कहां छुपे हैं शहबाज और मुनीर? रमजान में PAK बेहाल, टमाटर 500 रुपये किलो, फल-सब्जियां 23% तक महंगी, इफ्तार की थाली खाली
रमजान में पाकिस्तान में महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी. फल-सब्जियां 23% तक महंगी, टमाटर 500 रु./किलो. इफ्तार की थाली भरना भी मुश्किल हो रहा है.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से महंगाई और आर्थिक संकट के दबाव में है, लेकिन 2026 की शुरुआत में हालात और भी कठिन होते नजर आ रहे हैं. खासकर रमजान के महीने में खाद्य पदार्थों और फलों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं. कई शहरों में लोग शिकायत कर रहे हैं कि रोजमर्रा के जरूरी सामान तक खरीदना मुश्किल हो गया है. फरवरी और मार्च 2026 के बीच खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई तेजी ने मध्यम और गरीब वर्ग का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है. बाजार में फल, सब्जियां और अनाज लगातार महंगे होते जा रहे हैं, जिससे रमजान जैसे धार्मिक महीने में भी लोगों के लिए इफ्तार की थाली भरना चुनौती बनता जा रहा है.
पाकिस्तान में इतनी क्यों बढ़ी महंगाई?
पाकिस्तान में महंगाई बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार देश पहले से ही आर्थिक मंदी, विदेशी कर्ज और कमजोर मुद्रा जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों का बढ़ना और मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव स्थिति को और कठिन बना रहा है.
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर लगभग 7 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो अक्टूबर 2024 के बाद सबसे अधिक मानी जा रही है. इससे पहले जनवरी 2026 में यह दर करीब 5.8 प्रतिशत थी. यानी सिर्फ एक महीने के भीतर महंगाई में तेज उछाल दर्ज किया गया.
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा लागत बढ़ने, खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ने और आयात पर निर्भरता के कारण महंगाई लगातार ऊपर जा रही है.
खाद्य पदार्थों और सब्जियों के दाम कितने बढ़े?
फरवरी के दौरान सबसे ज्यादा असर खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों पर देखा गया. कई जरूरी वस्तुओं के दाम में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक टमाटर की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला, जहां कुछ बाजारों में इसकी कीमत 17 से 23 प्रतिशत तक बढ़ गई. कई जगह टमाटर 500 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो तक बिकते नजर आए.
इसी तरह ताजे फलों की कीमतों में करीब 11 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई. गेहूं का आटा भी लगभग 2.7 प्रतिशत महंगा हुआ, जबकि दाल और बीन्स के दाम 1 से 3 प्रतिशत तक बढ़ गए. मांस और पेय पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है.
इसके अलावा बिजली और गैस जैसे घरेलू यूटिलिटी खर्चों में भी करीब 9 से 10 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कुल मिलाकर परिवारों के मासिक खर्च में काफी इजाफा हो गया है.
मार्च 2026 में क्या हालात और बिगड़े?
मार्च 2026 में रमजान शुरू होने के साथ ही पाकिस्तान के कई शहरों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और तेजी देखने को मिली. लाहौर, कराची और इस्लामाबाद जैसे बड़े शहरों में फल और सब्जियां सरकारी दरों से ज्यादा कीमत पर बिकती नजर आईं.
उदाहरण के तौर पर केले की सरकारी कीमत करीब 240 रुपये प्रति दर्जन तय की गई थी, लेकिन कई बाजारों में यह 300 रुपये तक बिक रहा था. इसी तरह अमरूद की सरकारी कीमत लगभग 145 रुपये प्रति किलो थी, जबकि बाजार में यह 150 रुपये या उससे अधिक में बिकता दिखाई दिया.
अनार की कीमत लगभग 630 रुपये प्रति किलो तय थी, लेकिन कई जगह यह 700 रुपये तक पहुंच गई. वहीं सेब की कीमत सरकारी दर 420 रुपये प्रति किलो के मुकाबले 450 रुपये या उससे अधिक में बिकती देखी गई. अदरक भी कई बाजारों में करीब 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया. इससे साफ है कि फरवरी की तुलना में मार्च में फलों और ताजा खाद्य पदार्थों की कीमतों में और तेजी आई.
रमजान के दौरान कीमतें क्यों बढ़ जाती हैं?
रमजान के दौरान पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों में फलों, खजूर, जूस और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग अचानक बढ़ जाती है. इफ्तार के समय फल और जूस का उपयोग ज्यादा होने के कारण बाजार में इनकी खपत काफी बढ़ जाती है.
व्यापारियों का कहना है कि जब थोक बाजार में ही कीमतें बढ़ जाती हैं तो खुदरा विक्रेताओं के लिए सरकारी दरों पर सामान बेचना मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से कई बाजारों में आधिकारिक कीमतों से ज्यादा दर पर फल और सब्जियां बिकती हैं.
ईंधन कीमतों का महंगाई से क्या संबंध है?
मार्च 2026 में पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण सरकार को ईंधन कीमतें बढ़ानी पड़ीं. ईंधन महंगा होने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ जाती है. इसका सीधा असर सब्जियों, फलों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इनका परिवहन खेतों से शहरों तक ट्रकों और अन्य वाहनों के जरिए होता है.
क्या मिडिल ईस्ट की जंग का असर भी पड़ रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है और पाकिस्तान की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है. अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या सप्लाई प्रभावित होती है तो तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं. इसका सीधा असर पाकिस्तान जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है.
आम लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ा?
लगातार बढ़ती महंगाई ने पाकिस्तान के आम लोगों के लिए जीवन को और कठिन बना दिया है. खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है. कई उपभोक्ताओं का कहना है कि रमजान जैसे धार्मिक महीने में भी महंगाई कम होने के बजाय और बढ़ जाती है, जिससे परिवारों के लिए इफ्तार की तैयारी करना भी चुनौती बन जाता है.
अगर ऊर्जा कीमतें और सप्लाई लागत इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में पाकिस्तान में महंगाई का संकट और गहरा हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आर्थिक सुधार और बाजार नियंत्रण के ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आम लोगों को राहत मिलना मुश्किल रहेगा.
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल इतना महंगा क्यों हो गया?
पाकिस्तानी मीडिया जैसे Dawn और Geo News की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल की कीमतें प्रति लीटर 55 पाकिस्तानी रुपये बढ़ा दी हैं. अब पेट्रोल की कीमत लगभग 335.86 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत 321 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गई है. नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत की बात करें तो 94.77 रुपये और डीजल की कीमत 86.67 रुपये प्रति लीटर है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान में रहने वाले लोगों का क्या हाल होगा? ईरान इजरायल वार की वजह से हाल ही में 55 रुपये प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए हैं.