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ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच सबसे बड़ा सवाल, खामेनेई तो जाएंगे लेकिन आएगा कौन, रेजा पहलवी-मोज़तबा या कोई और?

ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों ने खामेनेई के बाद सत्ता संक्रमण के सवाल को और तेज कर दिया है. एनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार न कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी, न संगठित विपक्ष - ईरान एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है.

iran leadership crisis after Khamenei
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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Updated on: 22 Jan 2026 12:08 PM IST

ईरान की सड़कों पर हालिया प्रदर्शनों को काबू कर लिया गया है, लेकिन देश की दीर्घकालीन नेतृत्व की समस्या अभी भी जटिल बनी हुई है. आयातोल्लाह अली खामेनेई, जो 86 वर्ष के हैं, अपने लंबे शासन के बाद या तो स्वास्थ्य कारणों से किसी और को ईरान की बागडोर सौंपेंगे या उनकी मौत के बाद सत्ता पर कोई नया नेता काबिज होगा. इस बीच, देश में हालिया हिंसक विरोध ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में Politico को दिए इंटरव्यू में कहा, “अब समय है कि ईरान में नए नेतृत्व की तलाश की जाए.”

वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने रविवार को स्पष्ट किया कि खामेनेई को सत्ता से हटाने का कोई विचार सहन नहीं किया जाएगा. उन्होंने X (पूर्व Twitter) पर लिखा, “हमारे देश के सुप्रीम लीडर पर हमला करना, ईरानी जनता के साथ युद्ध के बराबर होगा.” हालांकि विरोध और असंतोष ने यह दिखा दिया कि ईरान की शासनशक्ति, धार्मिक नेतृत्व और सुरक्षा बलों के बीच गहरी दरारें हैं, साथ ही विपक्ष के भीतर भी विभाजन मौजूद हैं.

उत्तराधिकारी का सवाल: कोई स्पष्ट विकल्प नहीं

सटीक उत्तर यही है कि ईरान के पास कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं है. पिछले लगभग 50 सालों से शासन करने वाले इस्लामिक शासन से बाहर निकलने का रास्ता सरल नहीं होगा. एल्ली गेरानमेयेह, यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की सीनियर पॉलिसी फेलो, NBC News को बताती हैं, “अगर ईरान क्रांति की राह पर जाता है, तो यह देश की ‘सीरियाईकरण’ होगी और खूनखराबा अत्यंत भयंकर होगा.” ईरान की अर्थव्यवस्था सतत संकटग्रस्त है, जबकि लगातार हो रहे प्रदर्शनों और घटती चुनावी भागीदारी से पता चलता है कि “शासन पर लोगों को ज्‍यादा भरोसा नहीं है और अधिकांश ईरानी इसे धार्मिक शासन से हटाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था चाहते हैं,” स्टिम्सन सेंटर की विशिष्ट फेलो बारबरा स्लाविन बताती हैं.

लेकिन समस्या यह है कि संगठित विपक्ष मौजूद नहीं है. हाल के हफ्तों में देश के शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे. यह विरोध 2009, 2019, 2022-23 और अब 2025-26 में लगातार जारी रहा है, लेकिन बड़े प्रदर्शन राजनीतिक बदलाव में बदल नहीं सके.

विपक्ष और प्रमुख व्यक्तित्व

ईरान में कुछ लिबरल सुधारक हैं, जैसे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नर्गेस मोहम्मदी, पूर्व प्रधानमंत्री मीर होसैन मूसवी, और पूर्व उप-गृह सचिव मोस्तफा ताज्ज़ादेह. लेकिन ये सभी या तो जेल में हैं या घर में नजरबंद हैं. स्लाविन कहती हैं, “शासन असहमति दबाने में माहिर है - वे विरोधियों को जेल में डाल देते हैं या निर्वासन में भेज देते हैं.”

