1990 में कोलकाता के हाजरा मोड़ पर हुए लाठीचार्ज ने Mamata Banerjee की राजनीति को नई पहचान दी और उन्हें 'स्ट्रीट फाइटर दीदी' के रूप में स्थापित कर दिया. 1984 में दिग्गज वाम नेता Somnath Chatterjee को हराने से लेकर Jyoti Basu के लंबे वाम शासन को चुनौती देने तक, ममता ने जमीनी राजनीति के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की. सिंगूर और नंदीग्राम के भूमि अधिग्रहण विरोध आंदोलनों ने बंगाल की राजनीति की दिशा बदल दी और 2011 में All India Trinamool Congress की ऐतिहासिक जीत के साथ 34 साल पुराने वाम शासन का अंत हुआ. यह कहानी एक जुझारू कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री बनने तक के उनके संघर्ष, टकराव और नेतृत्व शैली को दर्शाती है.