ब्रिटेन में जंक फूड विज्ञापनों पर लगा बैन, टीवी पर रात 9 बजे से पहले और ऑनलाइन पूरी तरह रोक; जानिए ऐसा करने की खास वजह

ब्रिटेन सरकार ने बच्चों में बढ़ते मोटापे को रोकने के लिए 6 जनवरी 2026 से जंक फूड विज्ञापनों पर कड़े नियम लागू कर दिए हैं. अब टीवी पर रात 9 बजे से पहले और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किसी भी समय हाई फैट, शुगर और नमक वाले खाद्य पदार्थों के विज्ञापन नहीं दिखाए जा सकेंगे. एएसए इन नियमों को लागू करेगा। चॉकलेट, चिप्स, पिज्जा, आइसक्रीम और मीठे ड्रिंक्स समेत 13 कैटेगिरी के प्रोडक्ट्स पर रोक लगी है. हालांकि ब्रांड विज्ञापनों की अनुमति को लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है.;

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Edited By :  रूपाली राय
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ब्रिटेन सरकार ने बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है. 6 जनवरी 2026 से टीवी पर रात 9 बजे से पहले जंक फूड के विज्ञापन दिखाने पर रोक लग गई है, और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसे विज्ञापनों की पूरी तरह मनाही हो गई है. द गार्जियन के मुताबिक, ये नियम उन खाद्य पदार्थों पर लागू होते हैं जिनमें फैट, चीनी और नमक की मात्रा ज्यादा होती है. एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एएसए) इन नियमों को लागू करेगा. कुल 13 कैटेगिरी के प्रोडक्ट्स के विज्ञापन अब टीवी पर रात 9 बजे से पहले या ऑनलाइन किसी भी समय नहीं दिखाए जा सकेंगे. इनमें चॉकलेट, मिठाइयां, चिप्स, पिज्जा, आइसक्रीम और मीठे ड्रिंक्स जैसी चीजें शामिल हैं. 

फूड फाउंडेशन नाम के कैंपेन ग्रुप की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अन्ना टेलर ने कहा, 'आज का दिन बच्चों को जंक फूड विज्ञापनों के उस जोरदार हमले से बचाने की दिशा में एक बड़ा और वर्ल्ड लेवल पर एडवांस कदम है. ये विज्ञापन अभी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदेह हैं.' हालांकि ये नियम आज से कानूनी रूप से लागू हो रहे हैं, लेकिन ब्रिटेन के एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री ने अक्टूबर 2025 से ही स्वेच्छा से इनका पालन शुरू कर दिया था. इसका मकसद था कि जटिल सरकारी नियमों का उल्लंघन करने वाले कमर्शियल को सही तरीके से हटाया जाए. नतीजा यह हुआ कि इस बार क्रिसमस के टीवी विज्ञापनों में पहली बार कम फैट, कम शुगर और कम नमक वाले प्रोडक्ट्स पर जोर दिया गया. पुडिंग और मीठी मिठाइयों की जगह फल और सब्जियों को दिखाया गया. 

स्वास्थ्यवर्धक चीजों पर भी प्रतिबंध

इन नियमों में कुछ अजीब बातें भी हैं कई बार ऐसे उत्पादों के विज्ञापन पर रोक लगी है जिन्हें लोग आमतौर पर हेल्दी मानते हैं, जैसे किसी भी तरह के सैंडविच, प्रेट्ज़ेल (नमकीन बिस्किट), और नाश्ते के अनाज वाले सभी उत्पाद इसमें दलिया (पोरिज ओट्स) और मूसली भी शामिल हैं. नियमों में अपवादों और चेतावनियों की लंबी लिस्ट है. कुछ प्रोडक्ट्स को कम फैट या कम शुगर वाला बनाकर सुधारने के बाद भी प्रतिबंधित रखा गया है, क्योंकि इन्हें मोटापे का कारण माना जाता है- जैसे कुछ तरह के चिप्स, क्रिस्प्स और पिज्जा. 

इन फूड कंपनियों पर फूटा गुस्सा

पिछले साल हेल्थ वर्कर्स ने गुस्सा जताया था जब सरकार ने मैकडॉनल्ड्स या कैडबरी जैसी जंक फूड कंपनियों को ब्रांड विज्ञापन चलाने की इजाजत दे दी. शर्त सिर्फ इतनी थी कि विज्ञापन में कोई स्पष्ट उत्पाद न दिखे. यह फैसला फ़ूड इंडस्ट्री की कानूनी धमकी के बाद लिया गया था. अब ब्रांड विज्ञापन की अनुमति से कंपनियां प्रोडक्ट दिखाए बिना अपनी ब्रांडिंग कर सकती हैं. उदाहरण के लिए, कैडबरी अपना मशहूर गोरिल्ला वाला विज्ञापन (जिसमें ड्रम बजता है) रात 9 बजे से पहले चला सकती है, बशर्ते चॉकलेट बार न दिखे. 

ब्रांड विज्ञापनों पर छूट

अन्ना टेलर ने कहा, 'कानून कंपनियों को उत्पाद विज्ञापनों की जगह ब्रांड विज्ञापनों पर जाने की छूट देता है, जिससे नए नियमों का असर काफी कमजोर पड़ने का खतरा है हमें यहां नहीं रुकना चाहिए. हमें अपना लक्ष्य याद रखना होगा बच्चों के लिए हर तरह के जंक फूड विज्ञापनों पर पूरी रोक लगाना.' पिछले महीने फूड फाउंडेशन की एनुअल रिपोर्ट में पता चला कि टीवी और ऑनलाइन प्रतिबंध आने से पहले ही फ़ूड  कम्पनीज अपना विज्ञापन बजट दूसरे माध्यमों में डाल रही थी. बिलबोर्ड और पोस्टर जैसे बाहरी विज्ञापनों पर खर्च 2021 से 2024 के बीच 28 प्रतिशत बढ़ गया. इन पर जंक फूड विज्ञापन की रोक सिर्फ स्कूलों या खेल केंद्रों से 100 मीटर के दायरे में ही लागू होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, मैकडॉनल्ड्स ने तीन साल में बाहरी विज्ञापनों पर सबसे ज्यादा प्रतिशत बढ़ोतरी की. ये नियम 2020 से विचार में थे, जब बोरिस जॉनसन की सरकार ने इन्हें 2023 में लागू करने की घोषणा की थी. कई देरी के बाद आखिरकार ये अब लागू हो गए हैं. 

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