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इधर CJP ने दी सरकार को आंदोलन की वार्निंग उधर जंतर-मंतर पर खड़ी हो गई 'लोहे की दीवारें', क्या फिर से GenZ करेंगे हंगामा?

CJP के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं होने पर दोबारा बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है. इसी बीच जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग मजबूत की जा रही है.

इधर CJP ने दी सरकार को आंदोलन की वार्निंग उधर जंतर-मंतर पर खड़ी हो गई लोहे की दीवारें, क्या फिर से GenZ करेंगे हंगामा?
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी8 Mins Read

Published on: 29 July 2026 10:07 PM

NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों के आंदोलन का चेहरा बने Cockroach Janta Party (CJP) ने एक बार फिर सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी है. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली गईं और उनका कथित उत्पीड़न जारी रहा तो संगठन दोबारा सड़कों पर उतर सकता है. उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो अगला प्रदर्शन पहले से भी बड़ा होगा.

दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है जब लोकसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पास किया गया है. सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों के जरिए सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों पर लगाम लगाने की कोशिश की जाएगी. हालांकि, CJP का कहना है कि केवल कानून में बदलाव से छात्रों की समस्या खत्म नहीं होगी. संगठन ने छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई है.

FIR वापस नहीं हुई तो फिर सड़कों पर उतरेंगे छात्र?

CJP के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली गईं तो उनका संगठन अपना आंदोलन जारी रखेगा. उनके मुताबिक, छात्रों के बीच नाराजगी अभी खत्म नहीं हुई है.दीपके ने कहा कि यदि छात्रों को इसी तरह परेशान किया जाता रहा तो दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर यह आंदोलन पिछले प्रदर्शन से भी बड़ा हो सकता है. उनका कहना है कि सरकार को यह समझना होगा कि छात्रों और आम लोगों के बीच पैदा हुआ गुस्सा अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है.

क्या धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे से खत्म हो गया छात्रों का गुस्सा?

CJP की ओर से यह भी कहा गया कि सरकार को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों और लोगों का गुस्सा खत्म हो गया है.दीपके के मुताबिक, मंत्री का इस्तीफा इस पूरे विवाद का अंतिम समाधान नहीं है. जब तक छात्रों से जुड़े मामलों और FIR को लेकर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन की संभावना बनी रहेगी. CJP का मुख्य जोर इस बात पर है कि जिन छात्रों के खिलाफ प्रदर्शन या पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले दर्ज हुए हैं, उनके मामलों की समीक्षा की जाए और जहां उचित हो वहां FIR वापस ली जाएं.

पेपर लीक पर लोकसभा में पास हुआ नया बिल

इसी बीच लोकसभा ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया. इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों को रोकने के लिए व्यवस्था को और सख्त करना है. यह विधेयक ऐसे समय आया है जब NEET-UG पेपर लीक विवाद ने देशभर में परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की सुरक्षा और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं. हालांकि, विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट के बीच इसे पारित किया गया. सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर की गई टिप्पणी पर भी विवाद देखने को मिला.

CJP ने कहा- सिर्फ कानून बनाने से नहीं बदलेगी व्यवस्था

अभिजीत डिपके ने नए कानून को लेकर कहा कि देश में कई सुधार किए गए हैं, लेकिन केवल नियम और कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा. उनके अनुसार व्यवस्था में सुधार के साथ लोगों की नीयत और जवाबदेही में भी बदलाव जरूरी है. CJP का तर्क है कि पेपर लीक रोकने के लिए कानून को मजबूत करने के साथ-साथ उन मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिनमें छात्रों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है.

फास्ट-ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई पर भी CJP ने उठाया सवाल

पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए फास्ट-ट्रैक कोर्ट को लेकर भी अभिजीत डिपके ने सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक मामलों की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में पहली सुनवाई ही CBI के वकील के मौजूद नहीं होने के कारण स्थगित हो गई. CJP का कहना है कि जब सरकार पेपर लीक के मामलों में तेजी से कार्रवाई की बात कर रही है, तो ऐसे मामलों की सुनवाई में भी तेजी और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जानी चाहिए.

जंतर-मंतर पर अब पहले से ज्यादा मजबूत होंगे बैरिकेड्स

CJP की ओर से दोबारा आंदोलन की चेतावनी के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है. हाल के प्रदर्शनों के बाद प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए बैरिकेड्स को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है. जानकारी के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल के आगे और पीछे लगाए गए बैरिकेड्स को वेल्डिंग के जरिए आपस में जोड़ा जा रहा है. इसका मकसद बैरिकेडिंग को पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत बनाना है, ताकि भीड़ के दबाव में उन्हें आसानी से हटाया या तोड़ा न जा सके.

सोनम वांगचुक के धरना स्थल पर भी मजबूत की गई बैरिकेडिंग

जंतर-मंतर पर जिस जगह सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल की थी, वहां भी बैरिकेड्स को वेल्डिंग के जरिए मजबूत किए जाने की जानकारी सामने आई है. प्रशासन की यह तैयारी हाल के प्रदर्शनों के अनुभव के बाद की गई बताई जा रही है. प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ पहुंचने की स्थिति में भीड़ को नियंत्रित करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है. ऐसे में बैरिकेड्स को स्थायी तौर पर मजबूत करने का कदम उठाया जा रहा है.

क्यों मजबूत किए जा रहे हैं जंतर-मंतर के बैरिकेड्स?

जंतर-मंतर दिल्ली में लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और छात्र आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां होने वाले प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन की कोशिश रहती है कि प्रदर्शनकारी तय सीमा के भीतर रहें और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो. नई बैरिकेडिंग व्यवस्था के पीछे भी यही उद्देश्य बताया जा रहा है. यदि भविष्य में किसी प्रदर्शन के दौरान भीड़ बैरिकेड्स पार करने या आगे बढ़ने की कोशिश करती है तो मजबूत बैरिकेड्स सुरक्षा घेरा बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति के अधिकार के साथ सुरक्षा व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे.

जंतर-मंतर पर पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ी

बैरिकेड्स को मजबूत करने के अलावा जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी जा रही है. मौके पर दिल्ली पुलिस के साथ अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी जारी है. प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी बड़े प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी अप्रिय स्थिति को समय रहते रोका जा सके.

CJP की चेतावनी और जंतर-मंतर की तैयारी से क्या संकेत मिलते हैं?

एक तरफ CJP सरकार को दोबारा बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में छात्रों के आंदोलन और प्रशासन के बीच टकराव की आशंका को लेकर चर्चा तेज हो सकती है. हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि CJP की अगली रणनीति क्या होगी या FIR को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाएगा. संगठन ने जरूर यह संकेत दे दिया है कि उसकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन का रास्ता फिर अपनाया जा सकता है.

पेपर लीक विवाद में अब आगे क्या?

NEET-UG विवाद के बाद देश में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बड़ा मुद्दा बन चुका है. सरकार नए कानून के जरिए परीक्षा में अनुचित साधनों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है, जबकि CJP जैसे छात्र आंदोलन से जुड़े संगठन FIR और छात्रों पर कानूनी कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में तीन मुद्दे सबसे अहम रहेंगे—पेपर लीक मामलों की जांच और सुनवाई, छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR पर सरकार का रुख और जंतर-मंतर पर संभावित नए प्रदर्शन की स्थिति.

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