कभी होली पर पानी तो कभी दीवाली पर पटाखे, पर्यावरण संकट पर पुरुषों को बताया जिम्मेदार, बार-बार विवादों में क्यों आ जाती हैं Dia Mirza?
दीया मिर्जा इन दिनों दीवाली पर पटाखे न जलाने के वीडियो को लेकर चर्चा में है. इससे पहले भी दीया ऐसे बयान दे चुकी हैं. दीया ने होली के दौरान पानी की बर्बादी के खिलाफ पोस्ट किया था.
एक्ट्रेस दीया मिर्जा एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं. इस बार मामला दिवाली पर पटाखे जलाने से जुड़ा है. दरअसल, मुंबई में प्रदूषण के खिलाफ चलाए गए जागरूकता अभियान में दीया ने लोगों से पटाखे कम जलाने की अपील की थी. कुछ बीजेपी नेताओं ने उनके वीडियो पर आपत्ति जताई, जिसके बाद BMC ने इसे हटा दिया. मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने बीजेपी नेताओं की टिप्पणियों पर सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और BMC को दीया का वीडियो दोबारा जारी करने का आदेश दिया.
दीया मिर्जा के लिए यह पहला मौका नहीं है, जब उनकी बात पर विवाद हुआ हो. साल 2016 में उन्होंने महाराष्ट्र में पानी की कमी को देखते हुए होली पर पानी बर्बाद न करने की सलाह दी थी. वहीं, जून 2026 में जलवायु परिवर्तन को लेकर पुरुषों की भूमिका पर दिए गए उनके बयान ने भी सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी थी.
होली पर पानी बचाने की सलाह
दीया मिर्जा पहले भी त्योहारों के दौरान पर्यावरण बचाने की बात कह चुकी हैं. साल 2016 में महाराष्ट्र के कई इलाकों में पानी की भारी कमी थी. इसी बीच उन्होंने होली पर लोगों से पानी कम खर्च करने की अपील की थी. उनका कहना था कि जब कई लोगों को पीने तक के लिए पानी नहीं मिल रहा है, तो रंग खेलने में इसे ज्यादा बहाना सही नहीं है. उन्होंने पानी की कमी से परेशान किसानों का भी जिक्र किया था. दीया की इस बात पर सोशल मीडिया पर खूब बहस हुई थी. कुछ लोगों ने उनकी सलाह को सही बताया, तो कुछ ने इसे होली के खिलाफ बताया. बढ़ते विरोध के बाद एक्ट्रेस ने अपनी बात साफ करते हुए कहा था कि वह किसी त्योहार या धर्म के खिलाफ नहीं हैं. उनकी अपील सिर्फ इतनी थी कि लोग पानी की कीमत समझें और इसे बेवजह बर्बाद न करें.
पुरुषों के कारण हो रहा क्लाइमेट चेंज
जून 2026 में दीया मिर्जा ने सोहा अली खान के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान पर्यावरण से जुड़ी एक बात कही थी. उन्होंने दुनिया में बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के लिए पुरुषों को जिम्मेदार ठहराया था. दीया का कहना था कि लंबे समय तक देश और दुनिया के बड़े फैसले लेने की ताकत पुरुषों के पास रही है. प्राकृतिक चीजों और संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े फैसले भी ज्यादातर उन्हीं ने लिए हैं. एक्ट्रेस ने इसी वजह से पर्यावरण की बिगड़ती हालत को पुरुषों के दबदबे वाली सोच से जोड़ा था. उनकी इस बात पर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई. कुछ यूजर्स ने कहा कि उन्होंने सभी पुरुषों को एक साथ गलत ठहराया है, जबकि कुछ लोगों का मानना था कि दीया किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस पुरानी व्यवस्था की बात कर रही थीं.
नर्मदा बांध प्रोजेक्ट के विरोध में भी आई थीं सामने
साल 2006 में दीया मिर्जा ने नर्मदा नदी पर बन रहे सरदार सरोवर बांध को लेकर अपनी बात रखी थी. उस समय इस बांध की वजह से कई परिवारों को अपने घर और जमीन छोड़नी पड़ रही थी. एक्टर आमिर खान भी इन परिवारों को दूसरी जगह बसाने और उनके हक की बात उठा रहे थे. दीया ने भी उनका साथ दिया था. उनका कहना था कि किसी भी बड़ी योजना को पूरा करते समय उन लोगों की परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जिनकी जिंदगी और घर उससे प्रभावित होते हैं. एक्ट्रेस की इस राय का गुजरात में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था. इसके बाद वह एक बार फिर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई थीं.
UCC पर क्या बोली थीं दीया?
UCC यानी समान नागरिक संहिता को लेकर भी दीया मिर्जा की आलोचना हुई थी. कुछ राजनीतिक नेताओं और दूसरे लोगों का आरोप रहा है कि एक्ट्रेस देश में होने वाले कई बड़े बदलावों और UCC के पक्ष में नहीं हैं. इसी वजह से सोशल मीडिया पर कई बार उन्हें निशाना बनाया गया. कुछ यूजर्स ने उन पर चुनिंदा मुद्दों पर ही अपनी बात रखने का आरोप लगाते हुए उन्हें 'सिलेक्टिव एजेंडा' चलाने वाली एक्ट्रेस तक कह दिया.




