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RAC में 2 यात्रियों को 1 सीट मिली, तो क्या सिंगल कंबल करना होगा शेयर? जानें रेलवे की हरकत पर कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला

क्या RAC टिकट पर दो यात्रियों को एक ही कंबल शेयर करना पड़ सकता है? दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की इस हरकत पर क्या फैसला सुनाया है, जानें डिटेल

RAC में 2 यात्रियों को 1 सीट मिली, तो क्या सिंगल कंबल करना होगा शेयर? जानें रेलवे की हरकत पर कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला
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दिल्ली उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (Delhi Consumer Disputes Redressal Commission) ने RAC टिकट पर यात्रा कर रहे एक यात्री को पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध नहीं कराने के मामले में रेलवे को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है. आयोग ने रेलवे को मानसिक उत्पीड़न और शारीरिक असुविधा के लिए 20 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के लिए 5 हजार रुपये, यानी कुल 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया है.

आयोग की अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव और सदस्य राजेंद्र धर तथा ऋतु गरोड़िया की पीठ ने कहा कि वर्ष 2009 में जारी रेलवे के सरकारी सर्कुलर में साफ तौर पर कहा गया है कि RAC यात्रियों को भी कंबल और बेडशीट उपलब्ध कराई जा सकती है, क्योंकि उनके किराए में बेडरोल का शुल्क शामिल होता है,

आयोग ने रेलवे की कार्रवाई पर क्या कहा?

आयोग ने 10 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि रेलवे ने दो ऐसे यात्रियों को, जो एक-दूसरे से बिल्कुल परिचित नहीं थे, केवल एक कंबल देकर 23 सितंबर 2009 के सर्कुलर का उल्लंघन किया. आयोग ने कहा कि बाद में रेलवे ने लिनेन उपलब्ध कराने वाली ठेका कंपनी पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन इसकी जानकारी शिकायतकर्ता को नहीं दी गई और न ही उसे किसी तरह का मुआवजा दिया गया.

आयोग ने यह भी कहा कि रेलवे ने अपने जवाब में इस जुर्माने का कोई उल्लेख नहीं किया. आदेश में कहा गया कि रेलवे यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज भी पेश नहीं कर सका कि शिकायतकर्ता को अलग से बेडरोल उपलब्ध कराया गया था. इसी आधार पर आयोग ने रेलवे को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 20 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया.

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता ने 25 अक्टूबर 2022 को प्रयागराज से दिल्ली जाने के लिए टिकट बुक कराया था. उसकी यात्रा की तारीख 28 अक्टूबर 2022 थी. यात्री का कहना था कि उसकी RAC टिकट थी, इसलिए उसे एक अन्य व्यक्ति के साथ एक ही सीट साझा करनी पड़ी. उसने आरोप लगाया कि पूरे सफर के दौरान दोनों यात्रियों को केवल एक कंबल, एक तकिया और दो बेडशीट दी गईं. यात्री के मुताबिक, दो अजनबियों के बीच एक ही कंबल साझा करना बेहद असुविधाजनक था और पूरी यात्रा करना मुश्किल हो गया. उसने यह भी आरोप लगाया कि किसी भी यात्री को नैपकिन नहीं दिया गया.

अटेंडेंट से मांगा अलग कंबल और तकिया?

शिकायतकर्ता ने यात्रा के दौरान अटेंडेंट से अलग कंबल और तकिया देने की मांग की. उसके अनुसार, अटेंडेंट ने जवाब दिया कि रेलवे के नियमों के मुताबिक एक सीट पर केवल एक कंबल, एक तकिया और दो बेडशीट ही दी जाती हैं.

सोशल मीडिया पर भी की शिकायत?

यात्री ने यात्रा के दौरान ट्विटर (अब X) पर रेलवे से शिकायत की. रेलवे सेवा की ओर से उसे अपना PNR नंबर साझा करने के लिए कहा गया. शिकायतकर्ता ने सभी जानकारी उपलब्ध कराई, जिसके बाद अटेंडेंट ने उसे केवल एक तौलिया दिया. उसका आरोप है कि इसके बावजूद उसे अलग कंबल, बेडशीट या तकिया उपलब्ध नहीं कराया गया.

