भारतीय डिप्लोमैट और जमात प्रमुख की ‘सीक्रेट मीटिंग’! कोई डील या सिर्फ डैमेज कंट्रोल, क्यों मचा बवाल?
India Bangladesh Relations: बांग्लादेश में नई सरकार गठन के लिए जारी चुनाव प्रचार के बीच जमात-ए-इस्लामी प्रमुख और भारतीय डिप्लोमैट की कथित सीक्रेट मुलाकात ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. सवाल यह पूछे जा रहे हैं कि क्या कोई डील हुई या यह सिर्फ राजनयिक बातचीत थी? जानिए पूरा सच, विवाद की वजह और इसके दूरगामी मायने.;
Indian Diplomat Meeting With Jamaat E Islami: बांग्लादेश में सियासी अस्थिरता के बीच आम चुनाव को लेकर सियासी दलों का प्रचार जारी है. इस बीच बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर भारत को केंद्र में रखकर सियासी बवंडर खड़ा करने की कोशिश हो रही है. जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान और भारतीय डिप्लोमैट्स के बीच हुई एक मुलाकात को लेकर 'सीक्रेट मीटिंग' और 'डील' जैसे शब्द उछाले जा रहे हैं. सवाल उठ रहे हैं कि गुप्त मुलाकात के दौरान दोनों के बीच क्या डील हुई? यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध कुछ तनावपूर्ण हैं.
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1. असल में क्या हुआ?
जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने स्वीकार किया कि उन्होंने 2025 के मध्य में दो भारतीय डिप्लोमैट्स से अपने घर पर बातचीत की थी. जब वे बायपास सर्जरी के बाद अस्पताल से घर लौटे थे. यह बातचीत अन्य देशों के राजनयिकों से हुई मुलाकातों की तरह ही थी. बातचीत में कोई गोपनीय नीति निर्धारण या समझौता शामिल होने जैसी कोई पुष्टि नहीं है. ना ही इसे आप सीक्रेट मीटिंग कह सकते हैं. शफीकुर्रहमान ने भारतीय डिप्लोमैट के साथ अपनी बैठक को सीक्रेट नहीं माना. इतना जरूर कहा कि भारतीय डिप्लोमैट्स की अनुरोध पर इसे सार्वजनिक नहीं करने का निर्णय हुआ था. वह खुद कहते हैं कि इसमें कोई गोपनीयता नहीं थी. उन्होंने मीडिया में 'गुप्त बैठक' की खबरों को भ्रामक और गलत बताया है. साथ ही कहा कि भारत के अलावा कई देशों के राजनयिक उनसे खुले तौर पर मिले थे.
2. क्यों चर्चा में आई यह बैठक?
दरअसल, Reuters सहित कुछ समाचार एजेंसियों ने इस मुलाकात की बात को इस रूप में फैलाया कि भारत अपनी नजदीकी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. खासकर बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव (फरवरी 2026) और राजनीतिक बदलावों के संदर्भ में. उनका तर्क था कि भारत संभावित नए राजनीतिक गठबंधनों से संपर्क साधने की कोशिश कर सकता है, लेकिन जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख ने यही स्पष्ट किया कि बातचीत भारत की पहल पर नहीं बल्कि सामान्य राजनयिक दौरे के दौरान हुई थी.
सीक्रेट मीटिंग पर सत्य कोई गोपनीय सौदा या डील नहीं हुई. जमात नेता ने बैठक को गुप्त शासन या राजनीतिक समझौते जैसा नहीं बताया. यह सिर्फ डिप्लोमैटिक मुलाकात थी, जो सामान्य राजनयिक संपर्क का हिस्सा मानी जा सकती है. जमात प्रमुख शफीकुर रहमान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध कुछ तनावपूर्ण हैं.
3. क्यों हुई जमात और भारतीय डिप्लोमैट की बैठक?
