Budget 2026: इलाज सस्ता होगा या इंतज़ार लंबा! ‘स्वस्थ भारत’ की ओर कितना बढ़ेगा हेल्थ बजट?
बजट 2026-27 से देश का हेल्थ सेक्टर बड़ी उम्मीदें लगाए बैठा है. पिछले बजट में मेडिकल एजुकेशन, कैंसर इलाज, सस्ती दवाओं और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को मजबूती मिली थी. जानिए बजट 2026 में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, मरीजों और मेडिकल इंडस्ट्री को क्या फायदा मिल सकता है.
1 फरवरी 2026 को जब केंद्रीय बजट पेश होगा, तो सिर्फ अर्थव्यवस्था ही नहीं, देश का पूरा हेल्थकेयर सिस्टम भी उसकी ओर टकटकी लगाए बैठा है. बीते कुछ वर्षों में महामारी, महंगाई और बढ़ते इलाज खर्च ने यह साफ कर दिया है कि मजबूत स्वास्थ्य ढांचा अब विकल्प नहीं, जरूरत है. ऐसे में बजट 2026-27 को ‘स्वस्थ भारत’ की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है, जहां आम मरीज से लेकर मेडिकल इंडस्ट्री तक सबको राहत की उम्मीद है.
पिछले साल के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की थी. निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए करीब 99,858 करोड़ रुपये का आवंटन किया, जो अपने आप में बड़ा संकेत था. मेडिकल एजुकेशन से लेकर कैंसर के इलाज और सस्ती दवाओं तक, कई मोर्चों पर ठोस फैसले लिए गए, जिनका असर अब जमीन पर दिखने लगा है.
किन चीजों पर होगा फोकस?
बजट 2025 में अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में 10,000 अतिरिक्त MBBS और PG सीटें जोड़ने का ऐलान हुआ था. इसके साथ ही मखाना बोर्ड जैसे क्षेत्रीय और पोषण आधारित कदमों ने भी ध्यान खींचा. सरकार का लक्ष्य साफ था. डॉक्टरों की कमी दूर करना और ग्रामीण व जिला स्तर पर इलाज की सुविधा मजबूत करना, ताकि मरीजों को बड़े शहरों की ओर न भागना पड़े.
कैंसर और गंभीर बीमारियों के लिए राहत
पिछले बजट में कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बड़ी राहत मिली. 36 जीवनरक्षक दवाओं को सीमा शुल्क से पूरी तरह मुक्त किया गया और अगले तीन साल में हर जिले में डे-केयर कैंसर सेंटर खोलने की योजना रखी गई. इससे साफ हुआ कि सरकार इलाज को सिर्फ उपलब्ध ही नहीं, बल्कि किफायती भी बनाना चाहती है.
बजट 2026-27 से क्या नई उम्मीदें?
इस साल हेल्थ सेक्टर की उम्मीदें और व्यापक हैं. इंडस्ट्री लीडर्स चाहते हैं कि बजट में डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को और गति दी जाए. ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को देखते हुए यह बजट लॉन्ग-टर्म विजन वाला हो जहां इलाज का खर्च कम हो और सेवाओं की पहुंच ज्यादा लोगों तक हो.
GST, मेडिकल डिवाइस और जेब पर बोझ
विशेषज्ञों की एक बड़ी मांग मेडिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक किट और जरूरी हेल्थ सेवाओं पर GST कम करने की है. तर्क यह है कि इससे इलाज की कुल लागत घटेगी और हेल्थ इंश्योरेंस को अपनाने वालों की संख्या बढ़ेगी. अगर बजट 2026 में इस दिशा में कदम उठता है, तो इसका सीधा फायदा मिडिल क्लास और लो-इनकम मरीजों को मिल सकता है.
प्राइमरी हेल्थकेयर और फार्मा सुधार
मेडिकल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मजबूत प्राइमरी हेल्थकेयर के बिना यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज अधूरा है. इसलिए अतिरिक्त फंडिंग, नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (जैसे डायबिटीज, हाई बीपी) की रोकथाम और निगरानी सिस्टम पर जोर जरूरी है. वहीं फार्मा इंडस्ट्री ड्रग टेस्टिंग लैब्स के नेशनल नेटवर्क और सख्त क्वालिटी कंट्रोल की मांग कर रही है, ताकि दवाओं की सुरक्षा और भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित हो सके.
क्रॉनिक बीमारियां और भविष्य की चुनौती
पिछले कुछ बजट में कैंसर, सर्वाइकल कैंसर वैक्सीनेशन और जीवनरक्षक दवाओं पर लगातार ध्यान दिया गया. अब उम्मीद है कि बजट 2026 में मोटापा, लाइफस्टाइल डिजीज और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ठोस नीति आए. खुद नरेंद्र मोदी कई मंचों से मोटापे को गंभीर समस्या बता चुके हैं. ऐसे में रोकथाम आधारित योजनाएं इस बजट की बड़ी पहचान बन सकती हैं.
FAQ: बजट 2026-27 और हेल्थ सेक्टर
Q1. बजट 2026 में हेल्थ सेक्टर को कितना आवंटन मिल सकता है?
विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आवंटन में बढ़ोतरी होगी, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइमरी हेल्थकेयर के लिए.
Q2. क्या इलाज सस्ता होने की उम्मीद है?
अगर मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक सेवाओं पर GST घटता है, तो इलाज की लागत कम हो सकती है.
Q3. कैंसर और गंभीर बीमारियों पर क्या नया हो सकता है?
डे-केयर कैंसर सेंटर, दवाओं पर छूट और स्क्रीनिंग प्रोग्राम के विस्तार की संभावना है.
Q4. आम मरीज को सबसे बड़ा फायदा क्या मिलेगा?
बेहतर सरकारी अस्पताल, सस्ती दवाएं, डिजिटल हेल्थ सेवाएं और गांव-जिले स्तर पर इलाज की आसान पहुंच.
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 से उम्मीद है कि यह सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि ‘स्वस्थ भारत’ की ठोस रोडमैप साबित होगा.





