Begin typing your search...

घिनौने वीडियो के साथ-साथ मीठे जहर का काला कारोबार, तुर्की की एल्विश शहद से कैसे Ashok Kharat बना दौलत का दानव?

महिलाओं का यौन शोषण करने वाले अशोक खरात ने अपने क्लाइंट्स को महंगे ‘जादुई’ तुर्की शहद ‘एल्विश’ के नाम पर ठगने का कारोबार चलाया. इस शहद को लेकर उसके ठगों ने बड़े-बड़े नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों को फंसाया.

Ashok Kharat Elvish Honey Fraud Case
X

Ashok Kharat

विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर3 Mins Read

Updated on: 27 March 2026 2:47 PM IST

Ashok Kharat Case: नासिक के भोंदू बाबा के नाम से चर्चित अशोक खरात का मामला लगातार नई तहें खोल रहा है. महिलाओं के साथ यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और अघोरी प्रथाओं के आरोपों में आरोपी पर अब तक 8 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. फिलहाल वह पुलिस की गिरफ्त में है और एसआईटी मामले की गहन जांच कर रही है.

इस बीच जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि खरात ने अपने क्लाइंट्स को महंगे ‘जादुई’ तुर्की शहद ‘एल्विश’ के नाम पर ठगने का कारोबार चलाया. इस शहद को लेकर उसके ठगों ने बड़े-बड़े नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों को फंसाया और इसे लेकर अब वित्तीय और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं.

क्लाइंट्स को क्यों देता था एल्विश शहद?

जांच में सामने आया है कि अशोक खरात अपने क्लाइंट्स को ‘रहस्यमयी’ और ‘जादुई’ गुणों वाला तुर्की शहद बेचता था. यह शहद स्वास्थ्य और शारीरिक कमजोरी को दूर करने वाला बताया जाता था. खरात खुद भी इसे खाता और दावा करता था कि यह उम्र को लंबा करता है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या खरात ने असली एल्विश शहद बेचा या उसमें मिलावट करके लोगों को ठगा. इसके पीछे उसने डर और अंधविश्वास का सहारा लेकर अपने लिए एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया था.

कहां रखता था पैसा?

सूत्रों के मुताबिक, इस शहद से मिलने वाली रकम सीधे उसके पास रखने के बजाय, खरात इसे अपने ट्रस्ट के खातों में जमा करवाता था. इस प्रक्रिया में काले धन को सफेद करने का काम किया जाता था. जांच एजेंसियों को इस संदिग्ध लेन-देन से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं. अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल थे और कितने लोग इस फर्जी तुर्की शहद के नाम पर ठगे गए.

‘एल्विश’ शहद क्या है?

एल्विश शहद दुनिया के सबसे महंगे शहदों में से एक माना जाता है. यह तुर्की के आर्टविन शहर में एक गुफा से साल में केवल एक बार इकट्ठा किया जाता है. बाजार में इसकी कीमत करीब 9 लाख रुपये प्रति किलो है, लेकिन अशोक खरात इसे 15 लाख रुपये प्रति किलो तक बेचता था.

पुलिस और एसआईटी अब इस मामले में और गहन जांच कर रही है. यह स्पष्ट करना है कि अशोक खरात के फर्जी शहद कारोबार के पीछे कितने लोगों का हाथ था और इस नेटवर्क में और कौन शामिल थे.

अगला लेख