इस्लामाबाद मस्जिद ब्लास्ट में अब तक 69 की मौत, भारत-अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के आरोपों का दिया ये जवाब
इस्लामाबाद की एक मस्जिद में हुए भीषण आत्मघाती हमले में 69 लोगों की मौत हो गई. हमले के बाद भारत और अफगानिस्तान ने पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया.;
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(Image Source: @RitamVarta-X )पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शुक्रवार को जुमे के नामाज के दौरान उस वक्त दहल उठा, जब राजधानी की एक भीड़भाड़ वाली मस्जिद में हुए भीषण आत्मघाती हमले ने पूरे पाकिस्तान को हिला कर रख दिया. इस हमले में कम से कम 69 लोगों की मौत हो गई, जबकि 170 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं. हाल के वर्षों में इसे देश के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना जा रहा है.
हमले के बाद जहां एक ओर पूरे पाकिस्तान में शोक और गुस्से का माहौल है, वहीं दूसरी ओर यह त्रासदी तेजी से कूटनीतिक टकराव में बदल गई. इस्लामाबाद से लगे आरोपों को भारत और अफगानिस्तान ने सिरे से खारिज करते हुए पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा नाकामियों और 'घरेलू समस्याओं' को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है.
भारत ने लगाए आरोपों को बताया 'बेबुनियाद और निरर्थक'
नई दिल्ली से जारी एक कड़े बयान में भारत के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद हमले की निंदा की और निर्दोष लोगों की मौत पर संवेदना व्यक्त की. हालांकि, बयान में भारत की किसी भी तरह की संलिप्तता के आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया गया.
भारत ने स्पष्ट कहा कि ऐसे आरोप बेबुनियाद और निरर्थक हैं. बयान में कहा गया कि 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपने सामाजिक ताने-बाने को जकड़ चुकी समस्याओं से गंभीरता से निपटने के बजाय पाकिस्तान दूसरों को दोष देकर अपनी घरेलू विफलताओं से खुद को भ्रमित करना चुन रहा है.' भारत का यह बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने हमलावर के अफगानिस्तान से जुड़े होने और भारत-अफगान तालिबान के बीच कथित गठजोड़ का आरोप लगाया था.
पाक रक्षा मंत्री का दावा: अफगानिस्तान-भारत पर आरोप
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि आत्मघाती हमलावर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच आवाजाही कर रहा था. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत 'प्रॉक्सी वॉर' चला रहा है. आसिफ ने दावा किया कि एक अपमान जनक हार के बाद भारत के पास सीधे संघर्ष की हिम्मत नहीं बची है और इसी वजह से वह परोक्ष युद्ध का रास्ता अपना रहा है.
काबुल का तीखा जवाब: “बिना सबूत आदतन आरोप”
पाकिस्तान के इन आरोपों पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. अफगान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में इस्लामाबाद हमले की निंदा की गई, लेकिन साथ ही पाकिस्तानी अधिकारियों पर 'गैर-जिम्मेदाराना' और आदतन आरोप लगाने का आरोप लगाया गया. बयान में कहा गया कि पाकिस्तान बलूचिस्तान और अन्य इलाकों में हुए हमलों के लिए बार-बार अफगानिस्तान को दोषी ठहराता रहा है, वह भी बिना आवश्यक जांच किए और बिना किसी तरह की पड़ताल या सत्यापन के. अफगान मंत्रालय ने इन आरोपों को कोई तर्क या आधार से परे बताते हुए कहा कि यह सब पाकिस्तान की अपनी सुरक्षा नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश है.
अफगानिस्तान ने उठाए सवाल: रोका क्यों नहीं जा सका हमला?
अफगान रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तान से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि अगर पाकिस्तानी एजेंसियां हमले के तुरंत बाद हमलावरों की पहचान कर सकती हैं, तो वे पहले ही ऐसे हमलों को रोकने में क्यों नाकाम रहीं? बयान में कहा गया कि 'इस तरह की जल्दबाज़ी में की गई टिप्पणियां न तो सुरक्षा विफलताओं को छिपा सकती हैं और न ही मौजूदा समस्याओं का समाधान कर सकती हैं. तालिबान सरकार ने दोहराया कि वह इस्लामी सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है और निर्दोषों की हत्या को किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए जायज नहीं मानती. उसने साफ किया कि वह ऐसे हमलों के जिम्मेदार लोगों को न तो समर्थन देती है और न ही उन्हें पनाह.
'दोषारोपण नहीं, सहयोग की जरूरत'
काबुल ने इस्लामाबाद से अपील की कि वह जिम्मेदारी से बचने के बजाय अपनी नीतियों की समीक्षा करे, आंतरिक सुरक्षा मजबूत करे और पड़ोसी देशों के साथ 'सकारात्मक सहयोग और रचनात्मक जुड़ाव का रास्ता अपनाए, न कि दुश्मनी को बढ़ावा दे.
मस्जिद के भीतर धमाका, अस्पतालों में हाहाकार
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, आत्मघाती हमलावर ने मस्जिद के अंदर उस वक्त खुद को विस्फोट से उड़ा लिया, जब उसे सुरक्षा कर्मियों ने रोका. धमाका इतना जबरदस्त था कि नमाज के लिए जुटे सैकड़ों लोग इसकी चपेट में आ गए. इस्लामाबाद के अस्पतालों में पूरी रात अफरा-तफरी का माहौल रहा. डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने बताया कि घायलों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि इलाज के लिए संसाधन कम पड़ गए.
विशेषज्ञों की राय: पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक मुश्किलें
क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक अलगाव को उजागर करता है. दक्षिण एशिया के एक सुरक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक, 'पड़ोसियों को दोष देना अब पाकिस्तान की आदत बन चुकी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी विश्वसनीयता लगातार कम होती जा रही है.' विश्लेषकों का मानना है कि भारत और अफगानिस्तान, दोनों ही इस मुद्दे पर एक सुर में पाकिस्तान से यह कह रहे हैं कि उसे अपने देश के भीतर सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क और वैचारिक दरारों से निपटना होगा.
शोक के बीच बढ़ता दबाव
जब मृतकों के परिवार मातम मना रहे हैं और घायल जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं, तब पाकिस्तान सरकार पर जवाबदेही और ठोस कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है. इस्लामाबाद की यह त्रासदी न केवल गंभीर सुरक्षा चूक को उजागर करती है, बल्कि क्षेत्रीय तनाव को भी और गहरा कर गई है.