क्या है Salman Khan का पड़ोसी केतन कक्कड़ से विवाद? कोर्ट ने दिए सोशल मीडिया से सारे वीडियो हटाने के आदेश
पनवेल फार्महाउस विवाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने केतन कक्कड़ को सलमान खान से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो हटाने पर विचार करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि कानूनी विवादों का समाधान सोशल मीडिया नहीं बल्कि न्यायिक मंचों पर होना चाहिए.
बॉलीवुड के 'दबंग' यानी सलमान खान (Salman Khan) सिर्फ अपनी फिल्मों या बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड्स के लिए ही खबरों में नहीं रहते, बल्कि उनकी पर्सनल लाइफ और विवाद भी अक्सर हेडलाइंस का हिस्सा बन जाते हैं. इस समय बी-टाउन के गलियारों में सलमान खान और उनके पनवेल फार्महाउस के पड़ोसी केतन कक्कड़ के बीच चल रहा कानूनी विवाद चर्चा का गर्म विषय बना हुआ है. सोशल मीडिया पर छिड़ी यह जंग अब देश की प्रतिष्ठित अदालतों के कमरों तक पहुंच चुकी है. हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले पर एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने केतन कक्कड़ को सलमान खान और पनवेल संपत्ति विवाद से जुड़े सभी सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो तुरंत हटाने का निर्देश दिया है. अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब यह कानूनी लड़ाई एक नया मोड़ लेती नजर आ रही है.
पड़ोसी ही बन गया 'दुश्मन'
मुंबई से सटे पनवेल इलाके से, जहां सलमान खान का आलीशान और बेहद मशहूर 'अर्पिता फार्महाउस' स्थित है. सलमान अक्सर अपने फुर्सत के पल बिताने, अपना जन्मदिन मनाने और लॉकडाउन के दौरान वक्त गुजारने के लिए इसी फार्महाउस पर आते रहे हैं. इसी फार्महाउस से बिल्कुल सटी हुई एक जमीन के मालिक हैं केतन कक्कड़, जो सलमान खान के पड़ोसी हैं. जनवरी 2022 में इस पड़ोसी रिश्ते में उस समय कड़वाहट आ गई, जब सलमान खान ने मुंबई की एक दीवानी अदालत (Civil Court) में केतन कक्कड़ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया. सलमान खान का आरोप था कि केतन कक्कड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, यूट्यूब और एक्स पर उनके खिलाफ एक वेल प्लांड कैंपेन चलाया है. सलमान के मुताबिक, कक्कड़ ने विभिन्न यूट्यूब चैनलों को दिए इंटरव्यू और अपनी पोस्ट्स में उन पर कई गंभीर और मनगढ़ंत आरोप लगाए. इन आरोपों में कहा गया कि सलमान खान ने अपने फार्महाउस के निर्माण के दौरान पर्यावरण के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया है और स्थानीय प्रशासन पर दबाव बनाकर कक्कड़ की संपत्ति तक जाने वाले मुख्य रास्ते को बाधित या बंद कर दिया है.
विवाद में सांप्रदायिक एंगल की एंट्री
इस विवाद ने तब और भी गंभीर रूप ले लिया जब सलमान खान की कानूनी टीम ने कोर्ट को बताया कि केतन कक्कड़ के सोशल मीडिया पोस्ट सिर्फ संपत्ति या रास्ते के विवाद तक सीमित नहीं थे. अदालत में दायर याचिका के अनुसार, एक्टर का दावा है कि कक्कड़ ने जानबूझकर कुछ ऐसे आपत्तिजनक और भड़काऊ संदर्भों का इस्तेमाल किया, जो सलमान और उनके परिवार के खिलाफ सांप्रदायिक भावनाओं को भड़का सकते थे. एक मशहूर हस्ती होने के नाते मेरी सोशल इमेज और प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. सोशल मीडिया पर किए जा रहे ये दावे न केवल झूठे और अटकलबाजी पर आधारित हैं, बल्कि समाज में नफरत फैलाने की नीयत से किए गए हैं.'
ग्लोबल इमेज नुकसान
सलमान खान की तरफ से कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि केतन कक्कड़ द्वारा अपलोड किए गए इन वीडियो को ऑनलाइन लाखों लोगों ने देखा, शेयर किया और उन पर बेहद आपत्तिजनक प्रतिक्रियाएं दीं. इससे सलमान की ग्लोबल इमेज को गहरा नुकसान पहुंचा है. यही वजह थी कि सलमान ने इस मुकदमे में केवल केतन कक्कड़ को ही नहीं, बल्कि फेसबुक, गूगल, एक्स और यूट्यूब जैसी दिग्गज टेक और सोशल मीडिया कंपनियों को भी पक्षकार बनाया, ताकि उस कंटेंट को इंटरनेट से पूरी तरह हटाया जा सके.
केतन कक्कड़ का पलटवार
दूसरी तरफ, केतन कक्कड़ ने भी इस कानूनी लड़ाई में पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया है. उन्होंने सलमान खान के मानहानि के मुकदमे का पुरजोर विरोध किया है. कक्कड़ का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर जो कुछ भी कहा या जो भी इंटरव्यू दिए, वे सभी तथ्य और जमीनी हकीकत पर आधारित हैं. कक्कड़ के मुताबिक, यह विवाद तब और ज्यादा बढ़ गया जब अधिकारियों ने उनके फार्महाउस से बिल्कुल सटी हुई एक जमीन के प्रस्तावित सौदे (Proposed Land Deal) को कथित तौर पर अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था. केतन कक्कड़ का आरोप है कि इस जमीन के सौदे को रद्द करवाने के पीछे खुद सलमान खान और उनके परिवार का हाथ था, ताकि वे उस जमीन पर अपना नियंत्रण बना सकें. कक्कड़ का तर्क है कि अपनी खुद की जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाना किसी भी तरह से 'मानहानि' के दायरे में नहीं आता है. उनका कहना है कि वे केवल एक पीड़ित नागरिक की तरह अपनी बात रख रहे थे.
बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
निचली अदालत से अंतरिम राहत न मिलने के बाद सलमान खान ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की एकल-न्यायाधीश पीठ कर रही हैं.सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर चल रही इस तरह की कानूनी बहसों और कीचड़ उछालने की संस्कृति पर गहरी चिंता व्यक्त की. बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने दोनों पक्षों को बेहद कड़े शब्दों में नसीहत दी. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा, 'कानूनी विवादों में शामिल पक्षों को अपनी शिकायतों को सोशल मीडिया पर ले जाने और वहां ट्रायल चलाने से बचना चाहिए. अगर कोई समस्या है, तो उसके समाधान के लिए उचित कानूनी मंचों और अदालतों का रुख किया जाना चाहिए.' पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि वीडियो को ऑनलाइन रहने दिया जाए या नहीं, इस तरह के फैसलों को तय करने में देश की अदालतों का बहुमूल्य न्यायिक समय नष्ट नहीं किया जाना चाहिए. कोर्ट ने केतन कक्कड़ को विवाद से जुड़े सभी ट्वीट्स, पोस्ट्स और यूट्यूब वीडियो को तुरंत हटाने पर विचार करने का सीधा निर्देश दिया. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 जुलाई की तारीख तय की है.




