5 करोड़ दो या जेल जाओ, चेक बाउंस केस में राजपाल यादव से सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. कोर्ट ने फिलहाल उनकी जेल की सजा पर रोक लगाते हुए 5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया है. मामला फिल्म बनाने के लिए लिए गए कर्ज से जुड़ा है.
चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को राहत
चेक बाउंस केस में अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दिल्ली हाई कोर्ट से मिली तीन महीने की जेल की सजा के बाद राजपाल यादव को 10 सितंबर तक सरेंडर करना था. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल जेल जाने से राहत दे दी है.
हालांकि, यह राहत एक शर्त के साथ मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को 5 करोड़ रुपये अपनी रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया है. मामला करीब 5 करोड़ रुपये के कर्ज और उससे जुड़े चेक बाउंस का है, जिसे लेकर अभिनेता की कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई थी.
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने ?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजपाल यादव की ओर से दायर सात विशेष अनुमति याचिकाओं पर नोटिस जारी किया. ये सभी मामले नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत चेक बाउंस से जुड़े हैं. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल रहे. अदालत ने अभिनेता को निर्देश दिया कि वह 9 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करें. इस शर्त के साथ उन्हें फिलहाल जेल में सरेंडर करने से राहत मिल गई है.
क्यों हुई तीन महीने की सजा?
दरअसल, जुलाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को इन सात मामलों में तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने प्रत्येक मामले में तीन महीने की सजा का आदेश दिया था और अभिनेता को 10 सितंबर तक जेल में सरेंडर करने को कहा था. यह मामला दिल्ली की कंपनी Murli Projects Pvt Ltd से जुड़े वित्तीय विवाद का है. कंपनी ने राजपाल यादव की कंपनी Shree Naurang Godavari Entertainment के खिलाफ चेक बाउंस के मामले दर्ज कराए थे.
क्यों लिया था कर्ज?
पूरा विवाद करीब 5 करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़ा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजपाल यादव ने वर्ष 2010 में अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए यह रकम ली थी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और कर्ज की रकम वापस करने में विवाद खड़ा हो गया. इसके बाद कर्ज देने वाली कंपनी ने भुगतान के लिए दिए गए चेक बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई शुरू की. अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से राजपाल यादव को तत्काल जेल जाने से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.




