Iran करा देता $5000 में ट्रंप की हत्या! पाक कारोबारी से आतंकी बना आसिफ मर्चेंट कैसे बना IRGC का मोहरा? कोर्ट में उगली पूरी सच्चाई
अमेरिका में एक चौंकाने वाले मामले में पाकिस्तानी मूल के कारोबारी आसिफ मर्चेंट पर बड़े अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा है, अदालत में सुनवाई के दौरान उसने दावा किया कि उसने यह कदम अपने परिवार को ईरान में मिल रही धमकियों के कारण उठाया,
Asif Merchant: न्यूयॉर्क में चल रहे एक आतंकवाद से जुड़े मुकदमे में पाकिस्तान के एक कारोबारी ने अदालत में चौंकाने वाला दावा किया है. आरोपी आसिफ मर्चेंट ने जूरी के सामने कहा कि उस पर ईरान के शक्तिशाली अर्धसैनिक संगठन रिवोल्यूशनरी गार्ड की ओर से अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश में शामिल होने का दबाव था.
47 वर्षीय आसिफ मर्चेंट के मुताबिक, संभावित निशानों में डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत निक्की हेली के नाम शामिल थे. उसने बताया कि उसने कथित तौर पर हिटमैन को 5,000 डॉलर नकद भी दिए थे. मर्चेंट का कहना है कि उसने यह सब अपने परिवार की सुरक्षा के डर से किया, क्योंकि उसे लगा था कि ईरान में रहने वाले उसके परिजनों को खतरा हो सकता है.
अमेरिका का ग्रीन कार्ड लेना चाहता था मर्चेंट
मर्चेंट ने अदालत में कहा कि वह वास्तव में किसी की हत्या नहीं करवाना चाहता था और उसे उम्मीद थी कि इससे पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उसने यह भी कहा कि वह बाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ सहयोग करना चाहता था, ताकि उसे ग्रीन कार्ड मिलने में मदद मिल सके.
कैसे एफबीआई के चंगुल में फंसा मर्चेंट?
अमेरिकी अधिकारियों को पहले से ही इस साजिश की जानकारी थी. जिन लोगों को मर्चेंट ने हिटमैन समझकर पैसे दिए थे, वे दरअसल एफबीआई के अंडरकवर एजेंट निकले. इसके बाद 12 जुलाई 2024 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया. यह गिरफ्तारी पेनसिल्वेनिया के बटलर में डोनाल्ड ट्रंप पर हुए एक अलग हमले की कोशिश से एक दिन पहले हुई थी.
मुकदमे के दौरान सहायक अमेरिकी अटॉर्नी नीना गुप्ता ने मर्चेंट से पूछा कि क्या वह अमेरिका इसलिए आया था ताकि माफिया के जरिए किसी राजनेता की हत्या करवा सके. इस पर मर्चेंट ने जवाब दिया, "हां, यह सही है." अदालत में चल रही सुनवाई ऐसे समय हो रही है जब ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तनाव भी चर्चा में हैं. हालांकि जूरी को निर्देश दिया गया है कि वे इस मामले से जुड़ी बाहरी खबरों पर ध्यान न दें. वहीं ईरान सरकार ने किसी भी अमेरिकी नेता की हत्या की साजिश रचने के आरोपों से इनकार किया है.
कौन है आसिफ मर्चेंट?
मर्चेंट ने बताया कि पाकिस्तान में लगभग 20 साल तक बैंकिंग क्षेत्र में काम करने के बाद वह कपड़ों का कारोबार, कारों की बिक्री, केले के निर्यात और अन्य व्यापारों से जुड़ा रहा. उसके दो परिवार हैं, एक पाकिस्तान में और दूसरा ईरान में. उसने दावा किया कि 2022 के आखिर में ईरान में उसकी मुलाकात रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक खुफिया अधिकारी से हुई थी.
खुफिया अधिकारी ने क्या सौंपा था काम?
मर्चेंट के मुताबिक, शुरुआत में बातचीत हवाला सिस्टम के जरिए पैसे ट्रांसफर करने को लेकर हुई थी. बाद में उस संपर्क ने उसे अमेरिका में ऐसे लोगों की तलाश करने को कहा जो ईरान के लिए काम करने को तैयार हों. उसने बताया कि उसी दौरान उसे किसी अपराधी की तलाश करने को कहा गया, जो विरोध प्रदर्शन करा सके, चोरी कर सके, मनी लॉन्ड्रिंग कर सके और संभव हो तो किसी की हत्या भी करवा सके.
क्या ट्रंप पर हमले का बनाया था पूरा प्लान?
मर्चेंट का कहना है कि उसे ठीक-ठीक यह नहीं बताया गया था कि किसे निशाना बनाना है, लेकिन बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली के नाम लिए गए थे. उसने अदालत में यह भी कहा कि जब अप्रैल 2024 में ह्यूस्टन एयरपोर्ट पर अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों ने उससे पूछताछ की, तो उसे लगा कि उस पर नजर रखी जा रही है. इसके बावजूद उसने ट्रंप की रैलियों की लोकेशन देखीं, हमले की योजना बनाई और कथित हिटमैन से संपर्क किया.
मर्चेंट ने पहले क्यों नहीं बताया?
मर्चेंट का कहना है कि वह ईरान में अपने संपर्क को झूठी जानकारी भेजता रहा और यह सब उसने डर की वजह से किया. उसका दावा है कि उस संपर्क को उसके ईरान में रहने वाले रिश्तेदारों की जानकारी थी. हालांकि अभियोजन पक्ष का कहना है कि मर्चेंट ने गिरफ्तारी से पहले कभी भी अधिकारियों से संपर्क नहीं किया और न ही अपने एफबीआई इंटरव्यू के दौरान यह बताया कि वह किसी दबाव में काम कर रहा था.
मर्चेंट ने अदालत में कहा कि उसे लगा कि एजेंट उसकी बात पर भरोसा नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें लगता था कि वह कोई 'सुपर स्पाई' है. जब बचाव पक्ष के वकील ने उससे पूछा कि क्या वह सच में कोई सुपर स्पाई है, तो मर्चेंट ने जवाब दिया, 'नहीं, बिल्कुल नहीं.'