Iran पर लाल हुए Trump और Netanyahu, दिया 10 दिन का अल्टीमेटम- क्या हो रही नक़्शे से मिटाने की तैयारी?
मध्य पूर्व में हालात खतरनाक मोड़ पर हैं. एक ओर जहां ईरान शांति की बात कर रहा, लेकिन जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दे रहा है, वहीं डोनाल्ड ट्रंप का 10 दिन का अल्टीमेटम तनाव को और भड़का सकता है. इन सबके बीच बेंजामिन नेतन्याहू की कड़ी चेतावनी संकेत देती है कि जरा सी चूक भी बड़े सैन्य टकराव में बदल सकती है, जिससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता दांव पर लग सकती है.
US-Iran Conflict : मध्य पूर्व में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है. एक ओर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर साफ किया है कि वह युद्ध नहीं चाहता, तो दूसरी ओर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 दिनों का अल्टीमेटम देकर सख्त रुख अपना लिया है. इसी बीच इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी तीखी चेतावनी जारी की है.
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को भेजे गए अपने पत्र में कहा है कि उसकी प्राथमिकता क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना है. तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह के युद्ध का इच्छुक नहीं है, लेकिन अगर उस पर हमला किया गया तो वह निर्णायक और प्रभावी जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा. ईरान का कहना है कि उसकी सैन्य तैयारियां केवल आत्मरक्षा के उद्देश्य से हैं और वह अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करेगा.
क्यों अड़े हैं ट्रंप?
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य हमले के विकल्प पर विचार कर रहे हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्होंने ईरान को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि के भीतर परमाणु समझौते पर ठोस प्रगति नहीं हुई, तो अमेरिका सख्त कदम उठा सकता है.ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं. 10 दिन की यह समय-सीमा कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखी जा रही है.
नेतन्याहू क्यों गुस्सा?
इज़रायल भी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ईरान ने इज़रायल पर हमला किया, तो जवाब कल्पना से परे होगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी हमले की स्थिति में दुश्मन के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों को सीधे निशाना बनाया जाएगा. इज़रायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है.
मौजूदा हालात में कूटनीतिक बयानबाज़ी, सैन्य तैयारियां और अल्टीमेटम- तीनों ने क्षेत्रीय तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. अब दुनिया की निगाहें अगले 10 दिनों पर टिकी हैं. क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या हालात सैन्य टकराव की ओर बढ़ेंगे, यह तो आने वाला समय तय करेगा. फिलहाल, मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता को लेकर वैश्विक चिंता गहराती जा रही है.