अमेरिका में निर्वासित “राजकुमार”

सबसे जाना-माना विकल्प है रेजा पहलवी, जो खुद को “क्राउन प्रिंस” कहते हैं और ज्यादातर समय अमेरिका में निर्वासित रहे हैं. वे ईरान के पूर्व शाह के बेटे हैं, जिनका शासन CIA समर्थित तख्तापलट के बाद समाप्त हुआ था. पहलवी का दावा है कि वे ईरान को लोकतांत्रिक संक्रमण की ओर मार्गदर्शन कर सकते हैं. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “ईरानी जनता पहले ही बड़े पैमाने पर यह दिखा चुकी है कि वे किसे इस संक्रमण का नेतृत्व करते देखना चाहते हैं.”

पिछले साल पहलवी पेरिस में मीडिया के छोटे समूह को संबोधित करते दिखे थे. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि केवल देश को “शांति और लोकतांत्रिक संक्रमण” की ओर ले जाना है. पहलवी ईरानी डायस्पोरा में लोकप्रिय हैं, खासकर उन लोगों में जो उनके पिता के शासनकाल के बारे में व्यक्तिगत अनुभव नहीं रखते.

पहलवी की लोकप्रियता और आलोचना

कुछ प्रदर्शन वीडियो में पहलवी के समर्थन में ऑडियो भी जोड़ा गया. उनकी छवि को कुछ प्रदर्शनकारियों ने ऊंचा उठाया, लेकिन देश के भीतर उनकी वास्तविक लोकप्रियता का आंकलन करना कठिन है. ट्रम्प के ईरान में विशेष दूत रहे एलीट एब्राहम्स, कहते हैं, “पहलवी की नई लोकप्रियता ईरानी जनता की शासन के प्रति नफरत का परिणाम है. जब वे टीवी पर सफेद शर्ट और सूट पहनकर दिखाई देते हैं, तो वे आधुनिक जीवन का प्रतीक बन जाते हैं.”

हालांकि ट्रम्प ने पहलवी को लेकर मिश्रित विचार व्यक्त किए. एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, “वे बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन मैं नहीं जानता कि वे अपने देश में क्‍या और कैसे करेंगे. अगर ईरानी उन्हें स्वीकार करते हैं, तो मेरे लिए ठीक है.” कुछ आलोचकों ने पहलवी को इज़राइल के ईरान पर हमलों का समर्थन करने और प्रदर्शनकारियों पर काबू को “युद्ध” कहने के लिए भी आलोचना की.

सत्ता के अंदर के संभावित खिलाड़ी

अगर सत्ता में रहते हुए खामेनेई की मौत हो जाती हैं, तो उनके बेटे 56 वर्षीय मोज़तबा खामेनी, उत्तराधिकारी बन सकते हैं, लेकिन वह सार्वजनिक रूप से कम ही दिखाई देते हैं. उनके अलावा, ईरान के सबसे शक्तिशाली बल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) हैं, जिन्होंने पिछले साल इज़राइल के साथ 12-दिन के युद्ध में शीर्ष नेताओं को खो दिया. विश्लेषकों के अनुसार, अगर IRGC वर्तमान संकट से बाहर आता है, तो यह अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करते हुए नए सुप्रीम लीडर को मुख्य रूप से प्रतीकात्मक भूमिका दे सकता है. अन्य संभावित नेताओं में अली शमखानी, मोहम्मद-बघेर घालिबाफ, और अली लारीजानी शामिल हैं.

पैट्रिक क्लॉसन, वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो कहते हैं, “वे बहुत आंतरिक विरोध का सामना करेंगे, लेकिन उनके पास सिस्टम के भीतर कई सहयोगी भी होंगे. उनके क्रूर शासन में शामिल होना ट्रम्प के लिए कोई मुद्दा नहीं होगा.”

ईरान में खामेनेई के बाद नेतृत्व का भविष्य अस्पष्ट है. देश के भीतर कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं है, विपक्ष दबा हुआ है, और निर्वासित विकल्पों की शक्ति सीमित है. जबकि रेजा पहलवी और कुछ वरिष्ठ अधिकारी संभावित विकल्प के रूप में सामने हैं, असली परिवर्तन तब ही संभव है जब देश के अंदर मौजूद विरोधी और जनता सक्रिय रूप से भूमिका निभाए. ईरान के लंबे शासन और गहरे सत्ता-संघर्ष की वजह से, आगामी नेतृत्व संक्रमण कोई आसान या शांतिपूर्ण प्रक्रिया नहीं होने वाली है.

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