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BRICS Summit में मोदी-शी की मुलाकात के बाद सस्पेंस, सीमा को लेकर दोनों देशों के बयानों में दिखा बड़ा फर्क, 10 Points में जानें सब कुछ

BRICS Summit में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद भारत और चीन के बयानों में बड़ा अंतर सामने आया. जानें सीमा विवाद, शांति और द्विपक्षीय रिश्तों पर दोनों देशों का रुख 10 Points में.

BRICS Summit में मोदी-शी की मुलाकात के बाद सस्पेंस, सीमा को लेकर दोनों देशों के बयानों में दिखा बड़ा फर्क, 10 Points में जानें सब कुछ
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समी सिद्दीकी
Edited By:समी सिद्दीकी4 Mins Read

Updated on: 13 Sept 2026 7:31 AM IST

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शनिवार को हुई मुलाकात के बाद भारत और चीन ने अपने-अपने बयान जारी किए. दोनों बयानों में सीमा विवाद और दोनों देशों के व्यापक रिश्तों को लेकर अलग-अलग सोच दिखाई दी है. चीन ने कहा कि दोनों देशों को एक साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और सीमा विवाद का समाधान करने की दिशा में काम करना चाहिए. वहीं, भारत ने साफ किया कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने का जरूरी आधार है.

शी जिनपिंग का भारत ब्रिक्स के लिए दौरा ऐसे समय हुआ है जब 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव आया था. इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक और चार चीनी सैनिक मारे गए थे. सात साल बाद शी के भारत दौरे और मोदी से मुलाकात के बाद जारी बयानों में सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के नजरिए का यह अंतर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

भारत-चीन रिश्तों पर दोनों देशों के बयानों में क्या अंतर है? 10 बड़ी बातें

1. चीन के बयान में कहा गया कि भारत और चीन को द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सीमा विवाद का समाधान भी करना चाहिए. चीन ने दोनों मोर्चों पर “समानांतर और एक-दूसरे को मजबूत करने वाली प्रगति” की बात कही.

2. चीन ने कहा कि दोनों देशों को सीमा वाले इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखते हुए द्विपक्षीय संबंधों और सीमा विवाद, दोनों पर आगे बढ़ना चाहिए.

3. भारत के बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीमा वाले इलाकों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के बीच संबंधों के लगातार विकास के लिए “जरूरी आधार” है. यानी भारत के मुताबिक पहले सीमा पर शांति जरूरी है, तभी व्यापक रिश्ते आगे बढ़ सकते हैं.

4. प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और आपसी सहमतियों का पालन करने की जरूरत पर जोर दिया. भारत का फोकस सीमा पर बनी मौजूदा व्यवस्था और समझौतों को बनाए रखने पर रहा.

5. भारत के बयान के मुताबिक, मोदी और शी जिनपिंग ने सीमा विवाद के “निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य” समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताई. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का समाधान अभी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है.

6. भारत के बयान में कहा गया कि सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों के पूरे रिश्तों और दोनों देशों के लोगों के लोंगटर्म इंटरेस्ट को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए.

7. भारत और चीन के बयानों में सबसे बड़ा अंतर इस बात को लेकर दिखाई देता है कि सीमा विवाद और द्विपक्षीय रिश्तों में पहले किस चीज को प्राथमिकता दी जाए. चीन दोनों मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ने की बात करता है, जबकि भारत सीमा पर शांति को व्यापक रिश्तों के विकास की बुनियाद मानता है.

8. भारत का रुख सीमा पर वास्तविक स्थिति से जुड़ा है. उसका कहना है कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहनी चाहिए और सीमा से संबंधित मौजूदा समझौतों का पालन किया जाना चाहिए.

9. 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प ने भारत और चीन के संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था. इस संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक और चार चीनी सेना के जवान मारे गए थे. इसके बाद सीमा की स्थिति दोनों देशों के रिश्तों का एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई है.

10. चीन के ताजा बयान में यह गुंजाइश दिखाई देती है कि सीमा विवाद का अंतिम समाधान होने से पहले भी भारत-चीन के व्यापक संबंधों में आगे बढ़ने की प्रक्रिया जारी रह सकती है. इसके विपरीत, भारत का बयान यह संकेत देता है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना दोनों देशों के रिश्तों का लगातार विकास संभव नहीं है.

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