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Budget 2026 में सरकार को किन अहम नंबरों पर देना होगा जवाब, कैसे बनेगा विकास की रफ्तार और घाटे के कंट्रोल का संतुलन?

Budget 2026-27 में सरकार के सामने विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन की बड़ी चुनौती होगी. राजकोषीय घाटा, पूंजीगत व्यय (कैपेक्स), कर्ज़ घटाने की रणनीति, उधारी, कर राजस्व, GST संग्रह और नाममात्र GDP ये ऐसे प्रमुख आंकड़े हैं, जिनसे बाजार और निवेशकों को दिशा मिलेगी.

Budget 2026 में सरकार को किन अहम नंबरों पर देना होगा जवाब, कैसे बनेगा विकास की रफ्तार और घाटे के कंट्रोल का संतुलन?
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( Image Source:  sora ai )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 31 Jan 2026 10:34 PM

1 फरवरी 2026 को जब निर्मला सीतारमण संसद में Union Budget 2026-27 पेश करेंगी, तो चर्चा घोषणाओं से ज्यादा आंकड़ों पर टिकेगी. दुनिया की तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भारत के लिए यह बजट विकास की रफ्तार और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन की परीक्षा होगा. कस्टम्स सुधार, फिस्कल कंसॉलिडेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पुश इन तीनों की दिशा आंकड़ों से ही तय होगी. यही वजह है कि यह बजट “क्या मिलेगा” से पहले “कितना और कैसे” पर केंद्रित रहेगा.

राजकोषीय घाटा निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा संकेतक है. FY26 के लिए 4.4% का लक्ष्य पहले ही तय है, और संकेत मिल रहे हैं कि सरकार FY27 के लिए इसे 4.0–4.4% के दायरे में लाने का रोडमैप दे सकती है. बाजार यह देखना चाहता है कि क्या घाटा कटौती सिर्फ लक्ष्य रहेगी या उसके साथ कर्ज़-GDP अनुपात घटाने की ठोस रणनीति भी आएगी. यही वह आंकड़ा है जो सरकार की विश्वसनीयता तय करता है.

विकास का इंजन चालू रहेगा?

पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पिछले कुछ वर्षों से विकास का मुख्य इंजन रहा है. FY26 के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये के बाद उम्मीद है कि 10–15% की बढ़ोतरी के साथ यह 12 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है. वेतन संशोधन FY28 में प्रस्तावित होने से फिलहाल कैपेक्स बढ़ाने की गुंजाइश बनी हुई है. इसका असर सिर्फ सड़कों-पुलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निजी निवेश और रोजगार सृजन तक पहुंचेगा.

कर्ज़ घटाने की राह

सरकार पहले ही कह चुकी है कि 2026-27 से कर्ज़-GDP अनुपात घटते रास्ते पर होगा. 2024 में कुल सरकारी कर्ज़ GDP का करीब 85% था, जिसमें केंद्र का हिस्सा 57% रहा. अब बाजार यह जानना चाहता है कि FY27 के बाद कटौती की टाइमलाइन क्या होगी और 2030-31 तक 50% (±1%) के लक्ष्य को पाने की रणनीति कैसी होगी. यहां स्पष्टता मिलना उतना ही जरूरी है जितना लक्ष्य.

बॉन्ड मार्केट का मूड

FY26 के लिए 14.80 लाख करोड़ रुपये की सकल उधारी तय है, और इसका स्तर बॉन्ड यील्ड्स को सीधे प्रभावित करता है. निवेशक उधारी के आकार के साथ उसकी संरचना पर भी नजर रखेंगे—कितना लंबी अवधि का कर्ज़ और कितना अल्पकालिक. यह संकेत देगा कि सरकार घाटा कैसे फाइनेंस करेगी और बाजार पर दबाव कितना पड़ेगा.

कर राजस्व: भरोसेमंद इंजन या चुनौती?

FY26 के लिए सकल कर राजस्व 42.70 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें प्रत्यक्ष कर 25.20 लाख करोड़ और अप्रत्यक्ष कर 17.50 लाख करोड़ रुपये हैं. FY27 के लिए कर उछाल और कस्टम्स सुधारों पर खास ध्यान रहेगा. सवाल यह है कि क्या सरकार कर आधार बढ़ाकर संग्रह बढ़ाएगी या दरों में बदलाव से संतुलन साधेगी क्योंकि यही टिकाऊ राजस्व की कुंजी है.

GST और नाममात्र GDP: गति का संकेत

GST संग्रह FY26 में 11.78 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, और ‘GST 2.0’ के बाद FY27 में तेजी की उम्मीद है. वहीं नाममात्र GDP का अनुमान FY27 के लिए 10.5–11% रखा जा सकता है, जो महंगाई और वास्तविक वृद्धि दोनों का संकेत देगा. ये दोनों आंकड़े मिलकर बताएंगे कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार कितनी स्थायी है.

सामाजिक क्षेत्र और सेक्टोरल फोकस

स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं के साथ रक्षा, रिन्यूएबल एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, MSME और ग्रामीण विकास इन सबका आवंटन यह बताएगा कि सरकार विकास को कितनी व्यापक परिभाषा देती है. कुल मिलाकर, बजट 2026-27 का असली इम्तिहान यह होगा कि कैपेक्स पुश जारी रखते हुए घाटा नियंत्रण और कर्ज़ कटौती की विश्वसनीय राह कैसे दिखाई जाती है क्योंकि अंततः आंकड़े ही नीति की कहानी कहते हैं.

बजट 2026
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