शफीकुर्रहमान ने सवाल उठाया कि जब कई डिप्लोमैट उनसे मिल रहे थे और कुछ मुलाकातों को सार्वजनिक किया गया था, तो इस बैठक को गुप्त रखने में परेशानी क्या थी? उन्होंने कहा, “हमें सभी देशों के लिए और सभी के साथ रास्ता खुला रखना चाहिए. हमारे संबंधों को बेहतर बनाने का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं है.” इस बयान के बाद भी भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
भारत सरकार के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि विभिन्न पार्टियों से संपर्क साधा जा रहा था. इसकी सबसे बड़ी वजह बांग्लादेश और पाकिस्तान की करीबियों को माना जा रहा है. भारत इसे अपनी सुरक्षा मानता है. यही कारण है कि सरकार बांग्लादेश से अपने रिश्ते सुधारने और आम चुनाव में हिस्सा लेने वाली पार्टियों से अपने संपर्क साधने के प्रयास कर रही है.
4. PAK के प्रति जमात का रुख क्या?
जमात ए इस्लामी आम सहमति वाली सरकार में शामिल होने के लिए तैयार है. बांग्लादेश में आगामी 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में यह कदम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शफीकुर्रहमान ने पाकिस्तान के साथ संबंधों पर सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वे सभी देशों के साथ संतुलित संबंध चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जमात ने कभी भी किसी एक देश के पक्ष में झुकाव नहीं दिखाया. उनका कहना है कि वे सभी राष्ट्रों का सम्मान करते हैं और संतुलित अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को प्राथमिकता देते हैं.
5. जयशंकर ने किस-किस से की मुलाकात?
1. तारिक रहमान
भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ढाका पहुंचने पर सबसे पहले खालिदा जिया के बेटे व BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की. उन्होंने तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संवेदना पत्र (PM मोदी का लेटर) सौंपा. इसमें भारत की तरफ से खालिदा जिया के प्रति गहरी संवेदना, सम्मान और उनके राजनीतिक योगदान के लिए भरोसा जताया गया कि उनकी 'दृष्टि और मूल्य' भारत-बांग्लादेश साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे. जयशंकर और रहमान की यह मुलाकात केवल सांत्वना संदेश देने तक सीमित थी. इस बारे में बताया गया है कि इसका मकसद राजनीतिक संवाद से सम्मान और भावनात्मक मान का ख्याल रखना है.
2. पाकिस्तान के विधानसभा स्पीकर
जयशंकर की ढाका यात्रा के दौरान पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से भी शिष्टाचार मुलाकात हुई, जिसमें दोनों ने सांकेतिक रूप से अभिवादन और हैंडशेक किया. इस मुलाकात का कोई आधिकारिक एजेंडा या विस्तृत चर्चा सामने नहीं आई. यह केवल डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के तहत आदान-प्रदान वाला औपचारिक क्षण था.
3. जयशंकर ने नहीं की कोई सियासी बैठक
कुछ रिपोर्टों में उल्लेख हुआ कि जयशंकर ने बीएनपी के अन्य नेताओं तथा अंतरिम गवर्नमेंट के सलाहकारों से भी बातचीत की, लेकिन इनसे जुड़े किसी गोपनीय समझौते या डील का कोई विश्वसनीय विवरण नहीं मिला. बांग्लादेशी अधिकारियों ने कहा कि जयशंकर का दौरा राजनीतिक संदेश देने के बजाय सम्मान प्रकट करने के लिए था. यह “राजनीतिक या नीति-निर्णय बैठक” नहीं थी.
4. क्या स्पष्ट नहीं हुआ?
कोई ठोस 'सीक्रेट डील' या बहुपक्षीय समझौता तय होने से संबंधित विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है. जयशंकर ने किसी बड़े आधिकारिक घोषणा या राजनीतिक समझौते का खुलासा नहीं किया. कोई बड़ा राजनीतिक बयान या भावी साझेदारी पर 'करार' सामने नहीं आया है.