एपस्टीन केस में भारतीय लड़की का जिक्र! जानें आखिर क्यों तलाश रही थी US एजेंसियां

एपस्टीन फाइल्स में भारतीय लड़की का जिक्र आय़ा है जिसके बाद सोशल में बवाल मचा हुआ है. अमेरिकी एजेंसियां मुआवजा फंड के तहत संपर्क करने की कोशिश में थीं. जानें पूरा मामला.

Jeffrey Epstein 

(Image Source:  @SachinGuptaUP- X )
Edited By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 16 Feb 2026 6:22 PM IST

जेफ्री एपस्टीन मामले में जारी किए गए हाल ही के दस्तावेजों से एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. इस रिकॉर्ड में दावा किया जा रहा है कि एपस्टीन फाइल्स के पीड़ितों में से एक भारतीय लड़की भी शामिल थी और अमेरिकी अधिकारी उसे पीड़ित मुआवजा फंड के तहत हानि पहुंचाने के लिए तलाश रहे थे.

आंतरिक ईमेल संचार से पता चलता है कि अमेरिकी एजेंसियां भारत में मौजूद इस कथित पीड़िता का पता और संपर्क विवरण जुटाने की कोशिश कर रही थीं, ताकि दूतावास के जरिए उससे संपर्क स्थापित कर कानूनी और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके.

13 जनवरी 2020 के ईमेल दावे में क्या-क्या?

13 जनवरी 2020 को एक आंतरिक ईमेल में भारत में स्थित एक पीड़िता का साफ उल्लेख है. इस ईमेल का शीर्षक 'Epstein Victims' था, जिसमें कई अहम जानकारियां काली स्याही से ढंकी हुई (रिडैक्टेड) हैं. ईमेल में लिखा है कि 'भारत में स्थित उस व्यक्ति के संबंध में यदि आप मुझे उसका पता और संपर्क विवरण उपलब्ध करा सकें, तो मैं वहां स्थित हमारे दूतावास के सहयोगियों के साथ समन्वय करूंगा. यदि आपका कोई इसके अलावा प्रश्न हों तो कृपया मुझे कॉल करें.' इस मैसेज से साफ है कि अमेरिकी अधिकारी भारत में मौजूद पीड़िता का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे.

मुआवजा प्रक्रिया को लेकर क्या निर्देश दिए गए थे?

'द पायनियर' की रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित ईमेल में न्यूयॉर्क क्राइम विक्टिम्स कम्पेनसेशन स्कीम का भी उल्लेख है. अधिकारियों ने मुआवजा आवेदन को आगे बढ़ाने और आवश्यक दस्तावेज एफबीआई को भेजने की बात कही थी. ईमेल में यह भी बताया गया कि पात्र पीड़ितों को इमरजेंसी विक्टिम असिस्टेंस के तहत थेरेपी सत्रों के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है. इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी एजेंसियां केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक सहायता सुनिश्चित करने पर भी काम कर रही थीं.

एपस्टीन की मौत के बाद क्यों तेज हुई कार्रवाई?

यह ईमेल संवाद अगस्त 2019 में जेफ्री एपस्टीन की जेल में मौत के कुछ महीनों बाद का है. एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों की सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप थे और वह ट्रायल का इंतजार कर रहा था. अमेरिकी अधिकारियों ने उसकी मौत को आत्महत्या करार दिया था. एपस्टीन की मौत के बाद भी पीड़ितों को न्याय और मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया जारी रही, जिसका प्रमाण ये दस्तावेज देते हैं.

क्या भारतीय एजेंसियों का भी हो सकता है रोल?

दस्तावेजों में अमेरिकी दूतावास के साथ समन्वय का उल्लेख यह संकेत देता है कि भारत में स्थित संबंधित पीड़िता तक पहुंचने के लिए कूटनीतिक माध्यमों का सहारा लिया जा सकता था. हालांकि, सार्वजनिक दस्तावेजों में पीड़िता की पहचान और वर्तमान स्थिति से जुड़ी जानकारी गोपनीय रखी गई है.

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