Sasta-Mehnga: क्या चुनाव के बाद 25 रुपए तक बढ़ जाएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? रिपोर्ट में कितना दम
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपये बढ़ोतरी की खबरों को सरकार ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. मंत्रालय ने कहा कि ऐसी अफवाहें भ्रामक हैं और आम जनता को गुमराह करने के लिए फैलाई जा रही हैं.
सरकार ने गुरुवार को उन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. सरकार ने साफ-साफ कहा कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव अभी विचाराधीन नहीं है और न ही भविष्य में ऐसा कोई फैसला लेने की कोई योजना है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स हैंडल पर एक आधिकारिक पोस्ट जारी करके कहा, 'पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कई अफवाहें फैलाई जा रही हैं. हम स्पष्ट रूप से बताना चाहते हैं कि सरकार की तरफ से ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.'
यह आधिकारिक स्पष्टीकरण कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज नामक एक वित्तीय संस्था की रिपोर्ट के बाद सामने आया है. उस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि पश्चिम बंगाल समेत कुछ राज्यों में 29 अप्रैल को विधानसभा चुनावों के मतदान खत्म होने के तुरंत बाद पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर कच्चे तेल की कीमत 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हो सकती है.
क्या कहा सरकार ने?
मंत्रालय ने इन रिपोर्टों को 'नागरिकों के बीच अनावश्यक डर और दहशत फैलाने वाली शरारती और भ्रामक खबरें' बताया है. मंत्रालय ने आगे कहा कि वास्तव में भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. सरकार और देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी आने के बावजूद आम भारतीय नागरिकों को महंगाई से बचाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं.
ईरान तनाव और क्रूड ऑयल कीमतों में उछाल
बात करें हाल की घटनाओं की, तो 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की. इसके चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर पड़ा और वहां तेल का परिवहन लगभग बंद हो गया. होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को बाकी दुनिया से जोड़ने वाला मुख्य रास्ता है, जो वैश्विक तेल व्यापार का करीब एक पांचवां हिस्सा संभालता है. ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें पहले 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं, जो बाद में बढ़कर 119 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं. हालांकि कुछ समय बाद कीमतों में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन फिर से शुरू हुए तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड (दुनिया का सबसे प्रसिद्ध तेल मानक) की कीमत 103 से 106 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई.
क्या बढ़ी है कीमतें?
कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़ोतरी होने के बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं. अभी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर है. सरकार का कहना है कि आम लोगों को किसी भी प्रकार की महंगाई का बोझ नहीं उठाना पड़े, इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं.




