इजरायल और ओमान के बीच क्यों है 'छत्तीस का आंकड़ा'? आखिर कॉकपिट तक कैसे पहुंचा ओमानी को-पायलट
इजरायल और ओमान के रिश्ते कैसे हैं? जानिए फ्लाईदुबई FZ1073 में ओमानी को-पायलट कैसे पहुंचा और उसका मकसद क्या था. आइए डिटेल में जानते हैं पूरी कहानी
Oman Israel Relations: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में एक ओमानी को-पायलट पर भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने और विमान को खतरे में डालने का आरोप लगा है. घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कॉकपिट में क्या हुआ, बल्कि यह भी है कि जिस ओमान के इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, उस देश का नागरिक इजरायल जाने वाली फ्लाइट के कॉकपिट में ड्यूटी पर कैसे तैनात था? इसी के साथ आइए जानते हैं इजरायल और ओमान के बीच कैसे हैं संबंध?
इस घटना ने इजरायल और ओमान के रिश्तों को भी चर्चा में ला दिया है. दोनों देशों के बीच इतिहास में पर्दे के पीछे संपर्क रहे हैं, बातचीत हुई है और कुछ सीमित स्तर पर सहयोग भी हुआ, लेकिन फिलिस्तीन के मुद्दे और इजरायल के साथ औपचारिक संबंधों को लेकर ओमान का रुख अलग रहा है. तो आखिर दोनों देशों के रिश्ते कैसे रहे हैं और फ्लाइट में ओमानी को-पायलट की मौजूदगी संभव कैसे हुई?
इजरायल और ओमान के रिश्ते इतने तल्ख क्यों हैं?
ओमान ने इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं. हालांकि दोनों देशों के रिश्ते हमेशा सीधे टकराव वाले नहीं रहे. 1970 के दशक में दोनों के बीच पर्दे के पीछे संपर्क शुरू हुए थे. उस दौर में ओमान ने धफार विद्रोह से निपटने के लिए इजरायल से सैन्य मदद भी ली थी.
1990 के दशक में दोनों देशों के बीच संपर्क कुछ ज्यादा खुलकर सामने आया. 1994 में इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन ने ओमान का दौरा किया. इसके बाद दोनों देशों ने व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय खोलने की दिशा में भी कदम बढ़ाया. हालांकि 2000 में दूसरे इंतिफादा के बाद ये रिश्ते फिर ठंडे पड़ गए.
नेतन्याहू भी पहुंचे थे ओमान
दोनों देशों के बीच संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. अक्टूबर 2018 में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ओमान की यात्रा की और सुल्तान काबूस से मुलाकात की. उस समय ओमानी विदेश मंत्री ने इजरायल को मध्य पूर्व का एक ऐसा देश बताया था जिसे दूसरे देशों की तरह स्वीकार किए जाने की बात कही थी. लेकिन इसके बावजूद ओमान ने इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए. फिलिस्तीनी राज्य के सवाल पर भी ओमान का रुख इजरायल से अलग रहा है.
फिर इजरायल की फ्लाइट ओमान के एयरस्पेस से कैसे गुजरने लगी?
2023 में ओमान ने अपने हवाई क्षेत्र को योग्य एयरलाइंस के लिए खोलने का फैसला किया. इसके बाद इजरायली विमानों को भी ओमानी एयरस्पेस से गुजरने की अनुमति मिली. इससे इजरायल और एशिया के बीच कुछ उड़ानों का रास्ता छोटा हुआ. हालांकि गाजा युद्ध के बाद इजरायल की राष्ट्रीय एयरलाइन एल अल ने ओमानी एयरस्पेस से उड़ान भरना बंद कर दिया था. यानी दोनों देशों के बीच राजनीतिक स्तर पर दूरी होने के बावजूद हवाई क्षेत्र और कुछ दूसरे मामलों में सीमित संपर्क के रास्ते खुले रहे.
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमानी को-पायलट कैसे पहुंचा?
यहीं से FZ1073 का मामला अहम हो जाता है. मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी ओमानी नागरिक फ्लाइट में बतौर को-पायलट तैनात था यानी वह किसी तरह बाहर से कॉकपिट में घुसा नहीं था, फ्लाईदुबई संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की एक सरकारी एयरलाइन कंपनी है जिस पर ओमान का को-पायलट नौ महीने से नौकरी करता था. बल्कि उड़ान के दौरान आधिकारिक तौर पर कॉकपिट में मौजूद था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमानी को पायलट ने चाकू से भारतीय कैप्टन स्मित पर हमला किया.
कॉकपिट में आखिर हुआ क्या?
फ्लाइट के दौरान आरोपी को-पायलट ने भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छड़ पर अचानक हमला किया. आरोप है कि इसके बाद विमान को करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई से नीचे ले जाया गया. घायल होने के बावजूद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की और इसके बाद अंदर मौजूद यात्रियों और दूसरे लोगों ने स्थिति को संभाला. शुरुआती जांच में विमान को क्रैश करने की कोशिश की आशंका जताई गई है. हालांकि आरोपी का सटीक मकसद क्या था, यह जांच का विषय है. कुछ रिपोर्ट्स में धार्मिक चरमपंथ के एंगल की भी चर्चा हुई है, लेकिन अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
क्या ओमान और इजरायल की पुरानी दुश्मनी की वजह से हुआ हमला?
जानकारी के आधार पर इस घटना को सीधे ओमान सरकार की नीति या इजरायल-ओमान के राजनीतिक रिश्तों से जोड़ना सही नहीं होगा. किसी व्यक्ति की ओमानी नागरिकता और ओमान सरकार की आधिकारिक नीति अलग-अलग बातें हैं. उपलब्ध रिपोर्टों में इस हमले को ओमान सरकार से जोड़ने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है. असल सवाल फिलहाल यह है कि इजरायल जाने वाली इस फ्लाइट में ओमानी नागरिक को-पायलट की तैनाती की अनुमति कैसे मिली और सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई?
इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था पर क्यों उठे सवाल?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस मामले में विमानन सुरक्षा व्यवस्था में एक संभावित खामी की ओर इशारा किया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पायलटों की सुरक्षा जांच में इजरायली एजेंसियां संबंधित एयरलाइन की जांच प्रक्रिया पर निर्भर थीं. यही वजह है कि घटना के बाद सिर्फ को-पायलट के मकसद पर नहीं, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं जिसके तहत उसे इजरायल जाने वाली फ्लाइट पर ड्यूटी मिली.