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बिहार में कहां से हैं Pankaj Tripathi, कितने भाई-बहन और कैसा है घर-परिवार, अब बड़े भाई पर क्यों हुआ हमला?

बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई बिजेंद्र तिवारी पर बिहार के गोपालगंज जिले में कथित तौर पर लाठी-डंडों से हमला किया गया. जमीन विवाद से जुड़े इस मामले में एक आरोपी गिरफ्तार किया गया है, जबकि घायल बिजेंद्र तिवारी का इलाज पटना में चल रहा है.

पंकज त्रिपाठी के भाई पर हमला
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पंकज त्रिपाठी के भाई पर हमला
( Image Source:  X: @smaurya_journo, IMDB )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय6 Mins Read

Updated on: 22 Jun 2026 12:55 PM IST

बॉलीवुड स्टार और नेशनल फिल्म अवार्ड विजेता पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) को आज कौन नहीं जानता. अपनी सादगी और बेहतरीन अदाकारी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी अक्सर अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए सुर्खियों में रहते हैं. लेकिन इस बार उनके परिवार से एक बेहद चौंकाने वाली वाली खबर सामने आ रही है. बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित अभिनेता के पैतृक गांव बेलसंड में उनके बड़े भाई बिजेंद्र तिवारी पर कुछ लोगों ने लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया. यह घटना रविवार की है, जिसके पीछे जमीन से जुड़ा एक पुराना विवाद बताया जा रहा है. इस अचानक हुए हमले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है. गंभीर रूप से घायल विजेंद्रनाथ को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत को देखते हुए उन्हें पटना रेफर किया गया है.

जमीन विवाद में लहूलुहान हुए भाई

यह पूरी वारदात गोपालगंज जिले के बरौली कस्बे के बेलसंड गांव की है. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को जमीन से जुड़े एक मसले को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि विरोधी पक्ष ने लाठियों और डंडों से बिजेंद्र तिवारी पर हमला बोल दिया. हमले के बाद चीख-पुकार मच गई और आरोपी मौके से फरार हो गए. लहूलुहान हालत में तिवारी को देर रात गोपालगंज के मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर और आगे के इलाज के लिए उन्हें पटना के एक बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया है. फिलहाल डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है. इस घटना के बाद पंकज त्रिपाठी के परिवार में सन्नाटा पसरा हुआ है. हालांकि, नेशनल फिल्म अवार्ड विनर एक्टर के परिवार ने अब तक इस संवेदनशील मामले पर मीडिया के सामने आकर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया है.

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: एक आरोपी गिरफ्तार

मामला हाई-प्रोफाइल परिवार से जुड़ा होने के कारण स्थानीय पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई. गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी ने बताया कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक को दबोच लिया है. पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी का बयान, 'गिरफ्तार आरोपी की पहचान कर ली गई है और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है. हालांकि, पीड़ित परिवार की ओर से अभी तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. जैसे ही हमें परिवार की तरफ से औपचारिक शिकायत मिलती है, पुलिस आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगी.'

क्या करते हैं पंकज त्रिपाठी के भाई?

जहां एक तरफ पंकज त्रिपाठी मायानगरी मुंबई में अपनी अदाकारी का लोहा मनवा रहे हैं, वहीं उनके सबसे बड़े भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी मीडिया की चकाचौंध और ग्लैमर से कोसों दूर रहते हैं. अपने छोटे भाई की अपार सफलता और मुंबई में सेटल होने के तमाम मौकों के बावजूद, बिजेंद्र ने एक बिल्कुल अलग और सादगी भरा रास्ता चुना. वह आज भी अपने पैतृक गांव बेलसंड में एक साधारण किसान का जीवन जी रहे हैं. उन्होंने मिट्टी से जुड़े रहने और खेती-किसानी को ही अपनी जिंदगी का मकसद बनाया. वही ग्रामीण जिंदगी और परिवेश, जिसे पीछे छोड़कर पंकज त्रिपाठी कभी संघर्ष करने मुंबई आए थे. बता दें कि पंकज त्रिपाठी कुल 6 भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं.

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क्यों नहीं छोड़ा पैतृक गांव?

अक्सर देखा जाता है कि घर का एक सदस्य कामयाब हो जाए तो पूरा परिवार शहरों का रुख कर लेता है. लेकिन बिजेंद्र तिवारी के मामले में ऐसा नहीं हुआ. उनके पास मुंबई में ऐशो-आराम की जिंदगी जीने का विकल्प हमेशा खुला था, पर उन्होंने गांव में ही रुकने का फैसला किया. इसके पीछे एक बेहद इमोशनल और पारिवारिक वजह थी. पंकज और बिजेंद्र के दिवंगत पिता, पंडित बनारस तिवारी, गांव के एक प्रतिष्ठित किसान और पुरोहित थे. पूरा परिवार मूल रूप से किसानी और पूजा-पाठ से जुड़ा रहा है. बिजेंद्र का अपनी मिट्टी और माता-पिता से जुड़ाव इतना गहरा था कि उन्होंने गांव में रहकर ही अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करने और परिवार की पैतृक संपत्ति व खेती को संभालने की जिम्मेदारी उठाई. वह अपने माता-पिता की ढाल बनकर आखिरी समय तक गांव में जमे रहे.

'पंडित बनारस तिवारी फाउंडेशन'

पंकज त्रिपाठी ने खुद अपने कई इंटरव्यूज में गर्व से इस बात का जिक्र किया है कि उनका परिवार कितना जमीन से जुड़ा हुआ है. उन्होंने बताया था कि उनके भाई बिजेंद्र को फिल्मी दुनिय में रत्ती भर की भी दिलचस्पी नहीं है. वह गांव के लोगों के सुख-दुख में शामिल होना और उनकी मदद करना ज्यादा पसंद करते हैं. दोनों भाइयों ने मिलकर अपने माता-पिता के सम्मान में 'पंडित बनारस तिवारी फाउंडेशन ट्रस्ट' की स्थापना की है. यह फाउंडेशन पूरी तरह से ग्रामीण विकास और सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित है. इस ट्रस्ट के माध्यम से बिजेंद्र गांव में रहकर जमीनी स्तर पर काम संभालते हैं. दोनों भाइयों ने मिलकर गांव के सरकारी स्कूल की सूरत बदली, पूरे गांव में सोलर लाइट्स लगवाईं और बुनियादी ढांचे की मरम्मत जैसे कई सराहनीय काम किए हैं.

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