Gen-Z के दम पर सत्ता, अब उन्हीं पर रोक! Nepal के PM Balen Shah ने क्यों बैन की Students Politics?

नेपाल के प्रधानमंत्री Balen Shah ने शिक्षा संस्थानों में छात्र राजनीति पर प्रतिबंध लगाकर बड़ा और विवादास्पद फैसला लिया है. सरकार इसे शिक्षा सुधार बता रही है.

Nepal PM Balen Shah

Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 30 March 2026 12:01 PM IST

Nepal Politics: नेपाल में सत्ता संभालते ही नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने एक बड़ा और विवादास्पद कदम उठाया है, जिसने देश की शिक्षा और राजनीति दोनों में नई बहस छेड़ दी है. शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उनकी सरकार ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है.

आदेश के मुताबिक, 60 दिनों के भीतर सभी पार्टी-आबद्ध छात्र यूनियनों की गतिविधियां समाप्त कर दी जाएंगी और उनकी जगह निर्वाचित ‘स्टूडेंट काउंसिल’ या ‘स्टूडेंट वॉइस’ जैसी संस्थाएं स्थापित की जाएंगी.

क्या है सरकार के इस फैसले का मतलब?

सरकार इसे केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को 'राजनीति के प्रभाव से मुक्त' करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है. हालांकि, इस फैसले ने व्यापक बहस को जन्म दिया है, खासकर इसलिए क्योंकि बालेन शाह खुद उस जन-आंदोलन की उपज माने जाते हैं जिसने पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी थी.

कैसे सत्ता में आए बालेन शाह?

साल 2025 में हुए जेन-ज़ी आंदोलन के दौरान भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया प्रतिबंध और बढ़ती युवा बेरोजगारी के खिलाफ लाखों युवा सड़कों पर उतरे थे. इस आंदोलन ने नेपाल की स्थापित राजनीतिक पार्टियों को झटका दिया और नई राजनीतिक ताकतों के उभरने का रास्ता साफ किया.

रैपर से नेता बने बालेन शाह ने इसी जनसमर्थन को राजनीतिक ताकत में बदला. काठमांडू के मेयर बनने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की और उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 2026 के चुनाव में बहुमत हासिल कर लिया. युवाओं का समर्थन उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है.

सरकार ने लगया बैन, क्या दिया तर्क?

अब यही युवा आधार इस फैसले के केंद्र में आ गया है. सरकार का तर्क है कि छात्र संगठन अब शिक्षा के मंच के बजाय राजनीतिक दलों के विस्तार बन चुके हैं. नेपाली कांग्रेस, UML और माओवादी दलों से जुड़े छात्र संगठनों पर कैंपस में हिंसा, तोड़फोड़, वसूली और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा डालने के आरोप लगते रहे हैं.

सरकार का कहना है कि शिक्षा संस्थानों को इन गतिविधियों से मुक्त कराना जरूरी है ताकि पढ़ाई का माहौल सुधर सके. इसी तर्क के साथ भारत के कुछ राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, में भी लंबे समय से छात्र राजनीति पर नियंत्रण या प्रतिबंध की नीतियां अपनाई जाती रही हैं.

नेपाल में कैसी है बालेन शाह की छवि?

बालेन शाह की छवि अब तक एक साफ-सुथरे, भ्रष्टाचार विरोधी और युवा-केंद्रित नेता की रही है. लेकिन सत्ता में आने के बाद लिया गया यह पहला बड़ा फैसला उनकी उसी छवि की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है. जिस युवा शक्ति ने उन्हें सत्ता तक पहुंचाया, उसी के राजनीतिक स्पेस को सीमित करने का आरोप अब उन पर लग रहा है.

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