Iran Protests: आवाज उठाई तो नहीं छोड़ेगा खामेनेई! प्रदर्शनकारियों को 'नंगा' कर ठंड में छोड़ा, सीक्रेट इंजेक्शन और हर गली में मौत
Iran protests : ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ हुए हालिया जनआंदोलन के बाद जो सच्चाई सामने आ रही है, वह बेहद भयावह है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों में गिरफ्तार लोगों को जेलों में अमानवीय यातनाएं दी गईं - कड़ाके की ठंड में निर्वस्त्र रखा गया, ठंडे पानी से नहलाया गया और कई कैदियों को अज्ञात इंजेक्शन लगाए गए.;
Iran protests : ईरान की सड़कों से भले ही अब “मुल्ला मुर्दाबाद” और “जाविद शाह” जैसे नारे सुनाई न दे रहे हों, लेकिन पर्दे के पीछे एक ऐसा भयावह सच सामने आ रहा है, जो रूह को कंपा देने वाला है. अयातुल्ला अली खामेनेई के 45 साल पुराने धार्मिक शासन को चुनौती देने की कीमत ईरानी नागरिक आज जेलों के अंधेरे में चुका रहे हैं - जहां इंसानियत को नंगा कर दिया गया है, शब्दशः भी और रूपक में भी.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की जेलों से सामने आ रही जानकारियां किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं हैं. विरोध प्रदर्शनों में गिरफ्तार लोगों को कड़ाके की ठंड में नंगा कर जेल के आंगनों में खड़ा किया गया, उन पर बर्फीले पानी की बौछार की गई और कई कैदियों को ऐसे इंजेक्शन दिए गए, जिनके बारे में न तो बताया गया, न ही उनका कोई रिकॉर्ड रखा गया.
दिसंबर से शुरू हुआ विद्रोह, जनवरी में बदला नरसंहार में
दिसंबर के आखिरी हफ्ते में शुरू हुए ये विरोध-प्रदर्शन महज महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ नहीं थे. यह सीधे-सीधे खामेनेई की धार्मिक तानाशाही के खिलाफ जनता का गुस्सा था. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह सबसे बड़ा और सबसे खूनी जनउभार बताया जा रहा है. एक ईरानी अधिकारी ने माना कि अब तक कम से कम 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें लगभग 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है.
इंटरनेट बंद, ईरान अंधेरे में
जनवरी की शुरुआत में ईरान सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया. सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और विदेशी वेबसाइट्स को बंद कर दिया गया. लेकिन तकनीक ने रास्ता ढूंढ लिया - स्टारलिंक, चोरी-छिपे वीडियो, टूटी-फूटी फोन कॉल्स और गुप्त संदेशों के जरिए सच्चाई बाहर आने लगी.
हालांकि, जल्द ही खामेनेई शासन ने चीनी और रूसी सैन्य-ग्रेड जैमर लगाकर स्टारलिंक को भी बाधित कर दिया. इसके बाद सुरक्षाबलों ने घर-घर छापे मारकर सैटेलाइट उपकरण जब्त किए ताकि सामूहिक हत्याओं के सबूत मिटाए जा सकें.
‘हवा में खून की गंध’ और लाशों से भरी गलियां
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के ताजरीश और नरमक जैसे इलाकों में सड़कों पर इतना खून बहा कि नगर निगम के पानी के टैंकरों से सड़कें धोई गईं. एक स्टारलिंक संदेश में एक नागरिक ने लिखा, “हर व्यक्ति किसी न किसी अपने की मौत की खबर दे रहा है - यह अतिशयोक्ति नहीं है.” BBC से बात करते हुए एक चश्मदीद ने कहा, “हर गली में दो-तीन लोग मारे गए.”
जेलों के भीतर: कपड़े उतारे, यातना और यौन हिंसा
ब्रिटेन के डेली एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जेलों में बंद प्रदर्शनकारियों को खुले आंगनों में निर्वस्त्र खड़ा किया गया. कड़ाके की ठंड में उन पर पाइप से ठंडा पानी डाला गया. सबसे डरावनी बात यह कि कई कैदियों को ऐसे इंजेक्शन दिए गए जिनकी कोई जानकारी नहीं दी गई. कुर्दिस्तान मानवाधिकार नेटवर्क (KHRN) के मुताबिक, केर्मानशाह शहर में एक 16 वर्षीय किशोर समेत कई नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न किया गया. गार्जियन से बात करते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता रेबिन रहमानी ने बताया कि सुरक्षाबलों ने डंडों से न सिर्फ पिटाई की, बल्कि यौन अंगों को निशाना बनाया.
लाशों की कीमत: गोलियों का बिल
कई परिवारों ने दावा किया कि उनसे उनके मारे गए परिजनों को गोली मारने में इस्तेमाल की गई गोलियों की कीमत वसूली गई. कुछ मामलों में परिजनों पर दबाव डाला गया कि वे मृतकों को बसीज मिलिशिया का सदस्य घोषित करें, ताकि सरकार यह दिखा सके कि ज्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए.
‘मोहारिब’ का तमगा, फांसी की तैयारी
ईरानी शासन ने प्रदर्शनकारियों को ‘मोहारिब’ घोषित किया - यानी “ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाला”. इस आरोप की सजा सीधे मौत है. 26 वर्षीय दुकानदार इरफान सोल्तानी को इसी आरोप में मौत की सजा सुनाई गई. उनकी फांसी 14 जनवरी को तय थी, लेकिन वैश्विक दबाव और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों के बाद इसे टाल दिया गया.
मौतों के आंकड़े: सच्चाई अभी भी धुंध में
- HRANA (यूएस आधारित संगठन): 4,029 मौतें, 26,015 गिरफ्तार
- ईरान इंटरनेशनल: 12,000 तक मौतें
- CBS न्यूज़: 20,000 तक मारे जाने की आशंका
ईरानी सरकार ने इन आंकड़ों को खारिज करते हुए सारा दोष अमेरिका और इज़रायल समर्थित “दंगाइयों” पर मढ़ दिया है.
दुनिया की खामोशी और डरावना भविष्य
भले ही सड़कों पर विरोध शांत हो गया हो, लेकिन असली दहशत अब सामने आ रही है. निर्वस्त्र कैदी, रहस्यमयी इंजेक्शन, सामूहिक कब्रें, झूठे कबूलनामे - यह सब शायद उस बर्फीले पहाड़ की चोटी है, जिसके नीचे अत्याचार का पूरा हिमखंड छिपा है. ईरान आज भले शांत दिखे, लेकिन जेलों के भीतर इंसानियत अब भी चीख रही है - और दुनिया खामोश है.