जहां भी मरूं वहीं गाड़ देना... अपने साथ हर समय कफन रखते हैं सिंगर लकी अली, फैंस को क्यों किया भावुक?
एक कॉन्सर्ट के दौरान लकी अली ने फैंस से मौत के बारे में बात करते हुए कहा कि एक दिन उन्हें जाना ही है. उन्होंने कहा कि भले ही वह अपने फैंस को इसके लिए तैयार नहीं कर रहे थे, लेकिन वह खुद इसके लिए 'तैयार' थे.
सिंगर लकी अली ने हाल ही में एक कॉन्सर्ट में अपने फैंस को इमोश्नल कर दिया. वह दर्शकों से बात करते हुए खुद भी भावुक हो गए. लकी ने इस वाक्ये का वीडियो अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया, जिसमें कॉन्सर्ट के दौरान उन्होंने अपने फैंस से कहा कि वे उनसे प्यार तो करते हैं, लेकिन उन्हें पता है कि एक दिन उन्हें जाना होगा.
उन्होंने कहा, 'मुझे पता है, मैं भी आप सभी से प्यार करता हूं. एक दिन मुझे जाना ही है, है ना? मैं आपको इसके लिए तैयार नहीं कर रहा हूं, लेकिन असल में मैं तैयार हूं.' इसके साथ ही उन्होंने बताया, जब भी वह यात्रा करते हैं, तो अपने साथ कफन (जिसे 'एहराम' कहा जाता है) ले जाते हैं.
उन्होंने कहा, 'जब भी मैं यात्रा करता हूं, तो अपने साथ एहराम ले जाता हूं, जो मेरा कफन है. जहां भी मरूं, मुझे वहीं गाड़ देना.' वीडियो में एक फैन ने लकी के लिए दर्शकों के गहरे लगाव को जाहिर करते हुए कहा, "अब 30 साल हो गए हैं, मैंने लकी का साथ नहीं छोड़ा.'
ये गाने हुए मशहूर
उनका मशहूर गाना 'ओ सनम', 3 जून 1996 को रिलीज हुए उनके पहले सोलो एल्बम 'सुनो' का मुख्य गाना था और इसे बहुत ज्यादा लोकप्रियता मिली. बॉलीवुड एक्टर महमूद अली और महेलका के घर जन्मे लकी अली 1990 के दशक में भारतीय इंडिपॉप सीन में एक अहम हस्ती बनकर उभरे.
'गोरी तेरी आंखें कहें', 'तेरी याद जब आती है' जैसे हिट गानों और 'ना तुम जानो ना हम', 'हैरत', 'एक पल का जीना', 'आहिस्ता आहिस्ता' और 'सफरनामा' जैसे बॉलीवुड ट्रैक के लिए जाने जाने वाले अली अपने खास भावपूर्ण अंदाज से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते रहते हैं.
संगीत को बनाया करियर
कुछ समय पहले लकी ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैं करियर बनाने से पहले एक वेला था. किसी काम का नहीं था, संगीतकार बनने से पहले भी मैं यही था. नौकरी नहीं कर पाया क्योंकि मैं नौकरी के लिए बना ही नहीं था’ वह आगे कहते हैं, ‘मैं और भी बहुत कुछ था. मैंने खेती और पशुपालन सीखा, लेकिन पिता (महमूद) को लगा कि मुझे फिल्मों में अभिनय करना चाहिए. उनके कहने पर मैंने कुछ फिल्में कीं. मैंने ‘कांटे’ और ‘सुर’ में काम किया. फिर, मैं धीरे-धीरे मैं इसमें असहज महसूस करने लगा मैंने सोच-समझकर फैसला किया कि यह काम नहीं करना है. मैंने संगीत को अपना करियर बनाया.’




