खूनी प्रदर्शनों के बाद तेहरान में कैसे पटरी पर लौट रही है ज़िंदगी, जले शहर पर अब भी जख्मों के निशान

तेहरान में हाल के हफ्तों में हुए भीषण सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बाद धीरे-धीरे सामान्य जीवन लौट रहा है. हालांकि, शहर की इमारतें जली हुई हैं, गाड़ियां राख में बदली हैं और लोगों की आंखों में हिंसा के गहरे निशान अब भी मौजूद हैं. आर्थिक असंतोष और राजनीतिक अनिश्चितता के चलते शहर में तनाव बरकरार है.;

( Image Source:  X/@IKHORSAND )
Edited By :  प्रवीण सिंह
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ईरान की राजधानी तेहरान में हाल के हफ्तों में हुए भीषण सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बाद अब धीरे-धीरे सामान्य जीवन लौटता दिख रहा है, लेकिन सड़कों, इमारतों और लोगों की आंखों में हालिया हिंसा के गहरे निशान अब भी मौजूद हैं. एनबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के कई हिस्सों में जली हुई इमारतें, राख में बदली गाड़ियां और टूटे सरकारी दफ्तर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां हाल ही में कितना उग्र टकराव हुआ था.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 3,117 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि मानवाधिकार संगठनों का दावा इससे कहीं ज्यादा भयावह है. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी ने कहा है कि मृतकों की संख्या 5,137 तक पहुंच चुकी है. संगठन का दावा है कि उसके आंकड़े ईरान के अंदर मौजूद नेटवर्क से मिले इनपुट और कई स्तर की जांच के बाद जारी किए गए हैं.

आर्थिक संकट से उठा विद्रोह

इन प्रदर्शनों की चिंगारी आर्थिक बदहाली से भड़की. ईरानी मुद्रा रियाल के तेज़ी से गिरने और महंगाई के आसमान छूने से आम लोग बुरी तरह प्रभावित हुए. बेरोज़गारी, टैक्स का बोझ और रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतों में उछाल ने गुस्से को सड़कों पर ला दिया. धीरे-धीरे यह आंदोलन सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता में बैठे धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ खुली चुनौती में बदल गया. हजारों लोग सड़कों पर उतरकर मौजूदा शासन के अंत की मांग करने लगे.

इंटरनेट ब्लैकआउट में दब गई सच्चाई

इन घटनाओं की सही तस्वीर दुनिया तक पहुंचाना मुश्किल रहा, क्योंकि ईरान में दो हफ्तों से ज्यादा समय तक इंटरनेट ब्लैकआउट रहा. इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के मुताबिक, संचार सेवाएं जानबूझकर बाधित की गईं ताकि विरोध प्रदर्शनों की जानकारी बाहर न जा सके. इसके बावजूद कुछ वीडियो सोशल मीडिया तक पहुंचे, जिनमें सुरक्षा बलों को भीड़ पर गोलियां चलाते और शवों की कतारें दिखाई गईं.

जले सरकारी दफ्तर और बैंक

एनबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान में कई सरकारी इमारतों और बैंकों को निशाना बनाया गया. शहर के पूर्वी हिस्से में एक टैक्स ऑफिस लगभग पूरी तरह जलकर तबाह हो गया. डिस्ट्रिक्ट-7 इलाके में एक बड़ी राष्ट्रीय सुपरमार्केट चेन की दुकान को आग के हवाले कर दिया गया, जो महंगाई और आर्थिक तंगी के खिलाफ गुस्से का प्रतीक बन गया. कई इमारतों की दीवारें अब भी काली पड़ी हैं, जिन पर आग और गोलियों के निशान साफ देखे जा सकते हैं.

स्टारलिंक के ज़रिये बाहर पहुंचीं तस्वीरें

ईरानी सरकार का कहना है कि हिंसा से जुड़े कई वीडियो एलन मस्क की स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के ज़रिये विदेश भेजे गए. अधिकारियों का दावा है कि 2022–23 के प्रदर्शनों की तरह इस बार भी स्टारलिंक टर्मिनल्स की तस्करी कर ईरान में लाया गया था, ताकि सेंसरशिप को दरकिनार किया जा सके.

डर के साये में लौटती दिनचर्या

अब जबकि सड़कों से प्रदर्शनकारी हट चुके हैं, तेहरान के लोग फिर से अपनी दिनचर्या में लौटते दिख रहे हैं. दुकानें खुल रही हैं, ट्रैफिक सामान्य हो रहा है और दफ्तरों में भी चहल-पहल दिख रही है. लेकिन माहौल में खामोशी और डर साफ झलकता है. लोग खुलकर बोलने से बच रहे हैं और कई परिवार अपने खोए परिजनों का शोक मना रहे हैं.

ईरान में अस्थिरता का पुराना चक्र

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में अशांति कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी 1999, 2009, 2019 और 2022-23 में बड़े पैमाने पर आंदोलन हो चुके हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार हिंसा का स्तर और मौतों की संख्या कहीं ज्यादा बताई जा रही है. साथ ही, देश के सर्वोच्च नेता की खराब सेहत और उत्तराधिकारी को लेकर अनिश्चितता भी हालात को और नाज़ुक बना रही है.

अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिका की चेतावनी

इस कार्रवाई के बाद ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी झटका लगा है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बुलाया ही नहीं गया. इसके जवाब में अराघची ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखे लेख में अमेरिका को चेतावनी दी कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो वह “पूरी ताकत से जवाब देगा.” वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान की ओर नौसैनिक बेड़ा भेजा जा रहा है. ट्रंप के शब्दों में, “हम नहीं चाहते कि कुछ हो, लेकिन हम उन्हें बहुत करीब से देख रहे हैं.”

जले शहर में सुलगती बेचैनी

भले ही तेहरान की सड़कों पर अब शांति दिख रही हो, लेकिन यह शांति अस्थायी मानी जा रही है. आर्थिक संकट, राजनीतिक असंतोष और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने ईरान को एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां हालात कभी भी फिर से विस्फोटक हो सकते हैं. तेहरान में लौटती दिनचर्या दरअसल उस तूफान के बाद की खामोशी है, जिसके जख्म अब भी शहर की दीवारों और लोगों के दिलों पर दर्ज हैं.

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