ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या ने पश्चिम एशिया की राजनीति को हिला दिया है. इज़राइल और अमेरिका पर लगे आरोपों के बीच मिडिल ईस्ट दो धड़ों में बंटता दिख रहा है. इस उथल-पुथल का असर भारत पर भी पड़ सकता है - चाहे वह कच्चे तेल की सप्लाई हो, चीन-पाकिस्तान की रणनीतिक चालें हों या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक नीति. रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जसिंदर सिंह सोढ़ी की स्टेट मिरर हिंदी के साथ खास बातचीत में सामने आया कि यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने वाली घटना है. सवाल यह है कि क्या इससे मिडिल ईस्ट में शांति आएगी या नई जंग की शुरुआत होगी?