधिक खर्च करता है. इससे उसे आधुनिक हथियारों, सैन्य उपकरणों और रक्षा तकनीक के विकास में ज्यादा संसाधन मिलते हैं.
  • टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के मामले में भी चीन की संख्या अधिक बताई जाती है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास करीब 6,800 टैंक हैं, जबकि भारत के पास लगभग 4,201 टैंक हैं.

  • हवाई ताकत की तुलना करें तो चीन के पास लगभग 3,309 सैन्य विमान हैं. वहीं, भारत के पास करीब 2,229 सैन्य विमान बताए जाते हैं.
  • नौसेना के मोर्चे पर चीन की बढ़त और स्पष्ट दिखाई देती है. चीन के पास लगभग 754 युद्धपोत और पनडुब्बियां बताई जाती हैं, जिनमें तीन एयरक्राफ्ट कैरियर और 61 पनडुब्बियां शामिल हैं. इसके मुकाबले भारत के पास करीब 293 युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं. भारतीय नौसेना के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर और 18 पनडुब्बियां बताई जाती हैं.
  • मिसाइल क्षमता से जुड़े उपलब्ध अनुमानों में चीन के पास लगभग 400 से 600 से अधिक मिसाइलें होने की बात कही गई है, जबकि भारत के पास करीब 160 से 180 मिसाइलें बताई गई हैं. हालांकि, इस आंकड़े में मिसाइलों की किस श्रेणी को शामिल किया गया है, यह स्पष्ट होना जरूरी है.
  • कुल मिलाकर, सैनिकों की संख्या, रक्षा बजट, टैंक, विमानों और नौसैनिक बेड़े जैसे पारंपरिक सैन्य मानकों पर चीन की क्षमता बड़ी दिखाई देती है. लेकिन किसी भी सैन्य मुकाबले का नतीजा केवल हथियारों और सैनिकों की कुल संख्या से तय नहीं होता. तकनीक, प्रशिक्षण, युद्ध का अनुभव, भौगोलिक परिस्थितियां और सैन्य रणनीति भी अहम भूमिका निभाते हैं.
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