Oscar 2026 में चमकी ईरानी डॉक्यूमेंट्री Cutting Through Rocks, लेकिन ट्रैवल बैन और इंटरनेट ब्लैकआउट से अधूरा रह गया जश्न
ऑस्कर 2026 में ईरान की डॉक्यूमेंट्री 'कटिंग थ्रू रॉक्स' को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर के लिए नॉमिनेशन मिला, जो देश के लिए ऐतिहासिक पल है. हालांकि ट्रैवल बैन और ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण फिल्म की टीम यह खुशी अपने देश और फिल्म की नायिका सारा शाहवर्दी के साथ साझा नहीं कर सकी.
Cutting Through Rocks : इस साल का ऑस्कर अवॉर्ड्स हॉलीवुड की सबसे चमक-दमक वाली और ग्लैमरस रातों में से एक था. जहां इस अवार्ड को जीतने वाले जश्न में डूबे रहे वहीं ईरान में इस अवार्ड में नोनिमशन पाने के बाद सन्नाटा छाया रहा. इस चमक के बीच एक ईरानी डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'कटिंग थ्रू रॉक्स' (Cutting Through Rocks) की टीम के लिए यह पल बहुत खास था साथ ही बहुत दर्द भरा भी. यह फिल्म ऑस्कर में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर कैटेगरी में नॉमिनेट हुई है. यह ईरान की पहली ऐसी डॉक्यूमेंट्री फिल्म है जो सीधे ईरानी समाज की असल कहानी दिखाती है और ऑस्कर में नॉमिनेशन पा चुकी है. यह एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक अचीवमेंट है. फिल्म को बनाने में करीब 8 साल लगे लगभग एक दशक तक शूटिंग, एडिटिंग और दुनिया भर के लोगों तक इस कहानी को पहुंचाने की कोशिश चली.
'द स्टेटमेंट्स' के मुताबिक, फिल्म के को-डायरेक्टर मोहम्मदरेज़ा ऐनी ने कहा कि ऑस्कर में नॉमिनेशन मिलना उनके लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी जैसा लगा. वे खुद को कोई राजनीतिक नेता नहीं मानते. वे तो बस कहानी सुनाने वाले लोग हैं, जो ईरान के आम लोगों की आवाज़ बनना चाहते हैं. वे ईरान के आम आदमी-औरत की जिंदगी, उनकी मुश्किलें और उनकी हिम्मत को दुनिया के सामने लाना चाहते हैं. लेकिन इस खुशी के बीच एक बहुत बड़ा दुख भी था.
इमोशनल हुई सारा शाहवर्दी
फिल्म की मुख्य किरदार सारा शाहवर्दी उस रात ऑस्कर इवेंट में नहीं आ पाईं. सारा एक बहुत बहादुर महिला हैं वे अपने गांव की पहली चुनी हुई महिला काउंसलर (पंचायत जैसी सदस्य) बनीं. उन्होंने लड़कियों को मोटरसाइकिल चलाना सिखाया, बाल विवाह रोकने की कोशिश की और पुरुषों के बनाए पुराने रिवाजों के खिलाफ आवाज़ उठाई. फिल्म उन्हीं की जिंदगी और संघर्ष की कहानी है.
क्यों नहीं आ पाई अमेरिका?
लेकिन अमेरिका में दिसंबर 2025 से लागू हुए एक नए ट्रैवल बैन की वजह से सारा अमेरिका नहीं आ सकीं. यह नियम ईरान समेत 12 देशों के नागरिकों को अमेरिका आने से रोकता है. फिल्ममेकर्स के लिए यह बहुत दर्दनाक था. को-डायरेक्टर सारा खाकी ने कहा कि सारा ठीक वैसे ही साहस और हिम्मत की मिसाल हैं, जिसकी तारीफ फिल्म करती है. इतने बड़े मौके पर उनकी कमी से खुशी अधूरी लग रही थी.
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दुख सबसे बड़ी वजह क्या?
यह बैन सिर्फ सारा पर ही नहीं पड़ा एक ट्यूनीशियाई फिल्म 'द वॉइस ऑफ हिंद रजब' के फिलिस्तीनी एक्टर मोताज़ मलहीस भी इसी वजह से ऑस्कर में नहीं आ पाए और दुख की एक और बड़ी वजह थी- ईरान में इंटरनेट पूरी तरह बंद हो गया था. इस साल की शुरुआत में ईरान में आर्थिक मुश्किलों और सरकार के खिलाफ गुस्से से बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया. इसका मतलब था कि लोग बाहर की दुनिया से पूरी तरह कट गए. इस ब्लैकआउट की दुनिया भर में बहुत आलोचना हुई और इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन कहा गया.
फिल्ममेकर्स के लिए बेहद तकलीफदेह
फिल्ममेकर्स के लिए यह सबसे तकलीफदेह था. वे अपनी इस बड़ी कामयाबी को अपने परिवार, दोस्तों और उन लोगों के साथ शेयर करना चाहते थे जिनकी कहानी फिल्म में है. लेकिन इंटरनेट बंद होने से वे सारा शाहवर्दी को या ईरान में बैठे अपने समर्थकों को एक भी फोटो या वीडियो नहीं भेज पाए. ऑस्कर की रात में वे अकेले महसूस कर रहे थे जैसे उनका जश्न किसी से शेयर ही नहीं हो पा रहा. आठ साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने सपना देखा था कि इस खुशी को ईरान के लोगों के साथ मनाएंगे, जो फिल्म की प्रेरणा हैं. लेकिन इंटरनेट के बंद होने से वह सपना टूट गया. वे उस समुदाय से कट गए जिसके लिए उन्होंने इतनी मेहनत की.




