जब Aamir Khan ने साइन कर ली थीं 9 फिल्में, फ्लॉप होते ही रोते थे घर आकर; 'वन फिल्म वंडर' कहकर उड़ाते थे लोग मजाक
बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने करियर की शुरुआत में एक बड़ी गलती की, जब उन्होंने एक साथ कई फिल्में साइन कर लीं. फ्लॉप फिल्मों और मुश्किल दौर के बाद उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने आगे चलकर उनकी पहचान ही बदल दी.
आमिर खान (Aamir Khan), जिन्हें हम सब 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' के नाम से जानते हैं, उन्होंने बॉलीवुड में अपना सफर 1973 में एक बच्चे के रोल से शुरू किया था. लेकिन असली पहचान उन्हें 1988 में आई सुपरहिट फिल्म 'कयामत से कयामत तक' से मिली. इस फिल्म ने उन्हें रातों-रात बड़ा स्टार बना दिया. लोग उनकी तारीफ करने लगे, और उन्हें ढेर सारे ऑफर आने लगे।लेकिन इसी सफलता ने उन्हें एक बड़ी गलती करने पर मजबूर कर दिया, जिसे बाद में आमिर ने खुद अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती बताया क्या था वो?.
उन्होंने बिना ज्यादा सोचे-समझे कई-कई फिल्मों पर साइन कर लिए. उन्हें लगा कि दूसरे बड़े एक्टर्स 30-40-50 फिल्में कर रहे हैं, तो वे भी 9-10 फिल्में कर लेंगे तो क्या बुरा है? लेकिन ये फैसला उनके लिए बहुत महंगा साबित हुआ. जब इन फिल्मों की शूटिंग शुरू हुई, तो आमिर को एहसास हुआ कि वे एक साथ इतनी सारी फिल्में नहीं कर पाएंगे. उनका तरीका अलग था वे किसी एक काम पर पूरा ध्यान देकर, पूरी मेहनत से काम करना पसंद करते थे. लेकिन अब वे 8-9 फिल्मों के बीच फंस गए थे. इससे उन्हें बहुत परेशानी हुई.
कौन होता है फिल्म का असली कप्तान?
उन्होंने ये भी सीखा कि फिल्म में सबसे बड़ी चीज निर्देशक होता है. निर्देशक ही फिल्म का असली कप्तान होता है. अगर निर्देशक, स्क्रिप्ट और प्रोड्यूसर में तालमेल नहीं होगा, तो फिल्म अच्छी नहीं बन सकती. आमिर ने कहा कि वे कल्पना करते थे कि फिल्म की शूटिंग खूबसूरत कश्मीर की वादियों में हो रही है, लेकिन निर्देशक का मन खंडाला जैसी जगह पर था और प्रोड्यूसर ने तो पहले से फिल्म सिटी में सेट बुक कर लिया था. ऐसे में फिल्म का क्या बनता?.
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धीरे-धीरे फिल्म होती रही फ्लॉप
धीरे-धीरे उनकी ये गलती का नतीजा सामने आने लगा. तीन फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गईं. लोगों ने उन्हें 'वन फिल्म वंडर' यानी सिर्फ एक फिल्म का स्टार कहकर मजाक उड़ाना शुरू कर दिया. बाकी फिल्में जो अभी रिलीज होने वाली थीं, आमिर को पता था कि वे भी अच्छी नहीं हैं. उनका मन बहुत उदास हो गया. वे शाम को घर आकर अकेले में रोते थे. उन्हें लगने लगा कि उनका करियर अब खत्म हो जाएगा. वे खुद को दलदल में फंसा हुआ महसूस कर रहे थे.
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एक ना ने कैसे बदली किस्मत?
इसी मुश्किल वक्त में एक दिन मशहूर निर्देशक महेश भट्ट ने उन्हें एक फिल्म का ऑफर दिया. महेश भट्ट उस समय 'सारांश', 'अर्थ' और 'नाम' जैसी शानदार फिल्में बना चुके थे, और अपनी क्रिएटिविटी के पीक पर थे. आमिर बहुत खुश हुए, उन्हें लगा कि भट्ट साहब के साथ काम करने से उनका करियर फिर से पटरी पर आ जाएगा. कम से कम तीन-चार और फिल्में मिल जाएंगी, और कुछ स्थिरता तो आएगी ही. लेकिन जब महेश भट्ट ने स्क्रिप्ट सुनाई, तो आमिर का मन नहीं माना. उन्हें स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई वो रात आमिर के लिए बहुत मुश्किल थी. वे सो नहीं पाए एक तरफ व्यावहारिक सोच कह रही थी, 'हां कह दो, अच्छा मौका है.' लेकिन दिल कह रहा था, 'हीं, ये सही नहीं लग रहा.' अगले दिन आमिर ने बहुत हिम्मत जुटाकर महेश भट्ट से मिले और साफ-साफ कह दिया, 'सॉरी सर, मुझे स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई, इसलिए मैं ये फिल्म नहीं कर पाऊंगा.' वो फिल्म आखिरकार कभी बनी ही नहीं.
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आमिर के लिए क्या है 3 जरुरी चीजें
लेकिन इस एक ना कहने के फैसले ने आमिर की जिंदगी बदल दी. उस वक्त जब सब कुछ गड़बड़ हो रहा था, तब भी उन्होंने समझौता नहीं किया. इस हिम्मत ने उन्हें आगे चलकर बड़े-बड़े फैसले लेने की ताकत दी. जैसे 'लगान', 'तारे जमीन पर', '3 इडियट्स' जैसी फिल्में चुनने का साहस. आज आमिर का सबसे बड़ा सिद्धांत यही है- कोई भी फिल्म तभी करनी है, जब तीन चीजें बिल्कुल परफेक्ट हों:
- सही और मजबूत स्क्रिप्ट
- सही और भरोसेमंद निर्देशक
- सही और समझदार निर्माता
जब तक ये तीनों चीजें पूरी नहीं होतीं, वे फिल्म नहीं करते. इसी वजह से वे कम फिल्में करते हैं, लेकिन हर फिल्म खास और यादगार बनती है.




