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भारत बड़ी आर्थिक छलांग के मुहाने पर: 2030 होगा गेम-चेंजर साल, देश की कमाई ने बदल दी दुनिया की रैंकिंग

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस दशक के अंत तक Upper Middle Income Country बनने की दहलीज पर पहुंच चुका है. अनुमान है कि 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita GNI) 4,000 डॉलर तक पहुंच सकती है, जो वर्ल्ड बैंक की अपर-मिडिल इनकम श्रेणी की न्यूनतम सीमा है. रिपोर्ट बताती है कि भारत 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.

भारत बड़ी आर्थिक छलांग के मुहाने पर: 2030 होगा गेम-चेंजर साल, देश की कमाई ने बदल दी दुनिया की रैंकिंग
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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 19 Jan 2026 11:58 PM

भारत की अर्थव्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां से उसका वैश्विक दर्जा पूरी तरह बदल सकता है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस दशक के अंत तक Upper Middle Income Country की श्रेणी में पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार है. टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इसका सीधा मतलब है कि प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) में ऐतिहासिक बढ़ोतरी के साथ भारत उन देशों की कतार में खड़ा होगा, जहां अब तक सिर्फ चीन और इंडोनेशिया जैसे बड़े उभरते राष्ट्र शामिल रहे हैं.

SBI के विश्लेषण में वर्ल्ड बैंक के ताज़ा आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत की Gross National Income (GNI) प्रति व्यक्ति वर्ष 2030 तक करीब 4,000 डॉलर तक पहुंच सकती है. वर्ल्ड बैंक के मौजूदा वर्गीकरण के अनुसार, यही वह सीमा है, जिसके पार पहुंचते ही कोई देश Upper Middle Income Economy की कैटेगरी में आ जाता है.

क्या होती है अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी?

वर्ल्ड बैंक देशों को उनकी प्रति व्यक्ति आय के आधार पर चार श्रेणियों में बांटता है - Low Income, Lower Middle Income, Upper Middle Income और High Income. यह वर्गीकरण US डॉलर में मापी गई प्रति व्यक्ति GNI पर आधारित होता है. फिलहाल Upper Middle Income देश बनने के लिए प्रति व्यक्ति आय लगभग 4,000-4,500 डॉलर के आसपास होनी चाहिए. SBI का कहना है कि भारत इसी दहलीज पर खड़ा है.

1990 से 2024 तक दुनिया कैसे बदली

SBI रिपोर्ट बताती है कि पिछले तीन दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था का स्वरूप तेजी से बदला है. 1990 में, जब वर्ल्ड बैंक ने 218 देशों का वर्गीकरण किया था, तब 51 देश Low Income, 56 Lower Middle Income, 29 Upper Middle Income और 39 High Income कैटेगरी में थे. 2024 तक यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई और Low Income देशों की संख्या घटकर 26 रह गई जबकि Lower Middle Income देश 50 हो गए. Upper Middle Income देश बढ़कर 54 हो गए जबकि High Income देशों की संख्या दोगुनी से ज्यादा होकर 87 पहुंच गई. यह बदलाव बताता है कि विकासशील देश धीरे-धीरे आर्थिक सीढ़ी पर ऊपर चढ़ रहे हैं.

चीन और इंडोनेशिया की राह पर भारत

चीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. 1990 में चीन की प्रति व्यक्ति GNI महज़ 330 डॉलर थी और वह Low Income देश था. 2024 तक चीन Upper Middle Income कैटेगरी में पहुंच चुका है. इसी तरह इंडोनेशिया ने भी Low Income से Upper Middle Income तक का सफर तय किया. अब SBI का कहना है कि भारत उसी रास्ते पर है, हालांकि उसकी गति कुछ हद तक धीमी लेकिन स्थिर रही है.

भारत का सफर: धीमा लेकिन मजबूत

SBI रिपोर्ट के मुताबिक भारत को Low Income से Lower Middle Income कैटेगरी में पहुंचने में करीब 60 साल लग गए. 1962 में भारत की प्रति व्यक्ति GNI सिर्फ 90 डॉलर थी जो 2007 में बढ़कर 910 डॉलर पहुंची. इस दौरान भारत की प्रति व्यक्ति आय में औसतन 5.3% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई.

ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने की कहानी

भारत की कुल अर्थव्यवस्था का विस्तार भी इसी बदलाव को दर्शाता है. भारत को $1 ट्रिलियन इकॉनमी बनने में 60 साल लगे, अगले 7 साल में यह $2 ट्रिलियन पहुंची (2014) जबकि 2021 तक $3 ट्रिलियन और 2025 तक $4 ट्रिलियन हुई. अनुमान है कि $5 ट्रिलियन का आंकड़ा अगले दो साल में छू लिया जाएगा. यानी भारत की आर्थिक रफ्तार अब पहले से कहीं ज्यादा तेज है.

प्रति व्यक्ति आय में बड़ा उछाल

SBI के आंकड़े बताते हैं

  • 2009 में Per Capita Income पहली बार $1,000 के पार गई
  • 2019 तक यह $2,000 पहुंची
  • 2026 तक इसके $3,000 छूने की उम्मीद है
  • और 2030 तक $4,000 का लक्ष्य काफी हद तक achievable माना जा रहा है

यही आंकड़ा भारत को Upper Middle Income देश बना देगा.

Image Credit: napkin.ai

2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा और चीन दूसरे नंबर पर रहेगा. लेकिन भारत 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरे नंबर पर पहुंच सकता है. यह सिर्फ GDP का खेल नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक ताकत के संतुलन में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

वैश्विक ग्रोथ रैंकिंग में भारत की छलांग

SBI ने भारत की तुलना दुनिया के अन्य देशों से करते हुए एक अहम बात कही है. पिछले दशक में भारत की औसत वास्तविक GDP ग्रोथ वैश्विक स्तर पर काफी मजबूत रही है. 25 साल के डेटा में भारत 92वें पर्सेंटाइल पर था, अब यह 95वें पर्सेंटाइल तक पहुंच चुका है. यानी दुनिया के ज्यादातर देशों की तुलना में भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.

2047 का सपना: हाई इनकम इंडिया?

SBI का कहना है कि अगर भारत को 2047 तक High Income Country बनना है - जो ‘विकसित भारत’ विज़न का हिस्सा है - तो उसे प्रति व्यक्ति GNI में करीब 7.5% CAGR की जरूरत होगी. अच्छी खबर यह है कि 2001 से 2024 के बीच भारत की Per Capita GNI में 8.3% CAGR दर्ज किया गया है. हालांकि, SBI आगाह करता है कि हाई इनकम की सीमा खुद भी बढ़ेगी. अगर यह सीमा $18,000 तक जाती है, तो भारत को 8.9% की सालाना वृद्धि बनाए रखनी होगी.

अपर-मिडिल इनकम देश बनना तय

SBI का साफ निष्कर्ष है कि भारत का Upper Middle Income Country बनना अब “संभावना” नहीं, बल्कि “दिशा” बन चुका है. लगभग 11–11.5% की डॉलर टर्म्स में नॉमिनल GDP ग्रोथ, जो भारत पहले भी हासिल कर चुका है, इस लक्ष्य को संभव बनाती है. आर्थिक आंकड़े, वैश्विक रैंकिंग और विकास की गति - तीनों संकेत दे रहे हैं कि आने वाला दशक भारत की आर्थिक पहचान को पूरी तरह बदल सकता है.

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