कौन हैं Rukmini Vasanth? कियारा-हुमा और नयनतारा के बाद Toxic से रिवील हुआ फर्स्ट लुक
यश की अपकमिंग पैन-इंडिया फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ से कन्नड़ एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत का फर्स्ट लुक सामने आ चुका है. फिल्म में वे मेलिसा के किरदार में नजर आएंगी, जिसका लुक रहस्यमय, स्ट्रॉन्ग और बेहद कॉन्फिडेंट दिख रहा है. 1960 के दशक की पार्टी बैकग्राउंड में सेट यह पोस्टर फैंस को खासा इंप्रेस कर रहा है. निर्देशक गीतु मोहनदास ने रुक्मिणी की इंटेलिजेंस और गहराई भरी एक्टिंग की खुलकर तारीफ की है.
Rukmini Vasanth Toxic Look: यश की अपकमिंग फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' (Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups) की अनाउंसमेंट के बाद से ही यह फिल्म काफी चर्चा में है. फिल्म के निर्माता लगातार उन एक्ट्रेस के फर्स्ट लुक पोस्टर जारी कर रहे हैं, जो इस फिल्म में बड़ी भूमिकाओं में नजर आने वाली हैं. हाल ही में, उन्होंने कन्नड़ एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत का दमदार और बेहद अट्रैक्टिव अवतार रिवील किया है. फिल्म में 'कांतारा 2' फेम रुक्मिणी वसंत मेलिसा नाम की किरदार निभा रही हैं. उनका फर्स्ट लुक पोस्टर देखकर फैंस काफी एक्साइटे हैं. निर्माताओं ने यश, नयनतारा, कियारा आडवाणी और रुक्मिणी वसंत के साथ मिलकर एक खास पोस्ट शेयर किया. पोस्ट के कैप्शन में लिखा था, 'बड़ों के लिए एक टॉक्सिक परी कथा में मेलिसा के रूप में रुक्मिणी वसंत का स्वागत है.'
पोस्टर की बैकग्राउंड 1960 के दशक के अंत की एक धुंधली पार्टी की है. इसमें मेलिसा पूरे कॉन्फिडेंस के साथ आगे बढ़ती दिख रही हैं. उनका चेहरा बहुत एक तेज और दृढ़ नजर आसपास के शोर को जैसे चीरती हुई जा रही है. लेकिन मेलिसा शांत और फोकस्ड हैं वे कमरे में ऐसे कदम रख रही हैं, जैसे पूरा माहौल उनके कंट्रोल में हो. यह लुक बहुत मिस्टीरियस और स्ट्रांग लग रहा है. इससे पहले कियारा आडवाणी (नादिया के रूप में), हुमा कुरैशी (एलिजाबेथ), नयनतारा (गंगा) और तारा सुतारिया (रेबेका) के शानदार फर्स्ट लुक जारी किए गए थे. अब रुक्मिणी वसंत के मेलिसा लुक के साथ फिल्म की दुनिया और भी रोचक और गहरी लग रही है.
तारीफ करते नहीं थक रही निर्देशक गीतु मोहनदास
निर्देशक गीतु मोहनदास ने रुक्मिणी वसंत की तारीफ करते हुए कहा, 'रुक्मिणी के बारे में मुझे सबसे ज्यादा पसंद आने वाली बात उनकी एक्ट्रेस के रूप में intelligence है. वे सिर्फ एक्टिंग नहीं करतीं, बल्कि हर चीज को गहराई से समझती और सोचती हैं. वे जिज्ञासा से सवाल पूछती हैं, शक से नहीं। इससे मुझे खुद निर्देशक के रूप में गहराई से सोचने की प्रेरणा मिलती है और कभी-कभी अपने फैसलों पर भी दोबारा विचार करने का मौका मिलता है.' गीतु ने आगे बताया, 'शूटिंग के दौरान मैं अक्सर उन्हें चुपचाप अपनी डायरी में नोट्स लिखते देखती हूं. वे सेट पर होने वाली छोटी-छोटी बातें और अपने विचार लिखती रहती हैं. यह उनकी वर्कस्टाइल को बहुत अच्छे से दिखाता है. वे लगातार अपनी इनर वर्ल्ड बना रही होती हैं. उनका नजरिया बहुत थॉटफुल है सच कहूं तो कई बार मन करता है कि उनकी उन डायरी के पन्नों को चुपके से पढ़ लूं, ताकि समझ सकूं कि इतनी शानदार एक्टिंग के पीछे क्या सोच चल रही है.'
फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' के बारे में
यह फिल्म यश और गीतु मोहनदास ने मिलकर लिखी है तथा गीतु मोहनदास ही इसे निर्देशित कर रही हैं. फिल्म की शूटिंग एक साथ कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा में हो रही है. इसके अलावा हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम और कई अन्य भाषाओं में डब करके रिलीज करने की योजना है. इससे फिल्म की ग्लोबली पहुंच काफी बड़ी होने वाली है. फिल्म में एक शानदार तकनीकी टीम काम कर रही है. इसमें नेशनल अवार्ड विनर छायाकार राजीव रवि, संगीतकार रवि बसूर, संपादक उज्ज्वल कुलकर्णी और प्रोडक्शन डिजाइनर टीपी आबिद जैसे नाम शामिल हैं. फिल्म 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में बड़े पैमाने पर रिलीज होगी. यह तारीख ईद, उगादी और गुड़ी पड़वा जैसे बड़े त्योहारों के लंबे वीकेंड से मेल खाती है, जिससे फिल्म को और भी बड़ा फायदा मिल सकता है.
कौन हैं रुक्मिणी वसंत?
रुक्मिणी ने फिल्मी करियर की शुरुआत 2019 में कन्नड़ फिल्म 'बिरबल' से की. असली ब्रेकथ्रू 2023 में 'सप्त सागरदाचे एल्लो' (साइड A और साइड B) से मिला, जहां उन्होंने प्रिया का रोल प्ले किया. रक्षित शेट्टी के साथ उनकी जोड़ी सराही गई, और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्ट्रेस - कन्नड़ मिला. उन्हें 'बानदारियल्ली' (2023), 'बघीरा और भैरथी रंगाल' (2024), तेलुगु डेब्यू 'अप्पुडो इप्पुडो एप्पुडो' (2024), तमिल में 'ऐस और मधरासी' (2025) 'कांतारा: चैप्टर 1' (2025) में रिशब शेट्टी के साथ, जो 2025 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक रही. रुक्मिणी 10 दिसंबर 1996 को बेंगलुरु में एक कन्नड़ परिवार में पैदा हुईं. उनके पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल भारतीय सेना के अधिकारी थे, जो कर्नाटक के पहले अशोक चक्र विजेता थे. वे 2007 में उरी (जम्मू-कश्मीर) में आतंकवादियों को रोकते हुए शहीद हो गए. उनकी मां सुभाषिनी वसंत एक प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं, जो शहीदों की विधवाओं की मदद के लिए वसंतरत्न फाउंडेशन चलाती हैं.