TTE ने शिकायत पुस्तिका देने से किया इनकार?

शिकायतकर्ता ने यात्रा के दौरान टीटीई (Travelling Ticket Examiner) से शिकायत पुस्तिका मांगी, लेकिन उसके अनुसार टीटीई ने शिकायत पुस्तिका देने से इनकार कर दिया. बाद में उसे ट्विटर पर रेलवे की ओर से संदेश मिला कि उसकी शिकायत का समाधान प्रयागराज के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) करेंगे. यात्री ने 29 अक्टूबर 2022 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लिखित शिकायत भी दर्ज कराई.

करीब छह महीने बाद उसे एक पत्र मिला, जिसमें बताया गया कि उसकी शिकायत DRM, प्रयागराज (ALD) को भेज दी गई है. शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी कई सवाल पूछे, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग में 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग करते हुए शिकायत दायर की.

रेलवे ने क्या दलील दी?

नॉर्दर्न रेलवे ने आयोग के सामने कहा कि यह मामला दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. रेलवे का कहना था कि यात्रियों को नियमों के अनुसार बेडरोल उपलब्ध कराया जाता है. रेलवे ने यह भी कहा कि अतिरिक्त कंबल मांग, आवश्यकता और यात्रा के दौरान उपलब्धता के आधार पर दिया जाता है. उसने यह भी बताया कि इस मामले की जांच संबंधित रेलवे, यानी उत्तर मध्य रेलवे (एनसी रेलवे), इलाहाबाद द्वारा की जा रही है. रेलवे ने कहा कि ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं के लिए अलग ठेका कंपनी नियुक्त की जाती है, जो यात्रियों को बेडरोल उपलब्ध कराती है.

आयोग ने रेलवे की दलील क्यों खारिज की?

आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता दिल्ली में रहता है, इसलिए यह मामला आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है. आयोग ने माना कि दोनों पक्ष इस बात से सहमत हैं कि शिकायतकर्ता ने प्रयागराज से दिल्ली तक RAC टिकट पर यात्रा की और एक अजनबी यात्री के साथ बर्थ साझा की. यह भी स्वीकार किया गया कि दोनों यात्रियों को केवल एक तकिया और एक कंबल दिया गया था. आयोग ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता ने टीटीई और रेलवे मंत्रालय, दोनों से शिकायत की थी और उसे जवाब मिला था कि उसकी शिकायत पर कार्रवाई की गई है.

रेलवे की आंतरिक रिपोर्ट में क्या सामने आया?

आयोग ने कहा कि रेलवे की आंतरिक रिपोर्ट से पता चलता है कि लिनेन उपलब्ध कराने वाली ठेका कंपनी पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था. रिपोर्ट में यह भी दर्ज था कि शिकायतकर्ता को अलग बेडरोल उपलब्ध कराया गया था, लेकिन शिकायतकर्ता ने इस दावे का सख्ती से खंडन किया. आयोग ने कहा कि रेलवे इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण पेश नहीं कर सका.

कब होगा आदेश का पालन?

आयोग ने रेलवे को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न और शारीरिक असुविधा के लिए 20 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के लिए 5 हजार रुपये का भुगतान करे. आयोग ने कहा कि इस आदेश का पालन 60 दिनों के भीतर किया जाए. यदि तय समय के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो आदेश की तारीख से भुगतान होने तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.

क्या RAC में मिलते हैं दो कंबल?

आयोग के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि जब रेलवे बोर्ड के नियमों में कहा गया है कि एसी श्रेणी (एसी चेयर कार को छोड़कर) में RAC यात्रियों से बेडरोल का शुल्क किराए के साथ लिया जाता है और उन्हें कंबल व बेडशीट उपलब्ध कराई जानी चाहिए, तो ऐसी सुविधा नहीं देना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना जा सकता है.

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