Israel Bunkers: सायरन बजते ही जमीन के नीचे गायब हो जाते हैं इजराइली! जानिए बंकरों में कैसे कटती है जंग के साए वाली ज़िंदगी
Israel Bunkers: लगातार मिसाइल और बमबारी के बावजूद इजराइल में आम लोगों पर इसका असर कम दिखाई देता है. इसकी बड़ी वजह देशभर में बने मजबूत बंकर और सुरक्षित कमरे हैं, जहां लोग सायरन बजते ही कुछ सेकंड में पहुंच जाते हैं.
Israel Bunkers: ईरान और इजराइल की जंग जारी है और ऐसे में इजराइली नागरिकों को अगर कुछ बचाए हुए है तो वह एयर डिफेंस सिस्टम और बंकर्स हैं. इजराइलियों के लिए मानों अब इन बंकरों में रहना रोजना का कम हो गया है. जब भी सायरन बजता है तो इजराइली नागरिक आसपास के बंकरों में छिप जाते हैं. खतरा टलता है तो बाहर निकल आते हैं.
खास बात यह है कि इन बंकरों में सभी तरह के इंतेजाम किए गए हैं. अगर कुछ दिन यहां रुकना भी पड़े तो आसानी से रुका जा सकता है और साथ ही हर तरह की सुविधा यहां मुहैया कराई जाती है. फिर चाहे फूड हो या फिर मेडिकल सर्विसेज भी हैं.
इजराइल में कितने बम शैल्टर्स हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल में बम से बचाव के लिए सैकड़ों हजार शेल्टरों का बड़ा और अलग-अलग जगहों पर फैला नेटवर्क है. इनमें आधुनिक अपार्टमेंट्स में बने निजी मजबूत कमरे, जिन्हें मामाद कहा जाता है, से लेकर सार्वजनिक भूमिगत बंकर तक शामिल हैं. इनका मकसद लगभग पूरे देश की आबादी को सुरक्षा देना है. देश के 65 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के पास किसी न किसी शेल्टर तक पहुंच है.
क्या है इन बंकरों की खासियत?
सुरक्षा के लिए मजबूत निर्माण
इन सुरक्षित कमरों की दीवारें और छत खास तौर पर बहुत मोटे कंक्रीट से बनाई जाती हैं, जिनकी मोटाई लगभग 25 से 30 सेंटीमीटर होती है. इसका उद्देश्य मिसाइल के मलबे या सीधे हमले से लोगों को सुरक्षित रखना होता है.
स्वच्छ हवा की व्यवस्था
अधिकांश आधुनिक शेल्टरों में खास एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाए जाते हैं. ये सिस्टम परमाणु, जैविक या रासायनिक हमले की स्थिति में भी हवा को साफ करने में मदद करते हैं.
विस्फोट से बचाने वाले दरवाजे
इन कमरों में मजबूत स्टील के दरवाजे लगाए जाते हैं, जो विस्फोट-रोधी होते हैं. ऐसे दरवाजे धमाके की तेज लहरों को अंदर आने से रोकने में मदद करते हैं.
जरूरी सुविधाएं
इन सुरक्षित कमरों में बिजली, टेलीफोन लाइन जैसी संचार सुविधाएं दी जाती हैं. कई जगहों पर पानी की व्यवस्था भी होती है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग कुछ समय तक वहां सुरक्षित रह सकें.
अलर्ट सिस्टम से जुड़ाव
ये शेल्टर नागरिक सुरक्षा प्रणाली यानी होम फ्रंट कमांड की चेतावनी व्यवस्था से जुड़े रहते हैं. जैसे ही सायरन बजता है, लोगों को तुरंत सतर्क कर दिया जाता है.
आसानी से पहुंचने की व्यवस्था
ये सुरक्षित कमरे आमतौर पर घर के अंदर ही बने होते हैं, जिन्हें मामाद कहा जाता है, या फिर इमारत के तहखाने में बनाए जाते हैं. इससे सायरन बजने के कुछ ही सेकंड के भीतर लोग वहां पहुंचकर सुरक्षित हो सकते हैं. इसके साथ ही पब्लिक प्लेस पर भी ये बंकर्स मिलते हैं.
अंडरग्राउंड मेडिकल सर्विसेज़ क्या मौजूद रहती हैं?
इजराइल के पिछले संघर्षों के दौरान भी अस्पताल ने कुछ सेवाओं को जमीन के नीचे शिफ्ट किया था, लेकिन इस बार यह बहुत बड़े स्तर पर किया गया है. इसमें सैकड़ों मेडिकल कर्मी और डॉक्टर काम करते हैं. शेबा नाम का मेडिकल सर्विस सेंटर अंडरग्राउंड बनाया गया है, जिसमें 24 घंटे सुविधा मुहैया कराई जाती है. सीधे तौर पर इजराइल पूरी तरह से किसी भी जंग की स्थिती से निपटने के लिए तैयार है.
ईरान के हमलों का इजराइल पर कुछ खासा असर नहीं पड़ा है. आम लोग अपनी जिंदगी आसानी से गुजार रहे हैं. जैसे इजराइलियों को इन बंकर्स में रहने की आदत सी हो गई है.
बंकर में कपल ने की शादी!
हाल ही में एक मामला भी सामने आया था जिसमें एक शख्स ने बंकर में ही शादी की थी. उसने यह फैसला ईरान युद्ध की वजह से लिया. दरअसल, दुल्हा के दोस्तों ने जब कपल को जंग की वजह से मायूस देखा तो उन्होंने उनकी शादी बंकर में ही कराने का फैसला किया.
किन लोगों को मिलती है बंकर में शरण?
बंकर में हर किसी को शरण मिल सकती है. 2025 में जब ईरान के साथ इजराइल की जंग हुई थी तो एक भारतीय शख्स ने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया था. त्रिएंबक कोली नाम के शख्स ने बताया कि उनके बेटे के बच्चा हुआ था और वह उससे मिलने इजराइल गया था. लेकिन जंग हो गई और आखिर में उन्हें बंकर में छिपना पड़ा. हमले के दौरान वह बंकर में चले जाते और उन्होंने इजराइल में दो महीने काटे.
इजराइल ने क्यों किया बंकर्स बनाने का फैसला?
देश लंबे समय से रॉकेट और मिसाइल हमलों के खतरे का सामना करता रहा है, खासकर गाजा पट्टी, लेबनान और क्षेत्रीय तनाव के कारण. इसी वजह से इजराइल ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए घरों, अपार्टमेंट्स और सार्वजनिक स्थानों में सुरक्षित कमरे और भूमिगत बंकर बनाने की नीति अपनाई. इनका मकसद यह है कि सायरन बजने के कुछ ही सेकंड के भीतर लोग सुरक्षित जगह पर पहुंच सकें और हवाई हमलों या मिसाइल हमलों के दौरान जान-माल का नुकसान कम से कम हो.