अमेरिकी फैशन ब्रांड अमेरिकन ईगल का इरादा अपनी गिरती लोकप्रियता को सुधारने और युवा महिला उपभोक्ताओं को आकर्षित करने का था. इसके लिए उसने मशहूर अभिनेत्री सिडनी स्वीनी को अपने नए विज्ञापन अभियान का चेहरा बनाया. परंतु विज्ञापन के प्रसारित होते ही यह एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया, जिसमें नस्लीय संकेतों के आरोप लगाए गए।

विज्ञापन में सिडनी स्वीनी द्वारा बोले गए शब्दों 'मेरे जीन्स नीले हैं' को लेकर आलोचकों ने कहा कि यह नस्लवादी प्रतीकों और विचारधाराओं की ओर इशारा करता है. हालांकि कंपनी ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक मामला व्हाइट हाउस तक पहुंच चुका था.

विज्ञापन में क्या था विवादित?

इस विज्ञापन में सिडनी स्वीनी कैमरे की ओर देखते हुए कहती हैं कि "जीन माता-पिता से संतानों में स्थानांतरित होते हैं, जो अक्सर बालों के रंग, व्यक्तित्व और यहां तक कि आंखों के रंग जैसे गुणों को निर्धारित करते हैं... मेरी जींस नीली है. यह वाक्य विज्ञापन में स्वीनी के डेनिम जैकेट और जीन्स पर केंद्रित था. लेकिन “genes” और “jeans” के बीच के शब्द-खेल को नस्लीय संकेतों से जोड़कर देखा गया.

नस्लवाद और यूजीनिक्स का काला अतीत

विज्ञापन की भाषा को लेकर उठे सवाल केवल शब्दों तक सीमित नहीं थे. आलोचकों ने इसे यूजीनिक्स (Eugenics) से जोड़कर देखा एक ऐसी विचारधारा, जो इंसानों की प्रजनन प्रणाली को नियंत्रित कर 'श्रेष्ठ नस्ल' बनाने का प्रयास करती थी.

यूजीनिक्स की अवधारणा ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस गैल्टन ने 1883 में दी थी. अमेरिका में इसे चार्ल्स डैवेनपोर्ट ने प्रचारित किया, और यह विचार 20वीं सदी की शुरुआत में एक सामाजिक आंदोलन में बदल गया. इसकी वजह से हजारों गरीब, विकलांग, अश्वेत और मूल निवासी लोगों को जबरन नसबंदी का शिकार होना पड़ा.

ट्रंप प्रशासन और विवादित बयान

इस पूरे प्रकरण पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'सिडनी स्वीनी, एक पंजीकृत रिपब्लिकन, का विज्ञापन सबसे हॉट है. उप राष्ट्रपति JD वेंस ने स्वीनी को 'All-American beautiful woman” बताया, और व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चुंग ने आलोचना को “cancel culture run amok” करार दिया.

यह बयान ऐसे समय पर आया है जब ट्रंप प्रशासन पहले ही नस्लीय और आव्रजन नीतियों को लेकर घिरा हुआ है. हाल ही में ट्रंप ने एक रैली में अपने समर्थकों को 'good genes' वाला बताया था और अवैध प्रवासियों को 'bad genes' वाला.

नस्लीय विचारधाराओं की वापसी?

नस्लीय श्रेष्ठता से जुड़ी भाषा और विचार धीरे-धीरे फिर से मुख्यधारा में लौटते दिख रहे हैं. ट्रंप और उनके समर्थकों द्वारा “ब्लड पॉयजनिंग” जैसे शब्दों का प्रयोग हिटलर के विचारों की याद दिलाता है. Great Replacement Theory जैसे विवादित विचारों को भी ट्रंप समर्थक नेता और मीडिया हस्तियां बढ़ावा दे रही हैं, जिसमें कहा जाता है कि श्वेत अमेरिकी अल्पसंख्यक बनते जा रहे हैं और उनकी नौकरियां प्रवासियों को दी जा रही हैं.

फैशन ब्रांड की चुप्पी और राजनीतिक माहौल

अमेरिकन ईगल ने इस विवाद पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया, लेकिन सोशल मीडिया पर इसके विज्ञापन पर लाखों प्रतिक्रियाएं आ चुकी हैं, आलोचक कहते हैं कि ऐसे शब्दों के चुनाव और ट्रंप प्रशासन की नीतियों के बीच संबंध को अनदेखा नहीं किया जा सकता. यह प्रकरण दिखाता है कि कैसे एक साधारण विज्ञापन भी सामाजिक और राजनीतिक संदर्भों में बेहद संवेदनशील मुद्दा बन सकता है.

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