Bhabiji Ghar Par Hain: टीवी पर हिट थिएटर में डिजास्टर, जानें फिल्म के फ्लॉप होने की ये बड़ी वजह
6 फरवरी 2026 को रिलीज हुई ‘भाभीजी घर पर हैं’ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई. 8-10 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ने सिर्फ 1.37 करोड़ की नेट कमाई की.
Bhabiji Ghar Par Hain: Fun on the Run: फिल्म 'भाभीजी घर पर हैं' एक हिंदी कॉमेडी फिल्म है, जो बहुत मशहूर टीवी सीरियल 'भाभीजी घर पर हैं' पर बेस्ड है. इसमें आसिफ शेख, रोहिताश्व गौर, शुभांगी अत्रे, विदिशा श्रीवास्तव, रवि किशन, मुकेश तिवारी और दिनेश लाल यादव जैसे कलाकारों ने काम किया है. यह फिल्म 6 फरवरी 2026 को थिएटर्स में रिलीज हुई थी. लेकिन अफसोस की बात है कि फिल्म को लगभग कोई प्रमोशन या प्रचार नहीं मिला. रिलीज के समय भी कोई खास हंगामा नहीं था.
फिल्म की शुरुआत बहुत कमजोर रही. पहले दिन यानी ओपनिंग डे पर इसने भारत में सिर्फ 20 लाख रुपये की कमाई की. उम्मीद थी कि शायद वर्ड ऑफ माउथ से कलेक्शन बढ़ेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. दर्शकों और क्रिटिक्स से मिली प्रतिक्रिया ज्यादातर निगेटिव रही. लोग कह रहे थे कि टीवी वाला मजा बड़े पर्दे पर नहीं आया. कॉमेडी फीकी लगी और हंसी नहीं आई. इस वजह से फिल्म आगे भी नहीं चल पाई.
कितना रहा नेट कलेक्शन?
हर दिन कलेक्शन बहुत कम रहता गया. पहले हफ्ते में यह करीब 1.35 करोड़ तक पहुंची, लेकिन उसके बाद और भी गिरावट आई. अंत में, जब फिल्म का रन खत्म हुआ, तो भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इसकी नेट कलेक्शन सिर्फ 1.37 करोड़ रुपये रही. अगर ग्रॉस कमाई देखें तो यह लगभग 1.61 करोड़ रुपये के आसपास थी.
कमजोर बजट
फिल्म का बजट करीब 8 से 10 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. इतने कम कलेक्शन से फिल्म ने अपना बजट भी नहीं निकाला और बुरी तरह फ्लॉप हो गई. यह टीवी सीरियल की लोकप्रियता का फायदा उठाने की कोशिश थी, लेकिन बड़े पर्दे पर वह जादू दोहराने में पूरी तरह नाकाम रही. 'भाभीजी घर पर हैं' एक टीवी शो के लिए भले ही मशहूर हो लेकिन फिल्म के मामले यह फ्लॉप रही.
'भाभीजी घर पर हैं' फिल्म की कहानी
कहानी कानपुर की मॉडर्न कॉलोनी से शुरू होती है, जहां हमारे पुराने जाने-पहचाने पड़ोसी रहते हैं विभूति नारायण मिश्रा (आसिफ शेख) अपनी पत्नी अनीता (विदिशा श्रीवास्तव) के साथ, और उनके पड़ोसी मनमोहन तिवारी (रोहिताश्व गौर) अपनी पत्नी अंगूरी (शुभांगी अत्रे) के साथ. जैसा कि सीरियल में होता है, विभूति को अंगूरी पसंद है और तिवारी को अनीता, लेकिन दोनों एक-दूसरे से ये बात छुपाते हैं. अब फिल्म में ट्विस्ट ये आता है कि विभूति अंगूरी को लेकर उत्तराखंड की एक धार्मिक यात्रा (मनौती पूरी करने) पर निकलता है. रास्ते में उनकी मुलाकात दो अजीबोगरीब और खतरनाक भाइयों से होती है- शांति (रवि किशन) और क्रांति (मुकेश तिवारी). ये दोनों भाई गैंगस्टर टाइप के हैं. शांति को अंगूरी पर पहली नजर में ही प्यार हो जाता है. वो अंगूरी से जबरदस्ती शादी करना चाहता है. इधर, विभूति और अंगूरी को बचाने के लिए तिवारी और अनीता भी पीछे-पीछे आते हैं. क्रांति को अनीता देखते ही पसंद आ जाती है, और वो भी अनीता से शादी का प्लान बना लेता है. अब दोनों भाई विभूति और तिवारी को मारने या हटाने की कोशिश करते हैं, ताकि भाभियों से जबरन शादी कर लें.
पूरी फिल्म इसी भागदौड़, छुपने-छिपाने, गलतफहमियों और ढेर सारी कॉमेडी सिचुएशन्स में निकल जाती है. रोड ट्रिप के दौरान ढेर सारे मज़ेदार हादसे होते हैं कार की समस्या, गलत रास्ते, लोकल गुंडों से पंगा, और थोड़ा-सा हॉरर ट्विस्ट भी. फिल्म में कुछ और किरदार भी आते हैं, जैसे दिनेश लाल यादव (निरहुआ), सानंद वर्मा, योगेश त्रिपाठी (हप्पू जी) आदि, जो और अफरा-तफरी मचाते हैं. कुल मिलाकर, कहानी टीवी सीरियल की तरह ही है पड़ोसियों की जलन, भाभियों पर लट्टू होना, ढेर सारा स्लैपस्टिक ह्यूमर, डबल मीनिंग जोक्स, टॉयलेट ह्यूमर और भागमभाग. लेकिन अब सब कुछ रोड ट्रिप और गैंगस्टर भाइयों के इर्द-गिर्द घूमता है, जिससे फिल्म ज्यादा शोर-शराबे वाली और लंबी हो गई है. फिल्म का मकसद बस वही पुराना मज़ा बड़े स्क्रीन पर दोहराना था, लेकिन ज्यादातर क्रिटिक्स ने कहा कि टीवी वाला जादू यहां पूरी तरह नहीं जमा.





