'सिर्फ जिहाद से सुलझेगा कश्मीर', मुनीर के कलमे के बाद LeT आतंकी अबु मूसा ने उगला जहर

पाकिस्तान की सैन्य और आतंकी बयानबाजी के बीच लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबु मूसा का नया भड़काऊ बयान दिया है. उसने कश्मीर मुद्दे पर कहा है कि ये भीख मांगने से नहीं मिलेगा, हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगा. मूसा का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब पहले से ही इस क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ बयानबाजी है या किसी बड़ी साजिश का संकेत.;

( Image Source:  Manish Shukla @manishmedia )
Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 14 Jan 2026 3:55 PM IST

यह पहली बार नहीं है, जब लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबु मूसा कश्मीर को लेकर ‘जेहाद’ की बात दोहराते हुए उसने भारत के खिलाफ नफरती बयान दिया है. मूसा से पहले आसिम मुनीर ने भी कलमे पढ़कर भारत को चेताया था. उसी के सह पर अबु मूसा खुली आग उगल रहा है. कश्मीर को लेकर एक बार फिर आतंक की बात करते हुए उसने कहा है कि "कश्मीर सिर्फ जिहाद और आतंक से सुलझेगा." मूसा का यह बयान सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि सीमा पार से भेजा गया भारत के लिए खतरनाक संदेश भी माना जा रहा है. इससे 'आतंकिस्तान' का असली चेहरा फिर सामने आ गया है.

अबु मूसा ने यह बयान एलओसी के पास पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के पुंछ जिले के  टाटरीनोट में जिहादियों के बीच दिया. मूसा ने कश्मीर को लेकर आगे कहा, 'ये भीख मांगने से नहीं मिलेगा, हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगा.' रक्षा सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकियों को ऐसा झटका लगा है कि वे उससे उबर नहीं पा रहे हैं.

पाक समर्थित आतंकवादी एक बार अपने लश्कर के कैडर को दोबारा खड़ा करने और पाकिस्तान में अपनी अहमियत बनाए रखने के लिए खुले मंच से जहरीला बयान देने लगा है. उसने कश्मीर को लेकर खुली धमकी दी और कहा कि जिहाद से ही मसला सुलझेगा.

आतंकी अबु मूसा यहीं नहीं रुका. उसने आगे कहा कि उसने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संदेश दिया है कि कश्मीर का मुद्दा सिर्फ जिहाद और आतंकवाद से ही सुलझेगा. उसका यह बयान उस सच्चाई को उजागर करता है, जिसे भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रखता रहा है. पाकिस्तान कश्मीर के मसले को आतंकी संगठनों के जरिए जिंदा रखना चाहता है.

मुनीर के बाद मूसा का बयान अहम क्यों?

लश्करे ए तैयबा कमांडर अबु मूसा का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से भी कश्मीर को लेकर उकसावे वाली भाषा सुनने को मिली. सुरक्षा जानकारों का मानना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिसमें आतंकी संगठनों को फिर से एक्टिव करने का प्रयास किया जा रहा है.

 इससे पहले कब उगला था जहर

मीडिया और खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबु मूसा इससे पहले भी कई बार ऑडियो और वीडियो संदेशों के जरिए भारत विरोधी बयान दे चुका है. इससे पहले भी कश्मीर में हिंसा भड़काने की अपील की थी. सुरक्षाबलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने की धमकियां दी थी. युवाओं को गुमराह कर आतंकी रास्ते पर धकेलने की कोशिश कर चुका है. उसके इस मंशा को, हर बार भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीरता से लिया और बॉर्डर की निगरानी और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी थी. पहलगाम आतंकी हमले से पहले भी अबु मूसा ने इसी तरह का भड़काऊ बयान दिया था.

भारत की सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति

सूत्रों के मुताबिक, ऐसे बयानों को लेकर खुफिया एजेंसियां पहले से अलर्ट मोड पर है. सीमा पार से होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है.

बयान या बड़ी साजिश?

विशेषज्ञ मानते हैं कि आतंकी संगठन अक्सर ध्यान भटकाने और डर का माहौल बनाने के लिए ऐसे बयान जारी करते हैं, लेकिन हर बयान के पीछे संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस बात को पहले भी कई बार कह चुका है. बता दें कि आतंकवादी अबू मूसा कश्मीरी लश्कर-ए-तैयबा (JKUM) का सीनियर कमांडर है.

 आतंक की नई खेप 

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा गाजा में जारी संकट का फायदा उठाकर अपने आतंकी ढांचे के फिर से तैयार कर रहा है. भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नए कैडर की भर्ती में जुटा है. एथेंस स्थित थिंक टैंक ‘जियोपॉलिटिको' की रिपोर्ट में कहा गया है, 'पाकिस्तान का एक खतरनाक रवैया सामने आ रहा है. वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा गाजा राहत के नाम पर धन जुटाकर उसे आतंकी गतिविधियों में लगा रहा है. चिंता की बात यह है कि जैश प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के सदस्यों की भी इन नए वित्तपोषण अभियानों में सीधी भूमिका सामने आई है.”

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